राजभर की 'ट्रिपल लोडिंग' घोषणा में है दम या है महज चुनावी हंसी-ठिठोली?
लखनऊ, 10 फरवरी। उत्तर प्रदेश चुनाव में किस्म किस्म के वायदे किये जा रहे हैं। फ्री फंड वाली सुविधा देने की होड़ मची हुई है। सभी दलों की हालत एक जैसी है। इस बीच एक अजीबोगरीब चुनावी वायदा किया गया है। एक पार्टी के नेता जी ने कहा, अगर बाइक पर ट्रिपल लोडिंग सवारी करनी है तो मेरी पार्टी को वोट दीजिए।

उन्होंने अपनी घोषणा के समर्थन में दमदार तर्क भी दिये। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी का सपा से गठबंधन है। बुधवार को सुहेलदेव पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने यह घोषणा कर सबको चौंका दिया।

सरकार बनते ही बाइक पर ट्रिपल लोडिंग फ्री
ओमप्रकाश राजभर ने कहा, अगर किसी मोटरसाइकिल पर तीन लोग कही जाते हैं तो पुलिस उनका चालान काट देती है। पुलिस कहती है कि नियम के मुताबिक मोटरसाइकिल पर दो लोग ही बैठ कर जा सकते हैं। लेकिन आप देखिए, ट्रेन की एक बोगी में 70 लोगों के बैठने की जगह होती है। लेकिन उसमें सफर करते हैं 300 लोग। कोई ट्रेन का चालान तो नहीं काटता। एक जीप 9 सवारी पर पास होती है लेकिन उसमें 22 लोग जाते हैं। जीप का चालान तो नहीं कटता। अगर किसी गांव में कोई विवाद होता है तो दो पुलिसवाले मोटरसाइकिल से वहां पहुंचते हैं। किसी पकड़ कर थाना लाना होता है तो दोनों पुलिसवाले उसे बीच में मोटरसाइकिल पर बैठा लेते हैं। लेकिन इन पुलिसवालों का चालान तो नहीं कटता। लेकिन जब आम जनता मोटरसाइकिल पर तीन सवारी करती है तो उसका चालान काट दिया जाता है। मोटरसाइकिल अब गांव-घर की जरूरत है। अक्सर तीन लोगों को कहीं जाने की जरूरत पड़ती है। मोटरसाइकिल पर ट्रिपल लोडिंग की मंजूरी होनी चाहिए। इसलिए मैंने कहा है कि हमारी सरकार बनते ही मोटरसाखिल पर तीन सवारी फ्री कर दिया जाएगा नहीं तो ट्रेन का भी चालान काटा जाएगा।

ओमप्रकाश राजभर की राजनीति
ओमप्रकाश राजभर का राजनीतिक सफर बसपा से शुरू हुआ था। इन्होंने 1981 में कांशीराम के साथ राजनीति शुरू की थी। 2001 में मायावती से विवाद होने के बाद ये बसपा से अलग हो गये। 2002 में राजभर ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी बनायी। माना जाता है कि पूर्वांचल में करीब 18 फीसदी राजभर वोटर हैं। वाराणसी, गोरखपुर और आजमगढ़ इलाके में राजभर वोटर निर्णायक स्थिति में हैं। ओमप्रकाश राजभर गाजीपुर की जहूराबाद सीट से विधायक हैं। 2017 का विधानसभा चुनाव उन्होंने भाजपा के साथ मिल कर लड़ा था। भाजपा ने आठ सीटें दी थीं। पहली बार सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के चार विधायक जीते। ओमप्रकाश राजभर योगी सरकार में मंत्री बने। बाद में योगी आदित्यनाथ से विवाद होने पर उन्होंने मंत्री पद और एनडीए को अलविदा कह दिया। 2022 में वे सपा के साथ मिल कर चुनाव लड़ रहे हैं। उनकी पार्टी का मुख्यालय वाराणसी के फतेहपुर में है। पहले ओमप्रकाश राजभर ने वाराणसी की शिवपुर सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। लेकिन बाद में उन्होंने शिवपुर सीट पर अपने बेटे अरविंद राजभर को खड़ा कर दिया और खुद अपनी सीटिंग सीट जहूराबाद चले गये।

इलेक्ट्रॉन, प्रॉटॉन और न्यूट्रॉन
ओमप्रकाश राजभर के बयान सुर्खियां बटोरते रहे हैं। वाराणसी में आयोजित चौपाल कार्यक्रम में उन्होंने कहा था, अखिलेश यादव, जयंत चौधरी और मैं इलेक्ट्रॉन, प्रॉटॉन और न्यूट्रॉन की तरह हैं। हम तीनों एक साथ आ चुके हैं और एटम बम बना चुके हैं। ये बम 10 मार्च को फटेगा। ओमप्रकाश राजभर के मुताबिक, भाजपा के साथ सबसे अधिक माफिया और गुंडे हैं। अगर भाजपा के साथ ब्रजेश सिंह हैं तो हम मुख्तार अंसारी के साथ हैं। राजभर ने आरोप लगाया कि भाजपा ने मुख्तार अंसारी पर बदले की भावना से कार्रवाई की है। बाहुबली मुख्तार अंसारी मऊ सदर के विधायक हैं और फिलहाल जेल में बंद है। राजभर ने मुख्तार को मऊ सदर से अपनी पार्टी का उम्मीदवार बनाने की घोषणा की है। 2017 में मुख्तार बसपा के टिकट पर विधायक बने हैं। लेकिन 2022 में मायावती ने उन्हें टिकट देने से मना कर दिया था। अब ओमप्रकाश राजभर मुख्तार के साथ हो लिये। मायावती ने मऊ सदर सीट से अपने प्रदेश अध्यक्ष भीम राजभर को उम्मीदवार बनाया है।

मऊ में राजभर फैक्टर
मऊ सदर सीट पर मुख्तार अंसारी का 1996 से कब्जा है। वे पार्टी बदलते रहे हैं। 2012 के विधानसभा चुनाव में वे कौमी एकता दल से लड़ रहे थे। बसपा ने भीम राजभर को उम्मीदवार बनाया था। भीम राजभर में जोरदार टक्कर दी। मुख्तार मुश्किल से जीते। मुख्तार अंसारी जैसै दबंग नेता करीब चार हजार वोट से ही जीत पाये थे। मायावती ने 2020 में भीम राजभर को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। अब वे एक बार फिर 2022 में मुख्तार अंसारी को चुनौती दे रहे हैं। ओमप्रकाश राजभर ने राजभर वोटरों को ध्यान में रख कर ही मुख्तार को अपनी पार्टी से उम्मीदवार बनाने की घोषणा की है। 2017 में इस सीट पर खुद सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने मुख्तार के खिलाफ चुनाव लड़ा था। इस पार्टी के महेन्द्र राजभर को 88 हजार से अधिक वोट मिले थे। लेकिन मुख्तार ने करीब 96 हजार वोट ला कर राजभर को हरा दिया था। 2022 में राजनीति बदली तो ओमप्रकाश राजभर ने मुख्तार को अपनी पार्टी का उम्मीदवार बना दिया।
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