Bengaluru Weather: बेंगलुरु में तेज हवाओं के साथ होगी झमाझम बारिश, कर्नाटक के इन जिलों में ऑरेंज और रेड अलर्ट
Bengaluru Weather Update:अगर आप बेंगलुरु में रहते हैं तो अगले कुछ दिनों तक छाता और रेनकोट साथ रखना न भूलें। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने तेज बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार, अगले तीन दिनों तक बेंगलुरू सहित कर्नाटक के कई हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है।
इसे देखते हुए राज्य के विभिन्न जिलों के लिए ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किए गए हैं। बेंगलुरू में 10 जून से 13 जून के बीच मूसलाधार बारिश की संभावना जताई गई है। राहत की बात यह है कि बारिश के साथ तापमान में भी गिरावट देखने को मिल सकती है।

बेंगलुरू में तेज बारिश के साथ तापमान में आएगी गिरावट
मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि आसमान में बादल छाए रहेंगे और बारिश होने की पूरी संभावना है। जहां एक ओर बारिश की चेतावनी है, वहीं तापमान में होने वाली वृद्धि भी निवासियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारी बारिश होती है, तो तापमान में गिरावट आ सकती है और यह 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।
ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी, लोगों को सतर्क रहने की सलाह
लगातार बारिश की आशंका को देखते हुए बेंगलुरु में ऑरेंज अलर्ट और कर्नाटक के कई जिलों में रेड अलर्ट के चलते प्रशासन ने लोगों को जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलने और मौसम संबंधी अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है।
कर्नाटक के जिलों में रेड अलर्ट
कर्नाटक के कई जिलों में रेड अलर्ट जारी किए गए हैं। रायचूर, धारवाड़, उत्तर कन्नड़, हावेरी, शिवमोग्गा, चिकमगलूर और कोडागु सहित बेंगलुरू के नजदीकी इलाकों में 10 जून के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया था। इन क्षेत्रों में 24 घंटे भारी बारिश की भविष्यवाणी की गई है।
मानसून ने पकड़ी रफ्तार
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून अब दक्षिण भारत में पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। यही वजह है कि कर्नाटक के तटीय और आंतरिक इलाकों में व्यापक बारिश हो रही है। बंगाल की खाड़ी में बने मौसमी सिस्टम के कारण आने वाले दिनों में महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी बारिश का दायरा बढ़ सकता है।
किसानों के लिए अच्छी खबर
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के मजबूत होने से कृषि गतिविधियों को फायदा मिलेगा। जून से सितंबर तक चलने वाला मानसून देश की कुल वार्षिक वर्षा का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा देता है, जो खेती, जलापूर्ति और बिजली उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।












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