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Premanand Maharaj: प्रेमानंद महाराज के पास पहुंचा शराब पीकर राधा-राधा जपने वाला, बोले-ऐसा भक्‍त पहली बार मिला

Premanand Maharaj Ji: जाने-माने हिंदू संत प्रेमानंद महाराज (Premanand Govind Sharan) के दर्शन करने, अपने समस्‍याओं का समाधान पाने और संत वाणी सुनने बड़ी संख्‍या में भक्‍त आए दिन वृंदावन आते हैं, जहां श्री हित राधा केली कुंज ट्रस्ट वृंदावन में उनकी महाराज जी से मुलाकात होती है। इसी दौरान कई अजब-गजब भक्‍त से प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंच जाते हैं। एक शराबी का प्रेमानंद महाराज के सामने पहुंचने और वार्तालाप का वीडियो सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रहा है।

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि राधा रानी का एक भक्‍त अपने शराबी भाई को लेकर प्रेमानंद महाराज के पास पहुंचा और बोला कि 'महाराज जी उसका भाई शराब पीकर राधे-राधे जपता रहता है। आप इसे समझाइए। शायद आपके समझाने से इसकी शराब छूट जाए।' यह सुनकर प्रेमानंद महाराज जी पहले तो जोर-जोर से हंसने लगे। फिर बोले कि 'पहले भक्‍त मिले यार ऐसे।'

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Premanand Maharaj Ji

शराबी भक्‍त को समझाते हुए प्रेमानंद महाराज ने कहा कि 'आप हमारी बात मानते हो। हमारा जीवन धन राधा नाम है। हम तो कहते हैं कि राधा नाम के बल से शराब छूट जाएगी और तुम शराब पीकर राधा-राधा जपते हो। आप तो हमारी बात की बेइज्‍जती करवा रहे हो। शराब छोड़ दो यार। ज्‍यादा परेशानी है तो दवा ले लो। औषद्यि ले लो। डॉक्‍टरों से सम्‍पर्क कर लो।'

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शराब पर प्रेमानंद महाराज के प्रवचन

बता दें कि वृंदावन के प्रेमानंद महाराज शराब पर अपने विचारों के लिए प्रसिद्ध हैं। श्री राधा रानी के समर्पित अनुयायी के रूप में, उन्होंने अपनी शिक्षाओं के लिए लोकप्रियता हासिल की है। उनके उपदेश लोगों को भक्ति की ओर ले जाते हैं और नकारात्मक व्यवहार से दूर रखते हैं। भारत और विदेश से कई लोग उनकी अंतर्दृष्टि सुनने के लिए उनसे मिलने आते हैं।

प्रेमानंद महाराज का मानना ​​है कि शराब पीना एक गंभीर पाप है, जो व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से प्रभावित करता है। प्रेमानंद महाराज चेतावनी देते हैं कि शराब पीने से व्यक्ति अपने वास्तविक लक्ष्य से भटक सकता है। वे ऐसे भटकावों को रोकने के लिए शराब न पीने की सलाह देते हैं।

शराब पीने से हिंसक व्यवहार और बड़ों के प्रति अनादर की भावना पैदा होती-प्रेमानंद महाराज

प्रेमानंद महाराज के अनुसार, शराब पीने से हिंसक व्यवहार और बड़ों के प्रति अनादर की भावना पैदा होती है। वे उन पदार्थों से बचने का सुझाव देते हैं जो नुकसान पहुंचाते हैं। ईश्वर के प्रति समर्पित लोगों को शराब से दूर रहना चाहिए और ईश्वर की शरण लेनी चाहिए। प्रेमानंद महाराज शराब छोड़ने की चुनौती को स्वीकार करते हैं, लेकिन जोर देते हैं कि यह संभव है। वह इस बात पर जोर देते हैं कि कोई भी आपको शराब पीने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। उनकी शिक्षाएँ विचारों और कार्यों पर शराब के नकारात्मक प्रभाव को उजागर करती हैं।

शराब, जुआ, मांसाहार और विवाहेतर संबंधों से दूर रहें-प्रेमानंद महाराज

प्रेमानंद महाराज शराब के अलावा जुआ, मांसाहार और विवाहेतर संबंधों को भी बड़े पाप मानते हैं। वे धर्म के मार्ग पर चलने के लिए इन कामों से दूर रहने की सलाह देते हैं। उनका संदेश आध्यात्मिक मार्गदर्शन चाहने वाले कई लोगों को प्रभावित करता है। उनकी सलाह का पालन करके, व्यक्ति अपने सच्चे उद्देश्य और मूल्यों के अनुरूप जीवन जी सकता है। प्रेमानंद महाराज की शिक्षाएँ शराब पीने जैसी हानिकारक आदतों से बचकर आध्यात्मिक विकास का मार्ग सुझाती हैं। उनकी अंतर्दृष्टि लोगों को भक्ति और ईमानदारी का जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित करती है।

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