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गाजियाबाद से 5-5 MLA के बावजूद BJP ने गैर विधायक नरेंद्र कश्यप को क्यों बनाया मंत्री?

गाजियाबाद से 5-5 विधायकों के बावजूद भाजपा ने क्यों बनाया नरेंद्र कश्यप को मंत्री?

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर दूसरी बार शपथ लेकर योगी आदित्यनाथ ने इतिहास रच दिया है। सीएम योगी के अलावा उनकी कैबिनेट के 52 मंत्रियों ने भी शुक्रवार को पद और गोपनीयत की शपथ ली। इस बार की कैबिनेट में जहां कई पुराने मंत्रियों को जगह नहीं मिली है, वहीं कुछ नए चेहरे मंत्रिमंडल में शामिल किए गए हैं। इनमें सबसे बड़ा चौंकाने वाला नाम नरेंद्र कश्यप का है, जिन्हें योगी कैबिनेट में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के तौर पर शपथ दिलाई गई है। नरेंद्र कश्यप यूपी के गाजियाबाद में रहते हैं और फिलहाल विधानसभा या विधान परिषद, किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। आइए जानते हैं कि कौन हैं नरेंद्र कश्यप और किन वजहों से बनाया गया है उन्हें यूपी सरकार में मंत्री?

BSP से शुरू की राजनीतिक पारी

BSP से शुरू की राजनीतिक पारी

बेहद सामान्य परिवार से आने वाले और पेशे से वकील नरेंद्र कश्यप ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी से की थी। बीएसपी में रहकर जमीनी स्तर पर काम करने वाले नरेंद्र कश्यप किसी समय साइकिल पर ही पार्टी का प्रचार-प्रसार किया करते थे। उनके बारे में बीएसपी से जुड़े कुछ पुराने लोग बताते हैं कि नरेंद्र कश्यप ने जब एमएलसी का पहला चुनाव लड़ा तो उसकी जमानत राशि भी मायावती ने उन्हें पार्टी फंड की तरफ से मुहैया कराई। कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत पकड़ और उनकी संगठन क्षमता को देखते हुए मायावती ने उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव भी नियुक्त किया।

बीएसपी से क्यों निकाले गए नरेंद्र कश्यप

बीएसपी से क्यों निकाले गए नरेंद्र कश्यप

बीएसपी में रहते हुए नरेंद्र कश्यप का कद लगातार बढ़ रहा था और उनकी गिनती पार्टी अध्यक्ष मायावती के खास लोगों में होती थी। दो बार विधान परिषद सदस्य बनने से लेकर राज्यसभा सांसद तक का सफर नरेंद्र कश्यप ने बीएसपी में तय किया। इस बीच 2016 में नरेंद्र कश्यप को पुलिस ने उनकी बहू की हत्या के मामले में गिरफ्तार कर लिया। उनके ऊपर आरोप लगा कि उन्होंने दहेज के लिए अपने बेटे के साथ मिलकर अपनी बहू की हत्या की है। नरेंद्र कश्यप की गिरफ्तारी के बाद मायावती ने अपनी पार्टी की छवि को ध्यान में रखते हुए उन्हें बीएसपी से बाहर कर दिया।

भाजपा से जुड़ते ही नरेंद्र कश्यप को मिली बड़ी जिम्मेदारी

भाजपा से जुड़ते ही नरेंद्र कश्यप को मिली बड़ी जिम्मेदारी

तीन महीने जेल में रहने के बाद नरेंद्र कश्यप को जमानत मिली और उन्होंने दोबारा बीएसपी में शामिल होने की कोशिश की, लेकिन पार्टी ने उन्हें वापस नहीं लिया। इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नरेंद्र कश्यप भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और भाजपा ने उन्हें बीएसपी से अलग हुए ओबीसी वोटरों को पार्टी में जोड़ने की अहम जिम्मेदारी सौपी। विधानसभा चुनाव में भाजपा को प्रचंड जीत मिली और नरेंद्र कश्यप के ऊपर भाजपा का भरोसा और मजबूत हुआ। जमीनी स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए भाजपा ने 2021 में उन्हें उत्तर प्रदेश ओबीसी मोर्चे का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया।

आखिर क्या है नरेंद्र कश्यप को मंत्री बनाने की वजह

आखिर क्या है नरेंद्र कश्यप को मंत्री बनाने की वजह

गाजियाबाद भाजपा के ही एक नेता ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि नरेंद्र कश्यप की पकड़ ओबीसी वर्ग की उन जातियों के बीच बेहद मजबूत है, जो कभी बहुजन समाज पार्टी के साथ जुड़ी हुईं थी। इसके अलावा नरेंद्र कश्यप की छवि एक ऐसे नेता की भी है, जो कार्यकर्ताओं के लिए हर वक्त मौजूद रहते हैं। यूपी में जीत हासिल करने के बाद भाजपा अब 2024 की तैयारियों में जुटी है और ऐसे में नरेंद्र कश्यप को मंत्री बनाकर पार्टी ने एक बड़ा दांव चला है। भाजपा की कोशिश है कि ओबीसी वोटरों को साधने की, जिस रणनीति के चलते पार्टी ने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत हासिल की, उसी रणनीति को एक बार फिर से धार दी जाए।

ये भी पढ़ें- सीएम योगी की कैबिनेट का पहला बड़ा फैसला, 3 महीने के लिए बढ़ाई गई फ्री राशन योजना
गाजियाबाद में कौन-कौन हैं भाजपा के विधायक

गाजियाबाद में कौन-कौन हैं भाजपा के विधायक

2022 के विधानसभा चुनाव में गाजियाबाद जिले की पांचों सीटों पर भाजपा को जीत मिली है। इनमें गाजियाबाद शहर सीट से अतुल गर्ग, साहिबाबाद से सुनील शर्मा, मुरादनगर सीट से अजीत पाल त्यागी, मोदी नगर से मंजू शिवाच और लोनी विधानसभा सीट से नंदकिशोर गुर्जर को विधायक के तौर पर चुना गया है। अतुल गर्ग योगी आदित्यनाथ की पिछली सरकार में मंत्री रह चुके हैं और सुनील शर्मा ने तो अपनी सीट पर 2,14,286 वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की है। इसके बावजूद भाजपा ने इनमें से किसी भी विधायक को मंत्री ना बनाते हुए नरेंद्र कश्यप को चुना, जो इस समय किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं।

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