BJP कार्यकर्ताओं को बूस्टअप करने की तैयारी, मंडलों का दौरा कर सरकार के कामकाज का फीडबैक लेंगे योगी

लखनऊ, 20 अगस्त: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दूसरी बार सत्ता की कमान संभालने के बाद अपने मंत्रियों को मंडलों का प्रभार सौंपा था। इन मंत्रियों के दौरों का फीडबैक भी सीएम खुद ले रहे हैं। सभी मंडलों में सरकार की कुछ न कुछ बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं और उन जिलों में कानून व्यवस्था की क्या स्थिति है इसको लेकर भी वो लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। अब सूत्रों की माने तो मुख्यमंत्री ने जमीनी स्तर पर सरकारी कामों की हकीकत क्या है इसका फीडबैक लेने के लिए वह सभी 18 मंडलों का जल्द ही दौरा शुरू करेंगे। इस दौरान वह पार्टी कार्यकर्ताओं से पूरी जानकारी लेंगे।

महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लेंगे फीडबैक

महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लेंगे फीडबैक

पार्टी सूत्रों ने कहा कि मुख्यमंत्री आने वाले दिनों में सभी मंडल मुख्यालयों और प्रमुख जिलों का दौरा कर विधानसभा चुनाव के दौरान अपनी सरकार की ओर से शुरू की गई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का जायजा ले सकते हैं। मौजूदा राजनीतिक स्थिति का आकलन करने के लिए योगी मुख्य रूप से सांसदों, विधायकों, एमएलसी और पार्टी के अन्य पदाधिकारियों सहित जनप्रतिनिधियों से मिलेंगे। बिहार में हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के मद्देनजर भाजपा विरोधी राजनीतिक मोर्चे के गठन की आशंका के बीच मुख्यमंत्री के इस कदम को काफी अहम माना जा रहा है।

कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे योगी

कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे योगी

यूपी बीजेपी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि पार्टी संवाद में विश्वास करती है और पार्टी कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों से फीडबैक लेती है। उनकी आवाज को पार्टी और सरकार के समग्र कामकाज में शामिल किया जाता है। हाल ही में सहारनपुर में पार्टी के पदाधिकारियों से कहा गया था कि वे उन अधिकारियों की सूची भेजें जो उनकी मांगों पर गौर नहीं करते हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि पार्टी संगठन और राज्य सरकार के बीच समन्वय बढ़ाने की कोशिश कर रही है। यूपी बीजेपी के नए अध्यक्ष को चुनने में पार्टी के सूक्ष्म दृष्टिकोण के बीच योगी का संगठनात्मक आउटरीच भी आता है।

पार्टी के कार्यकताओं को बूस्टअप करने की कोशिश

पार्टी के कार्यकताओं को बूस्टअप करने की कोशिश

हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञों ने कहा कि सीएम के रुख ने संभावित रूप से जमीनी स्तर पर पार्टी के पदाधिकारियों को सक्रिय करने के लिए एक आक्रामक रणनीति अख्तियार की है। भाजपा सूत्रों ने कहा कि पार्टी यूपी के क्षेत्रीय राजनीतिक क्षत्रपों को किसी भी हालत में उभरने देना नहीं चाहती है। विशेषतौर से सपा प्रमुख अखिलेश यादव को जो लगातार खुद को भाजपा के प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में पेश करते रहे हैं। हाल ही में उपचुनावों में आजमगढ़ और रामपुर में बीजेपी ने अखिलेश की रण्नीति को मात देते हुए जीत दर्ज की थी।

विपक्ष का दावा- बिहार में सरकार गिरने का असर यूपी में भी

विपक्ष का दावा- बिहार में सरकार गिरने का असर यूपी में भी

हालांकि सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव राय ने कहा, "बिहार में हाल के घटनाक्रम से पता चला है कि भाजपा को उसके अपने राजनीतिक खेल और पैंतरेबाज़ी में हराया जा सकता है। इसका निश्चित रूप से पड़ोसी राज्य यूपी में मतदाताओं के सामूहिक मानस पर प्रभाव पड़ेगा।" हालांकि, सपा के सूत्रों ने स्वीकार किया कि बिहार में जद (यू) और राजद के एक साथ आने के बजाए यूपी में विपक्ष बिखरा हुआ दिख रहा है। यूपी में अलग अलग रहने के साथ ही बसपा प्रमुख मायावती ने यूपी में तो अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया था अब वो गुजरात और राजस्थान में विधानसभा चुनाव में भी अकेले ही चुनाव लड़ेंगी।

मत्रियों को योगी ने सौंपा है मंडलों का प्रभार

मत्रियों को योगी ने सौंपा है मंडलों का प्रभार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में अपने सभी कैबिनेट मंत्रियों को सभी 18 मंडलों का प्रभार सौंपा था। इसके बाद मंत्रियों ने अपने अपने मंडलों का दौरा कर वहां से फीडबैक लेकर मुख्यमंत्री को सौंपा था। मंत्रियों के इस समूह के टास्क में हालांकि योगी तीन बार बदलाव कर चुके हैं। ऐसा माना जा रहा है कि आम चुनाव से पहले अब योगी खुद उन योजनाओं की हकीकत परखेंगे जो चुनाव के लिहाज से काफी मायने रखती हों।

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