कौन हैं लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी? जिन्हें किन्नर अखाड़े से किया निष्कासित, ममता कुलकर्णी बनीं वजह
Laxmi Narayan Tripathi Kaun Hai: प्रयागराज महाकुंभ 2025 (Prayagraj MahaKumbh 2025) में इस बार किन्नर अखाड़ा काफी सुर्खियों में छाया हुआ है। सुर्खियों में छाने की मुख्य वजह हैं बॉलीवुड अभिनेत्री ममता कुलकर्णी। दरअसल, ममता कुलकर्णी (Mamta Kulkarni) किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई है।
ममता कुलकर्णी (Mamta Kulkarni) का पट्टाभिषेक करने वाली लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी किन्नर अखाड़े की पहली महामंडलेश्वर है, जिसके बाद से उनका नाम भी चर्चाओं में आ गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाए जाने के बाद किन्नर अखाड़े में घमासान शुरू हो गया है।

ऐसा बताया जा रहा है कि संतों की आपत्ति के बाद अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास ने किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को पदमुक्त कर दिया है। आइए जानते है कौन हैं लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी (Laxmi Narayan Tripathi Kaun Hai)..?
लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी कौन हैं?
13 दिसंबर 1980 को महाराष्ट्र के ठाणे में जन्मी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने स्नातक और स्नातकोत्तर दोनों ही पढ़ाई के लिए मुंबई के मीठीबाई कॉलेज से भरतनाट्यम की शिक्षा ली। 2002 में उन्होंने ट्रांसजेंडर अधिकारों की वकालत करने वाले एक गैर-लाभकारी संगठन की स्थापना की।
लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की कोशिशों के चलते सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर को 'तीसरे लिंग' के रूप में मान्यता दी। वर्ष 2015 में उन्हें किन्नर अखाड़े की पहली महामंडलेश्वर बनाया गया। उनकी पहल शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्रों में फैली हुई है। अपनी सक्रियता के अलावा, लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने 'मी हिजड़ा, मी लक्ष्मी' नामक एक किताब लिखी है।
उन्होंने बिग बॉस, सच का सामना और 10 का दम जैसे लोकप्रिय टीवी शो में भी भाग लिया, जिससे उनके उद्देश्यों और अखाड़े को और अधिक पहचान मिली। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उन्हें कबड्डी, खो-खो और टीम इंडिया का क्रिकेट मैच देखना पसंद है। बता दें कि आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी 2015-16 उज्जैन कुंभ में महामंडलेश्वर बनी थी।
क्या है ऋषि अजय दास का आदेश?
किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास ने ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर और लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को आचार्य महामंडलेश्वर पद से हटा दिया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला सनातन धर्म और समाज के हित में लिया गया है। उनके मुताबिक, ममता कुलकर्णी का बिना मुंडन उनका पट्टाभिषेक किया गया।
ऋषि अजय दास द्वारा जारी आदेश में ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर नियुक्त करने के फैसले की आलोचना करते हुए इसे आध्यात्मिक त्याग के बजाय ग्लैमर से जोड़ा। उन्होंने इस कदम को असंवैधानिक और सनातन धर्म के सिद्धांतों के खिलाफ बताया। कहा कि देश हित को छोड़कर ममता कुलकर्णी जैसे देशद्रोह के मामले में लिप्त महिला फिल्मी ग्लैमर से जुड़ी हुई है।
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