UP News: यूपी सरकार का बड़ा फैसला! 100 कुंतल से ज्यादा गेहूं बेचने वालों को अब नहीं कराना होगा सत्यापन

UP News: उत्तर प्रदेश के लाखों किसानों को अब अपने गेहूं की बिक्री में बड़ी सहूलियत मिलने जा रही है। राज्य सरकार ने किसानों को राहत देते हुए 100 कुंतल से ज्यादा गेहूं पर भी सत्यापन की अनिवार्यता खत्म कर दी है। ये फैसला फौरन प्रभाव से लागू हो गया है।

खाद्य एवं रसद विभाग ने शनिवार को इस संबंध में आदेश जारी किया, जिसके तहत अब 100 कुंतल से अधिक गेहूं बेचने के लिए किसी तरह का भौतिक सत्यापन नहीं करवाना पड़ेगा। यह सुविधा 15 मई 2025 तक या फिर अगले आदेश तक लागू रहेगी।

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आदेश के बाद अब किसान सीधे मंडी या सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं लेकर जा सकेंगे। सत्यापन में लगने वाले समय, दौड़-धूप और तकनीकी अड़चनों से उन्हें अब निजात मिलेगी। इससे खरीदी प्रक्रिया तेज होगी और मंडियों पर बोझ भी घटेगा।

सत्यापन की बाध्यता खत्म, सभी श्रेणियों पर लागू

खाद्य विभाग के आयुक्त रणवीर प्रसाद ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि सत्यापन से मिली छूट सभी श्रेणियों के किसानों पर लागू होगी। चाहे छोटे किसान हों या बड़े, सभी को समान रूप से इसका लाभ मिलेगा।

आयुक्त ने बताया कि पहले 100 कुंतल तक गेहूं बेचने पर सत्यापन जरूरी नहीं था, लेकिन इससे ऊपर की मात्रा बेचने के लिए सत्यापन की अनिवार्यता थी। सत्यापन प्रक्रिया में देरी से किसान समय पर गेहूं नहीं बेच पा रहे थे।

किसानों की सुविधा को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला

सरकार को लगातार किसानों की शिकायतें मिल रही थीं कि सत्यापन के चलते उन्हें गेहूं बेचने में परेशानी हो रही है। सत्यापन में तकनीकी अड़चन, स्टाफ की कमी और क्षेत्रीय समस्याएं आड़े आ रही थीं। इन सभी पहलुओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया।

विभाग ने यह भी साफ किया है कि सत्यापन से राहत मिलने के बावजूद, किसान द्वारा दिए गए पंजीकरण और उत्पादन संबंधित सभी आंकड़ों की जिम्मेदारी किसान की खुद की होगी। अगर कोई गलती पाई जाती है तो उसकी जवाबदेही किसान पर ही होगी।

300% तक गेहूं बेचने की पहले जैसी छूट बरकरार

खाद्य विभाग ने यह भी बताया कि किसानों को पहले की तरह अपने उत्पाद के अनुमानित आंकड़ों के 300 प्रतिशत तक गेहूं बेचने की अनुमति है। इस नीति से उन किसानों को राहत मिलेगी जिनके राजस्व रिकॉर्ड में त्रुटि है या उत्पादन औसत से अधिक हुआ है।

इस नीति का उद्देश्य यह भी है कि अगर किसी जिले की उत्पादकता अन्य जिलों से अलग हो या किसान के पास अतिरिक्त स्टॉक हो, तो वो भी बिना किसी परेशानी के गेहूं बेच सके। किसानों के हक की रक्षा के लिए यह बेहद जरूरी कदम है।

अवकाश में भी खुले रहेंगे गेहूं खरीद केंद्र

सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि किसानों को अवकाश के दिनों में भी अपनी उपज बेचने में कोई रुकावट न हो। इसलिए सभी सरकारी क्रय केंद्र सप्ताहांत और छुट्टियों में भी खुले रहेंगे। इससे गेहूं का स्टॉक ज्यादा दिन तक नहीं रुकेगा।

अगर किसी किसान को कोई दिक्कत होती है, तो वह टोल फ्री नंबर 18001800150 पर कॉल कर सकते हैं। इसके अलावा, किसान अपने जिले के खाद्य विपणन अधिकारी, तहसील या ब्लॉक स्तर के मार्केटिंग अधिकारियों से भी मदद ले सकते हैं।

खाद्य विभाग ने सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और संभागीय खाद्य नियंत्रकों को निर्देश जारी किए हैं कि इस आदेश को तुरंत प्रभाव से लागू कराएं। जिलों में इसे लेकर व्यापक स्तर पर प्रचार भी किया जाएगा, ताकि हर किसान को इसकी जानकारी मिले।

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