World News: 'मैं तो बौना हूं'...15 साल का बच्चा झूठ बोलकर लड़ा सांसद का चुनाव, खुली पोल, फिर क्या हुआ?
World News: जिस उम्र तक भारत में लगभग हर एक बच्चा नाई की दुकान पर लगी कुर्सी के ऊपर लकड़ी पट्टा रखकर बाल कटवाता है, उस उम्र में ही एक बच्चा नाइजीरिया में सांसद बन गया। दरअसल नाइजीरिया में 2027 के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स चुनाव से जुड़ा एक मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। यहां 15 साल के एक लड़के, सादिसू बूबा महमूद (Sadisu Buba Mahmood), ने खुद को 30 साल का बता कर पर्चा भर दिया। उसके बाद जो हुआ वो मजेदार घटना से कम नहीं है।
मेरी उम्र कम नहीं, मैं बौना हूं- सादिसू
वहीं जब इस मामले के बाहर आने के बाद उससे पूछा गया कि उसने ऐसा क्यों किया, तो बजाय माफी मांगने के सादिसू ये कहने लगा कि उसकी उम्र कम नहीं है, वह बस बौना है इसलिए वह छोटा लगता है। वह खुद को अपनी उम्र से दोगुना यानी 30 साल का बताने लगा। यही नहीं, उसने यह भी दावा कर दिया कि वह ड्राइवर भी रह चुका है।

कैसे खुली पोल?
सादिसू के दावों की जब वहां के मीडिया ने पड़ताल की तो उसके कुछ कागजात हाथ लग गए। इन्हीं कागजातों में से एक नेशनल आइडेंटिफिकेशन नंबर का पता चला। इससे जब छानबीन की गई तो उसका जन्म 27 अगस्त 2010 का मालूम चला। जिसके बाद पोल खुल गई। इसके अलावा उसका एक पुराना वीडियो जिसमें वह किसी मॉल में बच्चों के लिए बने आर्टिफिशियल घोड़े की सवारी करता दिखा।
क्यों किया उसने ऐसा?
पीपल्स गजट (People’s Gazette) की रिपोर्ट के मुताबिक, नाइजीरिया के उत्तरी इलाकों में लंबे समय से ऐसी संस्कृति विकसित हो चुकी है, जहां चुनावों में धांधली और वोटों की संख्या बढ़ाने के लिए नाबालिग बच्चों का इस्तेमाल किया जाता है। इसी माहौल के बीच सादिसू बूबा महमूद ने 2027 के राष्ट्रीय चुनाव में कडुआना (Kaduna) के सबोन गारी फेडरल कॉन्स्टिट्यूएंसी से चुनाव लड़ने के लिए अपनी उम्र गलत तरीके से पेश की। बताया गया कि उसने खुद को 30 साल का उम्मीदवार बताने की कोशिश की।
सिर्फ एक लड़के की कहानी नहीं
वहां के एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक किशोर की गलती नहीं है। यह उस राजनीतिक संस्कृति को उजागर करता है, जो दशकों से उत्तरी नाइजीरिया में पनप रही है। यहां बच्चों को कम उम्र से ही चुनावी धोखाधड़ी, राजनीतिक हिंसा, नकली पहचान और राजनीतिक गुंडागर्दी जैसी गतिविधियों में शामिल किया जाता है। कई स्थानीय नेता और प्रभावशाली लोग अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए बच्चों का इस्तेमाल करते हैं।
क्या 15 साल का बच्चा कर सकता है धोखाधड़ी?
जब यह मामला सामने आया, तो लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि आखिर एक 15 साल का लड़का इतनी बड़ी और जटिल चुनावी धोखाधड़ी अकेले कैसे कर सकता है। कई लोगों का मानना है कि यह उसके राजनीतिक अपराध का पहला मामला नहीं हो सकता। संभावना जताई जा रही है कि वह पहले भी नाबालिग वोटर के रूप में चुनावी गतिविधियों में शामिल रहा होगा। एक्सपर्टस का कहना है कि इतनी बड़ी पहचान जालसाजी किसी किशोर के लिए अकेले करना लगभग असंभव है।
चुनावी रैलियों में बच्चों की बढ़ती भागीदारी
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई राज्यों में जिन बच्चों को स्कूलों में होना चाहिए, उन्हें राजनीतिक रैलियों और अभियानों में ले जाया जाता है। कुछ बच्चों को राजनीतिक कार्यकर्ता और “फुट सोल्जर” की तरह इस्तेमाल किया जाता है। कम उम्र में ही उन्हें ऐसी सोच दी जाती है, जहां सत्ता और ताकत को सबसे ऊपर माना जाता है।
“अगर वोट डाल सकते हैं, तो चुनाव क्यों नहीं लड़ सकते?”
विश्लेषकों का कहना है कि जब बच्चों को अवैध तरीके से वोट डालने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, तो धीरे-धीरे उनके अंदर यह सोच बन जाती है कि वे खुद भी राजनीतिक पद हासिल कर सकते हैं। यही वजह है कि कई लोग सादिसू महमूद के मामले को भविष्य के बड़े सामाजिक संकट का संकेत मान रहे हैं।
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