कौन हैं वो Akhilesh के करीबी सपा सांसद, जिन्होंने हिंदुओं को बताया 'जहरीला'? 12 साल में कितनी संपत्ति जुटाई?
Akhilesh Yadav SP MP Javed Ali Khan News: समाजवादी पार्टी (सपा) के राज्यसभा सांसद जावेद अली खान के हालिया बयान ने राजनीतिक गलियारों में तूफान खड़ा कर दिया है। मुरादाबाद दौरे के दौरान दिए गए उनके विवादित बयान में उन्होंने बीजेपी पर समाज में विभाजन फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी द्वारा फैलाया गया 'जहर' बहुसंख्यक समाज (हिंदू समाज) पर असर कर चुका है। उन्होंने कहा कि बहुसंख्यक समाज काफी हद तक जहर हो गया है।
यह बयान न सिर्फ सपा-बीजेपी के बीच तीखी बहस का कारण बना, बल्कि सांप्रदायिक सद्भाव और राजनीतिक भाषा की सीमाओं पर सवाल भी उठा रहा है। आइए विस्तार से समझते हैं कि जावेद अली खान कौन हैं, अखिलेश यादव के साथ उनका रिश्ता क्या है, उन्होंने 12 साल में कितनी संपत्ति बढ़ाई ?

जावेद अली खान का विवादित बयान क्या है?
मुरादाबाद में मीडिया से बातचीत करते हुए जावेद अली खान ने कहा कि बीजेपी की राजनीति ने देश में धर्म के आधार पर लोगों के बीच विश्वास को कमजोर कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न समुदायों के बीच दूरी बढ़ गई है और बहुसंख्यक समाज 'जहर' से प्रभावित हो गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी व्यक्ति पर व्यक्तिगत आरोप नहीं लगा रहे, बल्कि बीजेपी के नैरेटिव का असर बता रहे हैं। साथ ही, सपा उन क्षेत्रों में भी संगठन मजबूत करेगी जहां हिंदू आबादी अधिक है। संभल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां पार्टी का पहले से मजबूत आधार है, लेकिन अन्य जगहों पर ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। यह बयान विपक्षी दलों की तरफ से अक्सर आने वाले 'ध्रुवीकरण' के आरोपों का हिस्सा है, लेकिन 'जहरीला' शब्द का इस्तेमाल विवादास्पद माना जा रहा है। बीजेपी ने इसे सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाला बताया है।
Who Is Javed Ali Khan: जावेद अली खान कौन हैं?

- जावेद अली खान समाजवादी पार्टी के उन वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं, जिन्होंने छात्र राजनीति से लेकर संसद तक का लंबा सफर तय किया है। उत्तर प्रदेश के संभल-चंदौसी क्षेत्र से जुड़े जावेद अली खान पार्टी के प्रमुख मुस्लिम चेहरों में शामिल हैं और संगठन के साथ-साथ संसदीय राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
- उनका जन्म 31 अक्टूबर 1962 को हुआ था। उन्होंने हैदराबाद स्थित उस्मानिया विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एम.ए. की पढ़ाई की। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कृषि को अपना पेशा बनाया, लेकिन उनकी पहचान राजनीति में अधिक मजबूत हुई। उनके पिता का नाम अशफाक अली खान है, जबकि उनकी पत्नी शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं।
- जावेद अली खान का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। वे जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्र संघ के महासचिव भी रह चुके हैं। छात्र जीवन के दौरान ही उन्होंने संगठनात्मक राजनीति का अनुभव हासिल किया, जिसने आगे चलकर उनके राजनीतिक करियर की मजबूत नींव रखी। समाजवादी पार्टी ने वर्ष 2005 में उन्हें मुरादाबाद का जिला अध्यक्ष बनाया। इसके बाद 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें ठाकुरद्वारा सीट से उम्मीदवार बनाया। हालांकि वे यह चुनाव जीत नहीं सके, लेकिन पार्टी संगठन में उनकी सक्रियता लगातार बनी रही।
- साल 2014 में समाजवादी पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए पहली बार राज्यसभा भेजा। राज्यसभा में उनका कार्यकाल 2020 तक रहा। इसके बाद 2022 में पार्टी ने उन्हें दोबारा राज्यसभा के लिए नामित किया। वे संसद में पार्टी के विभिन्न मुद्दों को उठाने के साथ-साथ अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े विषयों पर भी मुखर रहे हैं। आज जावेद अली खान समाजवादी पार्टी की अल्पसंख्यक राजनीति के महत्वपूर्ण नेताओं में गिने जाते हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनकी पहचान एक अनुभवी संगठनकर्ता और संसदीय मामलों की अच्छी समझ रखने वाले नेता के रूप में बनी हुई है।
Akhilesh Yadav के कितने करीबी?
जावेद अली खान को अखिलेश यादव के भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता है, हालांकि वे पार्टी के सबसे आंतरिक रणनीतिक कोर ग्रुप (जैसे प्रो. रामगोपाल यादव) का हिस्सा नहीं माने जाते।
- 2014 और 2022 दोनों बार राज्यसभा टिकट मिलना उनके प्रति नेतृत्व के विश्वास को दिखाता है।
- वे पार्टी की अल्पसंख्यक नीति और संसद में सपा के रुख को मजबूती से रखते हैं।
- 2022 के चुनाव में कपिल सिब्बल के साथ नामांकन को भी अखिलेश के फैसले के रूप में देखा गया।
वे पर्दे के पीछे संगठन को मजबूत करने और संसद में पार्टी लाइन को आगे बढ़ाने वाले नेता के रूप में जाने जाते हैं।
Javed Ali Khan Net Worth: 12 साल में संपत्ति में कितनी बढ़ोतरी?
जावेद अली खान की संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। MyNeta डेटा के अनुसार,
- 2014 (पहला राज्यसभा शपथ पत्र): कुल संपत्ति लगभग 88.29 लाख रुपये।
- 2022 (दूसरा राज्यसभा शपथ पत्र): कुल संपत्ति 3.54 करोड़ रुपये (कोई देनदारी नहीं)।
बढ़ोतरी: लगभग चार गुना (300% से अधिक)।
यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से कृषि भूमि, अचल संपत्तियों और अन्य निवेशों से हुई बताई जाती है। 2022 के एफिडेविट में उनके पास कृषि भूमि और अन्य संपत्तियों का उल्लेख है। राजनीति में सक्रिय रहने के दौरान संपत्ति में वृद्धि सामान्य सवाल उठाती है, हालांकि उन्होंने कोई गैरकानूनी स्रोत नहीं बताया।
Samajwadi Party Javed Ali Khan Politcial Jounery: छात्र नेता से राज्यसभा तक
जावेद अली खान का सफर मेहनत और समाजवादी विचारधारा से जुड़ा है:
- छात्र राजनीति: जामिया छात्र संघ महासचिव।
- सपा में प्रवेश: 2005 में मुरादाबाद जिला अध्यक्ष।
- 2007 विधानसभा चुनाव: ठाकुरद्वारा से हार।
- 2014 राज्यसभा: पहला कार्यकाल (2014-2020)।
- 2022 राज्यसभा: दूसरा कार्यकाल (2022-2028)।
संसद में उन्होंने अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति, शिक्षा, सामाजिक न्याय, मुस्लिम समुदाय से जुड़े मुद्दे और बजट में अल्पसंख्यक योजनाओं पर सवाल उठाए। 2025 के बजट पर भी उन्होंने कटौती का मुद्दा उठाया।
सांसद का रिपोर्ट कार्ड कैसा? यहां देखें...
Javed Ali Khan Criminal Case: कितने मुकदमे दर्ज हैं?
2022 के एफिडेविट में उनके खिलाफ 1 आपराधिक मामला दर्ज है, जो चुनावी नियमों और कोविड काल से जुड़ा है। हालांकि, कोई दोषसिद्धि नहीं हुई है। वे अक्सर सांप्रदायिक सद्भाव, अल्पसंख्यक अधिकारों और विपक्षी मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं।
जावेद अली खान का बयान एक बार फिर याद दिलाता है कि राजनीतिक भाषा कितनी संवेदनशील होनी चाहिए। 'जहरीला' जैसे शब्द समाज को बांटने के आरोप लगाते हुए खुद विभाजन पैदा कर सकते हैं। दूसरी ओर, उनकी संपत्ति में चार गुना बढ़ोतरी राजनीति में रहकर वैध तरीके से कमाई के सवाल भी खड़े करती है। अखिलेश यादव के भरोसेमंद नेता के रूप में वे सपा की अल्पसंख्यक चेहरा बने हुए हैं।
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