'मोदी जी छूते हैं पैर', कौन हैं दिनेश फलाहारी महाराज? जिन्होंने CM योगी को खून से लिखी चिट्ठी, क्या है मांग?
Who is Dinesh Falahari Maharaj: प्रयागराज के माघ मेले में संतों और प्रशासन के बीच छिड़ा घमासान अब लखनऊ की दहलीज तक जा पहुंचा है। आस्था और सम्मान की इस लड़ाई में मथुरा के फायरब्रांड हिंदूवादी नेता दिनेश फलाहारी महाराज ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने पूरे प्रदेश की सियासत और धार्मिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
शंकराचार्य के अपमान से आहत फलाहारी महाराज ने अपनी भावनाओं को स्याही से नहीं, बल्कि अपने खून से पत्र लिखकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में प्रशासन की निरंकुशता को चुनौती देते हुए सनातनी अस्मिता के सवाल पर सरकार को आईना दिखाया है।

दिनेश फलाहारी महाराज ने किए तीखे सवाल
मुख्यमंत्री को भेजे इस रक्त-पत्र में दिनेश फलाहारी महाराज ने योगी आदित्यनाथ के 'महंत' स्वरूप को याद दिलाते हुए तीखे सवाल किए हैं। उन्होंने लिखा कि शंकराचार्य हिंदुओं के लिए साक्षात भगवान का रूप हैं। प्रधानमंत्री मोदी जी भी शंकराचार्य जी के चरणों में शीश नवाते हैं। वहां अधिकारियों द्वारा धर्मगुरुओं का निरादर किया जाना बेहद शर्मनाक है।
महाराज ने पत्र में आगाह किया कि संतों और सरकार के बीच चल रहे इस 'जुबानी युद्ध' का सीधा फायदा विपक्षी दल राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए उठा रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि माघ मेले के वायरल वीडियो में अधिकारियों की जो बदसलूकी दिख रही है, उसके लिए दोषी अधिकारी तुरंत माफी मांगें ताकि सोशल मीडिया और सड़कों पर उबल रहे सनातनी समाज के गुस्से को शांत किया जा सके।

इस विवाद की गूंज केवल मथुरा तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्रज के तमाम बड़े संतों ने भी प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महामंडलेश्वर रामदास महाराज और स्वामी अतुल कृष्ण दास जैसे दिग्गजों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं।
संतों का कहना है कि शंकराचार्य की पीठ भगवान शिव की गद्दी के समान पवित्र होती है और इसका अपमान पूरे हिंदू समाज का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी जानबूझकर सरकार की छवि खराब करने की साजिश रच रहे हैं। संतों ने चेतावनी दी है कि जिन अधिकारियों ने संतों के साथ हिंसक व्यवहार किया और उन्हें गंगा स्नान से रोका, उन पर कड़ी कार्रवाई हो, क्योंकि शंकराचार्य को रोकना 'गऊ हत्या' के समान महापाप है।
कौन हैं दिनेश फलाहारी महाराज?
दिनेश फलाहारी महाराज उत्तर प्रदेश के एक प्रखर हिंदूवादी नेता और श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष हैं। उनकी सबसे बड़ी पहचान श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद में मुख्य याचिकाकर्ता के तौर पर है। वे अपने 'भीष्म संकल्प' के लिए जाने जाते हैं-उन्होंने प्रतिज्ञा ली है कि जब तक कान्हा की जन्मभूमि से मस्जिद का ढांचा पूरी तरह नहीं हट जाता, तब तक वे नंगे पैर रहेंगे और अन्न का त्याग कर केवल फलों का ही सेवन करेंगे। इसी 'फलाहार' के कठिन व्रत के कारण उन्हें 'फलाहारी महाराज' कहा जाता है। खास बात यह है कि इनका राजस्थान के उस विवादित बाबा से कोई लेना-देना नहीं है जो जेल में बंद है; ये मथुरा के एक समर्पित सनातनी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।












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