Who is Satua Baba: माघ मेले में Porsche से चलने वाले सतुआ बाबा कौन? साधु की लग्जरी लाइफ देख लोग दंग
Who is Satua Baba: प्रयागराज के माघ मेले में इन दिनों एक 'हाई-टेक' संत की खूब चर्चा हो रही है। भगवा चोला, आंखों पर रे-बैन का चश्मा और करोड़ों की लग्जरी कारों के काफिले के साथ जब ये संत मेले की रेती पर निकलते हैं, तो हर कोई देखने लगता है। हम बात कर रहे हैं सतुआ बाबा की, जिनका अंदाज किसी फिल्म स्टार या बड़े नेता से कम नहीं है।
वाराणसी के सतुआ बाबा पीठ के पीठाधीश्वर संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा अपने आध्यात्मिक ज्ञान से ज्यादा अपनी लग्जरी लाइफस्टाइलऔर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ अपनी नजदीकियों को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं। मेले में उनके पंडाल के बाहर खड़ी 3 करोड़ की लैंड रोवर और 4.4 करोड़ की पोर्श कारें इस समय चर्चा का विषय बनी हुई हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि ये बाबा कौन हैं और इनकी लाइफस्टाइल चर्चा में क्यों है?

कौन हैं संतोष तिवारी, क्या है उनका इतिहास?
सतुआ बाबा का असली नाम संतोष तिवारी है और वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के ललितपुर के रहने वाले हैं। आध्यात्म की खोज में उन्होंने महज 11 साल की उम्र में अपना घर और परिवार छोड़ दिया था। वह वाराणसी के प्रसिद्ध 'विष्णु स्वामी संप्रदाय' से ताल्लुक रखते हैं। साल 2012 में पिछले पीठाधीश्वर के ब्रह्मलीन होने के बाद, संतोष दास को इस पीठ का 57वां आचार्य नियुक्त किया गया। हाल ही में महाकुंभ 2025 के दौरान उन्हें 'जगद्गुरु' की उपाधि से भी नवाजा गया है।
संतोष तिवारी कैसे बने 'सतुआ बाबा'?
उनका यह नाम इस पीठ की पुरानी परंपरा से पड़ा है। जहां वर्षों से गरीबों और असहायों को 'सत्तू' (भुने हुए अनाज का आटा) खिलाने और दान करने का सेवा कार्य किया जाता है, जिसके कारण स्थानीय लोगों ने इस गद्दी के प्रमुख को 'सतुआ बाबा' कहना शुरू कर दिया, और यहीं से उनका नाम सतुआ बाबा पड़ गया।
करोड़ों की कारें और लग्जरी स्टाइल
सतुआ बाबा की चर्चा की सबसे बड़ी वजह उनकी लग्जरी कारें हैं। उन्हें अक्सर 3 करोड़ रुपये की Land Rover Defender और करीब 4.4 करोड़ रुपये की Porsche Turbo 911 चलाते हुए देखा जाता है। इतना ही नहीं, बाबा को सोशल मीडिया पर विमानों और हेलीकॉप्टरों के साथ फोटो खिंचवाने और ब्रांडेड Ray-Ban चश्मे पहनने का भी शौक है।
विवादों से गहरा नाता: जब DM ने सेकीं रोटियां
सतुआ बाबा का नाम हाल ही में एक बड़े प्रशासनिक विवाद में भी उछला था। दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रयागराज के डीएम मनीष वर्मा उनके आश्रम पहुंचे थे, जहां उन्होंने चूल्हे पर रोटियां सेकीं। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद यूपी की राजनीति गरमा गई। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने इस पर सख्त टिप्पणी करते हुए डीएम को सलाह दी थी कि वे 'रोटी सेंकने' के बजाय फील्ड वर्क पर ध्यान दें। इस घटना ने प्रशासन और सत्ता के गलियारों में सतुआ बाबा के रसूख को लेकर नई बहस छेड़ दी थी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से करीबी रिश्ता
सतुआ बाबा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बेहद करीबी माना जाता है। सीएम योगी ने सार्वजनिक मंचों से उनकी तारीफ करते हुए कहा है कि सतुआ बाबा समाज को एकजुट करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। कई धार्मिक आयोजनों में उन्हें मुख्यमंत्री के साथ अग्रिम पंक्ति में देखा जाता है। सतुआ बाबा भी खुलकर सीएम योगी और पीएम मोदी के विजन का समर्थन करते हैं और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार को अपना मुख्य लक्ष्य बताते हैं।करने के लिए करते हैं।












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