Uttarakhand: कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत की मुश्किलें बढ़नी तय, इस मामले में कार्रवाई की सिफारिश

कार्बेट नेशनल पार्क के तहत पाखरो टाइगर सफारी निर्माण में सीईसी ने पूरे प्रकरण के लिए तत्कालीन वन मंत्री हरक सिंह के साथ ही तत्कालीन डीएफओ किशन चंद को भी जिम्मेदार ठहराया गया है।

Harak Singh Rawat Former Forest Minister Congress leader Pakhro Tiger Safari Corbett National Park

उत्तराखंड के पूर्व वन मंत्री और कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। कार्बेट नेशनल पार्क के तहत पाखरो टाइगर सफारी निर्माण के दौरान अवैध रुप से काटे गए पेड़ों और पार्क क्षेत्र में कंक्रीट के निर्माण मामले में हरक सिंह पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है। सुप्रीम कोर्ट की उच्चाधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी रिपोर्ट में पूरे प्रकरण के लिए तत्कालीन वन मंत्री हरक सिंह के साथ ही तत्कालीन डीएफओ किशन चंद को भी जिम्मेदार ठहराया गया है। समिति ने हरक सिंह को नोटिस भेजने के साथ ही उनका जवाब आने के बाद उचित कार्रवाई करने की संस्तुति भी की है।

वर्ष 2020 में सुर्खियों में आया

कालागढ़ टाइगर रिजर्व में टाइगर सफारी और वन्यजीव बचाव केंद्र (रेस्क्यू सेंटर) का मामला वर्ष 2020 में सुर्खियों में आया। अवैध कटान व निर्माण की शिकायत पर एनटीसीए ने स्थलीय निरीक्षण किया। एनटीसीए ने दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति की। मामले में तत्कालीन मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस सुहाग व कालागढ़ के तत्कालीन डीएफओ किशन चंद को निलंबित किया गया था। दोनों अधिकारी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। तब कार्बेट टाइगर रिजर्व के तत्कालीन निदेशक राहुल को वन मुख्यालय से संबद्ध किया गया था। प्रकरण की विभागीय और विजिलेंस जांच में कदम-कदम पर अनियमितता की पुष्टि हुई थी। इस बीच सीईसी ने भी प्रकरण का संज्ञान लिया। साथ ही शासन से रिपोर्ट मांगी। अब सीईसी ने संस्तुतियों सहित अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है। रिपोर्ट में कहा है कि राज्य सरकार और विजिलेंस पाखरो टाइगर सफारी और अन्य अवैध गतिविधियों में शामिल तत्कालीन डीएफओ किशनचंद समेत अनियमितता में शामिल अधिकारियों के विरुद्ध वन एवं वन्यजीव अधिनियम के तहत कार्रवाई जारी रखे। साथ ही राज्य सरकार छह माह के भीतर इसकी कार्रवाई की रिपोर्ट सीईसी के जरिये सुप्रीम कोर्ट को प्रस्तुत करे।

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    पूछताछ के साथ ही कार्रवाई की सिफारिश
    सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण(एनटीसीए) वर्ष 2019 में जारी दिशा निर्देशों के अनुसार, टाइगर सफ़ारी केवल अधिसूचित टाइगर रिजर्व के बाहर और बाघों के प्राकृतिक आवास के बाहर स्थापित की जा सकती है। लेकिन इस मामले में इन बातों का ध्यान नहीं रखा गया। पूर्व वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत पर आरोप है कि उन्होंने इस मामले में तत्कालीन डीएफओ किशन चंद के गलत कामों को बढ़ावा दिया। इसलिए उनसे पूछताछ के साथ ही कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

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