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यूपी निकाय चुनाव: 100 साल के इतिहास में लखनऊ को पहली बार मिलेगी महिला मेयर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव इस बार उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लिए कुछ अलग होने जा रहा है। 100 साल के इतिहास में लखनऊ को पहली बार महिला मेयर मिलने जा रही है। 1916 में यूपी नगरपालिका अधिनियम एक्ट बनाया गया था। तब से लेकर 2017 तक लखनऊ को कोई महिला मेयर नहीं मिली है। इस दफा सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होने के चलते सिर्फ महिलाएं हीं चुनाव लड़ रही हैं। ऐसे में पार्टी कोई भी जीते, मेयर महिला ही बनने जा रही है।

1917 से 2017 तक लखनऊ को कोई महिला मेयर नहीं मिली। इस दफा सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होने के चलते सिर्फ महिलाएं हीं चुनाव लड़ रही हैं। ऐसे में पार्टी कोई भी जीते, मेयर महिला ही बनने जा रही है।

उत्तर प्रदेश म्यूनिसिपैलिटी कानून 1916 में अस्तित्व में आया। बैरिस्टर सैयद नबीउल्लाह पहले भारतीय थे, जो 1917 में स्थानीय निकाय के मुखिया बने थे। आजादी के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 1948 में स्थानीय निकाय का चुनावी स्वरूप को बदल कर प्रशासक पद के लिए चुनाव कराना शुरु किया था। इस पद पर पहली बार भैरव दत्त सनवाल नियुक्त हुए थे। संविधान संशोधन के जरिए 31 मई 1994 को लखनऊ के स्थानीय निकाय को नगर निगम का दर्जा दिया गया। 1959 के म्यूनिसिपैलिटी एक्ट में मेयर पद के लिए चुनाव कराने का प्रावधान किया गया।

लखनऊ में मेयर भले ही कोई महिला नहीं रही हो लेकिन यहां से लोकसभा के लिए तीन बार महिला जीतकर पहुंची हैं। लखनऊ से शीला कौल 1971, 1980 और 1984 में चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंची थीं। लखनऊ में 26 अक्टूबर को मतदान है।

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