नौकरी दिलाने के नाम पर साइबर ठगी का दुबई, चाईना व पाकिस्तान से कनेक्शन, जानिए कैसे काम करता है इंटरनेशनल गिरोह
उत्तराखंड की एसटीएफ टीम ने अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह के तीन अभियुक्तों को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। आरोपी चीनी और पाकिस्तानी एजेंटों के साथ काम करते थे।
पकड़े गए गिरोह ने देहरादून निवासी एक पीड़ित के साथ लगभग 23 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी की गई। अभियुक्तों ने विदेशों में बैठे साइबर ठगों की मदद से बाईनेन्स एप्प, Trust Wallet के माध्यम से USDT क्रिप्टो करेंसी खातों में धनराशि का लेन देन भी किया।

पुलिस पड़ताल में ये भी सामने आई है कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने भारत के विभिन्न राज्यों में कई लोगों को ठगा है। एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आयुष अग्रवाल ने बताया कि मोहब्बेवाला देहरादून निवासी पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई कि अज्ञात साइबर ठगों द्वारा पीडित को व्हाट्सएप नं0 से फोन कर बताया कि उन्हें naukri.com से रिज्यूम प्राप्त हुआ है, जिसके लिये पहले रजिस्टेशन चार्ज 14,800/-रुपये का जमा कराया गया।
पीड़ित द्वारा भुगतान करने के बाद [email protected] से इन्टरव्यू के लिए SKYIP से फोन आया तथा उनके द्वारा लगभग 1 घंटे तक टैक्निकल इन्टरव्यू लिया गया। बाद में फाइनल राउंड के लिए इन्टरव्यू लेने के बाद सलेक्शन हो जाने की बात कहकर दस्तावेज वैरिफिकेशन, जॉब सिक्यिोरिटी, फास्ट ट्रैक वीजा तथा IELTS exam आदि के नाम पर क्वीक सोल्यूशन (Quick Solution) अकाउंट में रुपये जमा कराये गये।
इसके बाद शिकायतकर्ता को बताया गया कि उसके द्वारा IELTS exam के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं किया गया जिस कारण वीजा कैन्सिल किया जा रहा है तथा पीडित का पैसा 03 महीने में वापस करने की बात कही गयी। इसके बाद इसी प्रकार पीड़ित को अन्य व्हाट्सएप नं0 से पुनः कॉल आयी व coca cola uk as AVP (Operation) में वेकैन्सी होना बताकर फिर से वही रजिस्ट्रेशन, इण्टरव्यू आदि दोहराकर शिकायतकर्ता से पुनः विभिन्न खातों में भुगतान कराकर कुल 22,96,000/- (बाईस लाख छियानवे हजार) रुपये की साईबर ठगी की गई।
एसटीएफ ने पूरे मामले की बारीकी से जांच की। जिसके आधार पर दिल्ली से अलमास आजम, अनस आजम व सचिन अग्रवाल को मेट्रो स्टेशन जनकपुरी वैस्ट दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे फर्जी आईडी, मोबाइल नंबर, व्हाट्सएप, टेलीग्राम और जानी-मानी कंपनियों से मिलते-जुलते ईमेल पते का उपयोग करके नौकरी चाहने वालों से संपर्क करते हैं। इस गिरोह में दुबई का मास्टरमाइंड (पाकिस्तानी एजेंटों) भारतीय सहयोगी को शामिल करता है, जो पूरे बैंक खाते के किट प्राप्त करते हैं।
चीनी एजेंट व्हाट्सएप और टेलीग्राम के माध्यम से क्रिप्टो भुगतान और वास्तविक समय (real time) में यूपीआई विवरणों के लिए निर्देश देते हैं। गिरोह के अन्य सदस्य बिनांस और ट्रस्ट वॉलेट जैसी क्रिप्टो प्लेटफ़ॉर्म से USDT (जो क्रिप्टो लेन-देन में उपयोग होता है) खरीदते हैं। USDT को बिनांस वॉलेट में ट्रांसफर किया जाता है और जुड़े हुए विदेशी ठग इसे 90 रुपये प्रति USDT के बजाय 104 रुपये प्रति USDT के भाव से भारतीय रुपये भेजते हैं।
मुनाफे को आपस में बांटा जाता है, जिसमें 7 रुपये सचिन को और बाकी 7 रुपये आज़म भाइयों को दिया जाता है। आज़म भाइयों को प्रत्येक फर्जी खाते के लिए अतिरिक्त कमीशन भी मिलता है। प्रारम्भिक पूछताछ में अभियुक्तगणों द्वारा दुबई, चाईना व पाकिस्तान से कनैक्शन होना स्वीकार किया गया है जिनके सम्बन्ध में इनके मोबाइल फोन में भी व्हाट्सएप, टेलीग्राम के माध्यम से चैटिंग होनी पायी।
जिसमें आपस में बैंक खातों की यूपीआई आईड़ी, खातों की डिटेल्स, क्यूआर कोड़, स्केनर आदि का आदान प्रदान किया गया है इसके अलावा USDT क्रीप्टोकरेंसी में एक दूसरे से खातों में भारतीय रुपये का ट्रांजेक्शन सम्बन्धी चैटस पाई गयी है।












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