UP Crime News: पिता की मौत का बदला लेकर बना पूर्वांचल का खौफ! 6 कत्ल-11 केस, कैसे पकड़ी डॉन से राजनीति की राह?
UP Crime News Brijesh Singh: उत्तर प्रदेश में कुख्यात माफिया डॉन्स की बात होगी, तब-तब 'बृजेश सिंह' का नाम जरूर लिया जाता है। अपराध की दुनिया से लेकर राजनीति में मजबूत पकड़ बनाने तक, बृजेश सिंह की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती। एक ऐसा माफिया, जिसने अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए अपराध की दुनिया में कदम रखा और फिर देखते ही देखते पूर्वांचल में जुर्म की दुनिया का सरताज बन बैठा।
बाद में उसने राजनीति में भी अपनी पहचान बनाई और एमएलसी तक बना। लेकिन, उसकी कहानी सिर्फ अपराध और राजनीति की नहीं, बल्कि सत्ता और ताकत की भी है। आइए जानते हैं बृजेश सिंह (Brijesh Singh) की पूरी कहानी...

कैसे बना अपराध की जुर्म की दुनिया का बादशाह?
बृजेश सिंह का असली नाम अरुण कुमार सिंह है। उनका जन्म वाराणसी के धरहरा गांव में हुआ था। उनके पिता रविंद्र सिंह इलाके के जाने-माने व्यक्ति थे और राजनीतिक रूप से भी प्रभावशाली थे। बृजेश बचपन से ही पढ़ाई में होशियार था। 1984 में इंटरमीडिएट की परीक्षा में अच्छे अंक लाने के बाद उसने बीएससी की पढ़ाई की। लेकिन किस्मत ने उसके लिए कुछ और ही लिखा था।
अपराध की दुनिया में पहला कदम
1984 में जब बृजेश सिंह के पिता की हत्या कर दी गई, तो उसने बदला लेने की ठान ली। 1985 में उसने अपने पिता के हत्यारे हरिहर सिंह की हत्या कर दी। यहीं से उसके अपराध का सफर शुरू हुआ। 1986 में उसने अपने पिता की हत्या में शामिल पांच अन्य लोगों को भी गोलियों से भून डाला। इस सामूहिक हत्याकांड के बाद उसका नाम माफिया डॉन के रूप में लिया जाने लगा। इसी के साथ उसका अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ने लगा और वे एक खूंखार माफिया के रूप में पहचाने जाने लगे।
बृजेश सिंह बनाम मुख्तार अंसारी: गैंगवार की शुरुआत
बृजेश सिंह ने अपराध की दुनिया में कदम रखने के बाद ठेकेदारी और रंगदारी का धंधा शुरू किया। बृजेश सिंह ने मुंबई, बिहार, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा तक अपना नेटवर्क फैलाया। इसी दौरान उसकी दुश्मनी बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी से हो गई। दोनों के बीच की दुश्मनी इतनी गहरी हो गई कि गैंगवार में कई लोग मारे गए। इस संघर्ष में बृजेश के भाई की भी हत्या कर दी गई। 2001 में गाजीपुर के उसरी चट्टी में मुख्तार अंसारी के काफिले पर जानलेवा हमला किया।
मुंबई अंडरवर्ल्ड से जुड़ाव और जेजे अस्पताल शूटआउट
बृजेश सिंह का नाम सिर्फ यूपी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने मुंबई में भी अपनी पकड़ बना ली। वह अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के संपर्क में आया। 1992 में मुंबई के जेजे अस्पताल में हुए शूटआउट में बृजेश का नाम सामने आया। इसमें दाऊद के दुश्मन अरुण गवली गैंग के शार्प शूटर शैलेश हलधंकर को मार दिया गया था। इस हमले में दो पुलिसकर्मी भी मारे गए थे। इस शूटआउट में पहली बार AK-47 का इस्तेमाल हुआ था।
राजनीति में एंट्री: एमएलसी तक का सफर
2008 में बृजेश सिंह को ओडिशा से गिरफ्तार किया गया, उसके खिलाफ 30 से ज्यादा संगीन मामले दर्ज थे, जिनमें हत्या, अपहरण और रंगदारी शामिल थे। लेकिन लंबे समय तक अपराध की दुनिया में रहने के बाद बृजेश सिंह ने राजनीति का रुख किया। 2015 में उसने एमएलसी का चुनाव लड़ा और रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की। वाराणसी से एमएलसी रहे। हालांकि, 2017 के विधानसभा चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा।
वर्तमान स्थिति: राजनीति में सक्रियता
2022 में इलाहाबाद हाई कोर्ट से उसे जमानत मिल गई, और वह जेल से रिहा हो गया। रिहाई के बाद बृजेश सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन करना शुरू कर दिया। वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में प्रचार करते हुए उसे भाजपा की टोपी और पटका पहने देखा गया। उसका परिवार भी राजनीति में सक्रिय है। उसकी पत्नी अन्नपूर्णा सिंह एमएलसी हैं, और भतीजे सुशील सिंह तीन बार विधायक रह चुके हैं।
बृजेश सिंह की संपत्ति और कानूनी मुकदमे
2024 के एडीआर रिपोर्ट के अनुसार, बृजेश सिंह की कुल संपत्ति 17 करोड़ से अधिक है। उसके ऊपर 11 आपराधिक मामले दर्ज हैं। हालांकि, उसकी राजनीतिक पकड़ अभी भी मजबूत बनी हुई है।
बृजेश सिंह की क्रिमिनल हिस्ट्री
1. हत्या और हत्या के प्रयास से जुड़े मामले
- हत्या का आरोप (IPC धारा-302) - 1 केस
- हत्या के प्रयास का आरोप (IPC धारा-307) - 4 केस
- आपराधिक षड्यंत्र के तहत हत्या की साजिश (IPC धारा-120B) - 2 केस
2. हिंसा और दंगे भड़काने से जुड़े मामले
- दंगे की सजा से संबंधित आरोप (IPC धारा-147) - 5 केस
- हथियारों के साथ दंगे करने का आरोप (IPC धारा-148) - 5 केस
- गैरकानूनी सभा में शामिल होने का आरोप (IPC धारा-149) - 4 केस
- खतरनाक हथियारों से गंभीर चोट पहुंचाने का आरोप (IPC धारा-326) - 1 केस
- घातक हथियारों से चोट पहुंचाने का आरोप (IPC धारा-324) - 5 केस
3. जबरन वसूली और धमकी से जुड़े मामले
- जबरन वसूली का आरोप (IPC धारा-384) - 1 केस
- किसी को जान से मारने की धमकी देकर वसूली करना (IPC धारा-387) - 1 केस
- आपराधिक धमकी देने का आरोप (IPC धारा-506) - 1 केस
4. धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज बनाने से जुड़े मामले
- जाली दस्तावेज का इस्तेमाल करना (IPC धारा-471) - 2 केस
- धोखाधड़ी के लिए फर्जी कागजात बनाना (IPC धारा-468) - 2 केस
- मूल्यवान दस्तावेजों की जालसाजी (IPC धारा-467) - 2 केस
- छद्मवेश (फेक आइडेंटिटी) का उपयोग कर धोखाधड़ी (IPC धारा-419) - 2 केस
- धोखाधड़ी से संपत्ति हड़पने का आरोप (IPC धारा-420) - 1 केस
5. चोरी और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़े मामले
- चोरी करने का आरोप (IPC धारा-379) - 1 केस
- संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप (IPC धारा-427) - 1 केस
6. संगठित अपराध और साजिश से जुड़े मामले
- आपराधिक षड्यंत्र रचने का आरोप (IPC धारा-120B) - 2 केस
- कई व्यक्तियों द्वारा एक साथ अपराध करने का आरोप (IPC धारा-34) - 1 केस
- नकली दस्तावेज अपने पास रखने का आरोप (IPC धारा-474) - 1 केस
बृजेश सिंह की कहानी अपराध, बदला, सत्ता और राजनीति का मिश्रण है। एक समय जो माफिया डॉन के रूप में कुख्यात था, आज वह राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उसका जीवन उन कहानियों जैसा है, जो फिल्मी दुनिया में दिखती हैं, लेकिन यह हकीकत है। अब देखना होगा कि आने वाले समय में उसका राजनीतिक भविष्य क्या मोड़ लेता है।












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