सीएम धामी के ताबड़तोड़ फैसलों के बाद अब भू कानून पर टिकी सबकी निगाहें, जानिए क्या हुआ अब तक

संशोधन के अध्ययन एवं परीक्षण के लिए बनाई गई है समिति

देहरादून, 4 अप्रैल। पुष्कर धामी सरकार के दूसरे कार्यकाल में कामकाज संभालते ही लगातार बड़े फैसलों पर मुहर लग रही है। साथ ही जो वादे चुनाव में धामी ने किए सीएम बनते ही उनको पूरा करने में जुटे हैं। अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर भू कानून को लेकर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। भू कानून को लेकर एक बार फिर प्रदेश भर से आंदोलन के रूप में आवाज आने लगी है। भू-कानून की मांग को लेकर उत्तराखंड में संशोधन के अध्ययन एवं परीक्षण के लिए गठित समिति की अगली बैठक 6 अप्रैल को होनी है। अब तक दो बैठकें हो चुकी हैं।

 After the swift decisions of CM pushkar singh Dhami, all eyes are now on the land law, know what happened so far

कमेटी कर रही रिपोर्ट तैयार
धामी सरकार ने सशक्त भू-कानून को लेकर पूर्व मुख्य सचिव सुभाष कुमार की अध्यक्षता में समिति गठित की है। लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं हो पाया था। भाजपा ने चुनावी घोषणा पत्रमें भी भू-कानून का वादा किया है। ऐसे में अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री पर टिकी हुई है। जानकारों का मानना है कि सरकार का पहला सत्र गैरसेंण में होना है। इस सत्र में सरकार भू कानून को लेकर बड़ा फैसला ले सकती है। भूमि कानून में संशोधन पर पुनर्विचार के लिए पूर्व मुख्य सचिव सुभाष कुमार की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। समिति की ओर से इस संबंध में जिलों से सूचनाएं मांगी गई थीं, जिन पर ​समिति को अब त​क संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाया है। भू-कानून के परीक्षण और अध्ययन के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने पिछले दिनों आम लोगों, संस्थाओं और तमाम स्टेक होल्डर्स से इस संबंध में सुझाव आमंत्रित किए थे। लेकिन समिति को उम्मीद से कम सुझाव प्राप्त हुए।

क्या है उत्तराखंड भू कानून?
साल 2000 में उत्तराखंड राज्य बना। प्रदेश में बड़े स्तर पर हो रही कृषि भूमि की खरीद फरोख्त, अकृषि कार्यों और मुनाफाखोरी की शिकायतों पर साल 2002 में कांग्रेस सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने संज्ञान लेते हुए साल 2003 में 'उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950' में कई बंदिशें लगाईं। इसके बाद किसी भी गैर-कृषक बाहरी व्यक्ति के लिए प्रदेश में जमीन खरीदने की सीमा 500 वर्ग मीटर हो गई। इसके बाद साल 2007 में बीजेपी की सरकार आई और तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी ने अपने कार्यकाल में पूर्व में घोषित सीमा को आधा कर 250 वर्ग मीटर कर दिया। लेकिन यह सीमा शहरों में लागू नहीं होती थी। 2017 में भाजपा सरकार आने के बाद इस अधिनियम में संशोधन करते हुए प्रावधान कर दिया गया कि अब औद्योगिक प्रयोजन के लिए भूमिधर स्वयं भूमि बेचे या फिर उससे कोई भूमि खरीदे तो इस भूमि को अकृषि करवाने के लिए अलग से कोई प्रक्रिया नहीं अपनानी होगी। औद्योगिक प्रयोजन के लिए खरीदे जाते ही उसका भू उपयोग अपने आप बदल जाएगा और वह अकृषि या गैर कृषि हो जाएगा। इसी के साथ गैर कृषि व्यक्ति द्वारा खरीदी गई जमीन की सीमा को भी समाप्त कर दिया गया। अब कोई भी कहीं भी जमीन खरीद सकता हैा इस कानून को लेकर लोग लंगे समय से विरोध कर हिमाचल की तर्ज पर भू कानून की मांग कर रहे हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+