यूपी चुनाव: अयोध्या में बाबरी के पक्षकार और मंदिर के महंत ने एकसाथ क्यों की दुआ और पूजा ? जानिए
अयोध्या, 13 फरवरी: यूपी चुनाव में राजनीतिक दल भले ही अपनी-अपनी रणनीति के तहत धार्मिक मसले उभारने की कोशिश करने में जुटे हों, लेकिन भगवान राम की नगरी अयोध्या का सौहार्द उसी तरह आज भी कायम है, जो वर्षों चले मस्जिद-मंदिर के मुकदमे के दौरान भी नहीं बिगड़े थे। एक बार फिर से बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी और महंत परमहंस दास ने मिलकर आराधना की है। दोनों की इबादत के तरीके भले ही अलग रहे हों, लेकिन ईश्वर के सामने दोनों की चाहत एक ही है और वह है यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दोबारा जीतकर सीएम बनते देखना।

इकबाल अंसारी और महंत परमहंस दास एकसाथ की दुआ और पूजा
अयोध्या में भगवान राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद की वजह से देश ने दशकों तक अदालतों में कानूनी विवाद चलते देखा है। लेकिन, स्थानीय स्तर पर मंदिर और मस्जिद दोनों के पक्षकारों की आपसी मित्रता ने हमेशा ही मिसालें कायम की हैं। कानूनी लड़ाई अपनी जगह थी, लेकिन दोनों ओर के पक्षकारों ने कभी इसकी वजह से आपसी रिश्ते नहीं बिगड़ने दिए और वह सिलसिला अभी भी बरकार नजर आ रहा है, जब भारतीय जनता पार्टी भव्य राम मंदिर बनाने का वादा पूरा करने के नाम पर चुनाव मैदान में है और बाबरी मस्जिद की जगह दूसरी मस्जिद पहले वाले स्थान से कई किलोमीटर दूर बनाई जा रही है।

सीएम योगी को दोबारा सीएम बनाने के लिए दुआ और पूजा
अयोध्या में बाबरी मस्जिद के एक मुख्य पक्षकार इकबाल अंसारी और तपस्वी छावनी मठ के महंत परमहंस दास ने एकसाथ मिलकर दुआ मांगी है और पूजा की है। महंत ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें दिख रहा है कि अंसारी के हाथ इस्लाम की परंपरा के हिसाब से दुआओं में उठे हैं, तो परमहंस दास हाथ में रुद्राक्ष धारण किए मंत्रोच्चारण में लगे हैं। लेकिन, दोनों की एक ही मनोकामना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोबारा से सीएम बनकर यूपी की सत्ता में वापस लौटें। इकबाल अंसारी ने कहा है, "हमने अपने धर्म के हिसाब से दुआएं मांगी कि माननीय मुख्यमंत्री दोबारा मुख्यमंत्री बनें।" वहीं परमहंस दास ने कहा है, "चाहे किसी धर्म के हों, चाहे किसी मजहब के, सबलोग भारतीय जनता पार्टी को सपोर्ट कर रहे हैं। माननीय मुख्यमंत्री जी के लिए आज हमलोगों ने विशेष रूप से पूजन किया है।"

अयोध्या की पवित्र परंपरा आज भी कायम है
महंत ये भी बोले कि "हमने हिंदू और इस्लामी परंपरा के अनुसार एक साथ पूजा की और योगी आदित्यनाथ के लिए ईश्वर का आशीर्वाद मांगा। जब योगी प्रचंड जीत के साथ मुख्यमंत्री बनकर लौटेंगे, तो हमने रामजन्मभूमि का दौरा करने का एक पवित्र शपथ भी लिया है।" इन दोनों का मकसद चाहे किसी भी खास पार्टी या नेता के लिए इस तरह से इबादत करना भले ही हो, लेकिन इससे भगवान राम की नगरी की वह परंपरा कायम रही है, जिसकी आधारशिला इकबाल के पिता और बाबरी के सबसे पुराने पक्षकार दिवंगत हाशिम अंसारी और हिंदू पक्ष के महंत परमहंस रामचंद्र दास ने डाली थी। दोनों इसे मुकदमे के सिलसिले में एक ही साथ अदालत भी जाते थे।

कोरोना रोकने के लिए भी साथ में की थी दुआ और पूजा
इससे पहले मार्च, 2020 में जब देश में कोरोना वायरस ने दस्तक देना शुरू किया था और अज्ञात वायरस की वजह से भय का माहौल बनने लगा था, तब भी इकबाल अंसारी और महंत परमहंस दास ने एक ही साथ पुराण का पाठ और कुरान की आयतें पढ़कर प्रार्थना और दुआ की थी। अयोध्या में 27 फरवरी, को वोट डाले जाने हैं। 2017 में यहां बीजेपी के वेद प्रकाश गुप्ता जीते थे और सपा के तेज नारायण पांडे उर्फ पवन पांडे को हार मिली थी। शुरू में यहां से खुद सीएम योगी आदित्यनाथ के चुनाव लड़ने की भी अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन आखिरकार पार्टी ने उन्हें गोरखपुर (शहरी) विधानसभा सीट से टिकट दिया है। (पहली दोनों तस्वीर- यू-ट्यूब वीडियो से, दूसरी-फाइल)












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