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Mamta Kulkarni: ममता कुलकर्णी महामंडलेश्वर पद से निष्कासित, लक्ष्मी नारायण भी किन्नर अखाड़े से बाहर, क्यों?

Mamta Kulkarni:महाकुंभ 2025 में बॉलीवुड अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने संन्यास लेकर सबको चौंका दिया था, 24 जनवरी को नंबे के दशक की हॉट अभिनेत्रियों में से एक ममता ने महाकुंभ में पिंडदान करके संन्यास लेने का ऐलान किया था और वो किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर बन गई थीं, उनका नाम यामाई ममता नंद गिरी हो गया था।

जिस दिन से ये खबर सामने आई उस दिन से ही ममता और किन्नर अखाड़ा लोगों के निशाने पर है। कुछ धर्मगुरुओं ने भी ममता के इस तरह से महामंडलेश्वर बनने पर सवाल खड़े किए हैं।

Mamta Kulkarni

तो वहीं इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा जारी है तो वहीं इसी बीच आज किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास ने एक बड़ा कदम उठाया है।

ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर पद से हटा दिया गया (Mamta Kulkarni)

उन्होंने ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर पद से हटाकर अखाड़े से बाहर कर दिया है, उनका एक्शन केवल ममता कुलकर्णी के ही ऊपर नहीं हुआ बल्कि उनका चाबुक लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी पर भी चली है और उन्होंने उसे भी अखाड़े से बाहर का रास्ता दिखा दिया। अखाड़े ने इस बारे में एक बयान भी जारी किया है।

किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास ने उठाया बड़ा कदम (Mamta Kulkarni)

जिसमें लिखा है कि 'किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास ने ममता कुलकर्णी को अखाड़े से निष्कासित कर दिया है। उन्होंने महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी को भी किन्नर अखाड़े से निष्कासित कर दिया है, क्योंकि उन्होंने देशद्रोह की आरोपी ममता कुलकर्णी को अखाड़े में शामिल किया था और उनकी जानकारी के बिना उन्हें महामंडलेश्वर बना दिया था, अखाड़े ने कहा कि अखाड़े का पुनर्गठन किया जाएगा और नए गुरु की खोज की जाएगी।

ममता ने क्यों लिया संन्यास?(Mamta Kulkarni)

संन्यास लेने के बाद ममता कुलकर्णी ने कहा था कि वो अपने गुरु के कहने पर ऐसा कर रही हैं। ये उनके 12साल की तपस्या का फल है। वो मोह-माया से ऊपर उठ चुकी हैं। साल 1966 में वो गुरु गगन गिरि महाराज से मिली थीं, जिसके बाद उनका आध्यात्म की ओर आकर्षण बढ़ा और उनकी तपस्या प्रारंभ हुई, उन्होंने साल 2000 में ही बॉलीवुड और चकाचौध वाली जिंदगी छोड़ चुकी हैं।

क्यों बनीं किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर?(Mamta Kulkarni)

ममता खुद एक स्त्री हैं लेकिन उन्होंने महामंडलेश्वर बनने के लिए किन्नर अखाड़ा चुना क्योंकि यह अकेला ऐसा अखाड़ा है जो जिसमें संन्यास के साथ भौतिक जीवन जिया जा सकता है और इस अखाड़े से कोई भी जुड़ सकता है।

12 सालों से ब्रह्मचर्य का पालन कर रही हैं ममता!(Mamta Kulkarni)

ममता कुलकर्णी ने कहा था कि 'वो संन्यास ले रही हैं लेकिन वो एक नार्मल लाइफ जी सकेंगी इसलिए उन्होंने इसका चयन किया। वो 12 सालों से ब्रह्मचर्य का पालन कर रही हैं।' उन्होंने लग्जरी लाइफ कबकी छोड़ दी हैं और भौतिक जीवन से बाहर निकल आई हैं, अब उन्हें इससे कोई प्रभाव नहीं पड़ता है और मेरे भारत छोड़ने का कारण भी अध्यात्म ही था लेकिन मुझे खुशी है कि अब मैं यहां फिर से आई हूं और मैंने संन्यास अपने देश में लिया है।'

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