बिहार में बैंकिंग सेक्टर पर सख्ती, खराब प्रदर्शन करने वाले बैंकों के सरकारी डिपॉजिट पर लगेगी रोक

बिहार वित्त विभाग ने बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत करने के लिए पांच-सूत्रीय रणनीति को मंजूरी दी है। खराब प्रदर्शन करने वाले बैंकों के लिए सरकारी जमा राशि को मंजूरी देने के लिए एक सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी, साथ ही सीडी अनुपात और एसीपी को बढ़ाना लक्ष्य होगा। यह योजना जन समर्थ पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी ऋण वितरण और प्रमुख बैंकों में प्रदर्शन-आधारित रैंकिंग को प्राथमिकता देती है।

बिहार में बैंकिंग व्यवस्था के ढीले रवैये को लेकर वित्त विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बैंकों के प्रदर्शन में सुधार के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति की अनुशंसाओं को मंजूरी दे दी है। समिति ने बैंकिंग प्रणाली में सुधार के लिए पांच सूत्रीय कड़ी रणनीति प्रस्तुत की है।

Bihar approves five point banking reform plan

वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि खराब प्रदर्शन करने वाले बैंकों की कड़ी निगरानी की जाएगी। यदि अगले छह महीनों में सुधार नहीं हुआ, तो ऐसे बैंकों के सरकारी डिपॉजिट पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी।

विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में बैंकिंग सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। समिति ने राज्य के साख जमा अनुपात (CD Ratio) को बेहतर बनाने के लिए वार्षिक साख योजना (ACP) का लक्ष्य संभावित जमा का न्यूनतम 80 प्रतिशत रखने की सिफारिश की है। इस दिशा में नाबार्ड द्वारा 3,55,532 करोड़ रुपये का संभावित ऋण योजना (PLP) निर्धारित किया गया है।

समिति ने यह भी पाया कि बड़े बैंकों की तुलना में छोटे बैंकों का प्रदर्शन बेहतर है। इसलिए प्रमुख बैंकों को अधिक लक्ष्य देकर उनके प्रदर्शन में सुधार लाने की आवश्यकता बताई गई है।

सरकारी योजनाओं के तहत ऋण वितरण को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए ‘जनसमर्थ पोर्टल’ के उपयोग की अनुशंसा की गई है। इसके माध्यम से किसानों और अन्य लाभार्थियों के आवेदन सीधे बैंकों तक पहुंचेंगे, जिससे मॉनिटरिंग और ऋण वितरण प्रक्रिया आसान होगी।

पंचायत स्तर पर आयोजित सहयोग शिविरों में जनसमर्थ पोर्टल के प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया गया है। समिति का मानना है कि स्वयं सहायता समूहों, जीविका दीदियों और लाखों किसानों को इस प्लेटफॉर्म से जोड़कर ऋण पहुंच को बढ़ाया जा सकता है।

बैंकों की कार्यप्रणाली को सुधारने के लिए प्रदर्शन आधारित रैंकिंग प्रणाली लागू करने की भी सिफारिश की गई है। जिन बैंकों का CD Ratio और ACP लक्ष्य 50-60 प्रतिशत से कम है, उन्हें निगरानी में रखा जाएगा। निर्धारित समय में सुधार नहीं होने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में जिन 15 प्रमुख बैंकों के प्रदर्शन पर विशेष नजर रखने की बात कही गई है, उनमें यूको बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आईडीबीआई बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, बंधन बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, कर्नाटक बैंक, यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक, इंडसइंड बैंक, उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक और करूर वैश्य बैंक शामिल हैं।

गौरतलब है कि राज्य में बैंकिंग व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से यह उच्च स्तरीय समिति गठित की गई थी। यह समिति नियमित रूप से वार्षिक साख योजना और CD Ratio की समीक्षा करेगी तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के लिए दिशा-निर्देश जारी करेगी। सरकार का मानना है कि इन सख्त कदमों से राज्य में बैंकिंग प्रणाली अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनेगी, जिससे आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

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