यूपी चुनाव: क्या आपने देखा कल्याण सिंह का पोता, चुनाव के लिए लंदन से लौटा बांका छोरा

संदीप सिंह ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशन में पोस्टग्रेजुएशन की डिग्री हासिल करने के बाद भारत लौटे हैं। अतरौली सीट से बीजेपी का टिकट मिलने के बाद संदीप सिंह यहां के गांवों का दौरा कर रहे हैं।

अलीगढ़। 'असल से ज्यादा सूद प्यारा होता है, अरे बस यही समझो की कल्याण दादा ही हैं ये, दादा का मुंह देख कर बालक को जिताओ', ऐसे ही नारे अलीगढ़ के अतरौली विधानसभा सीट पर गूंज रहे हैं। इसकी वजह ये है कि इस बार इस सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पोते संदीप सिंह की बीजेपी ने उम्मीदवार बनाया है।

'दादा' कल्याण सिंह की सीट पर चुनाव मैदान में उतरे संदीप सिंह

अतरौली सीट पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की पारंपरिक सीट हुआ करती थी। 1967 में पहली बार कल्याण सिंह जनसंघ के टिकट पर यहां से उम्मीदवार बने और जीत हासिल की। वर्तमान में राजस्थान के राज्यपाल का पद संभाल रहे कल्याण सिंह ने अलीगढ़ के अतरौली विधानसभा सीट से लगातार 10 बार जीत हासिल की। यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी ने उनके नाम को भुनाने के लिए उनके पोते संदीप सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है। 25 वर्षीय संदीप सिंह का ये पहला विधानसभा चुनाव है।

चुनाव प्रचार में जुटे संदीप सिंह, गांवों का कर रहे दौरा

चुनाव प्रचार में जुटे संदीप सिंह, गांवों का कर रहे दौरा

संदीप सिंह ब्रिटेन की लीड्स बेकेट यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशन में पोस्टग्रेजुएशन की डिग्री हासिल करने के बाद पिछले साल भारत लौटे हैं। अतरौली सीट से बीजेपी का टिकट मिलने के बाद संदीप सिंह यहां के गांवों का दौरा कर रहे हैं। उन्हें अपने दादा के नाम पर वोट की उम्मीद है। चुनाव प्रचार के दौरान ऐसे नारे कई बार सामने आए जिसमें कहा गया कि बाबूजी का पोता है...वोट तो देना ही है।

यूके से पढ़ाई करके लौटे हैं संदीप सिंह

यूके से पढ़ाई करके लौटे हैं संदीप सिंह

अलीगढ़ के अतरौली सीट पर चुनाव प्रचार के दौरान वरिष्ठ नेताओं के कहने पर कई बार संदीप सिंह ग्रामीणों का पैर छूते भी नजर आए। संदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने इलाके के करीब दर्जनभर गांवों का दौरा किया है। इस दौरान कई जगह पर संदीप सिंह के पिता और एटा से बीजेपी सांसद राजवीर सिंह भी उनके साथ थे।

चुनावी नारों में कल्याण सिंह का जिक्र

चुनावी नारों में कल्याण सिंह का जिक्र

संदीप सिंह के चुनाव प्रचार में बीजेपी नेताओं के साथ-साथ, गांव के मुखिया, सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे। इस दौरान यही नारा इलाके में गूंजता दिखा कि अरे जीतेगा भाई जीतेगा, दादा का पोता जीतेगा, कमल का फूल ही जीतेगा। पार्टी के नेताओं का मानना है कि कल्याण सिंह का इस इलाके में काफी प्रभाव रहा है। इसका फायदा उनके पोते संदीप सिंह को जरूर मिलेगा। इसीलिए नारों में इस बात का जिक्र किया जा रहा है।

संदीप का दावा, आंकड़ें उनके पक्ष में

संदीप का दावा, आंकड़ें उनके पक्ष में

संदीप सिंह का दावा है कि अतरौली में आंकड़ें उनके पक्ष में हैं। उन्हें उम्मीद है कि उनके परिवार से जुड़े पारंपरिक वोटर उन्हें ही समर्थन करेंगे, साथ ही ओबीसी श्रेणी के अंतर्गत आने वाले लोधी जाति का वोट भी उनके पक्ष में आएगा। उन्होंने कहा कि अतरौली जीत को लेकर एक दबाव महसूस कर रहा हूं, खासकर जब उनकी मां 2007 में इस सीट से जीत चुकी हैं लेकिन 2012 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

2012 में सपा ने जीती थी अतरौली की सीट

2012 में सपा ने जीती थी अतरौली की सीट

बता दें कि 2012 में अतरौली सीट पर समाजवादी पार्टी ने कब्जा जमाया था, वीरेश यादव ने यहां से जीत हासिल किया था। इस बार भी समाजवादी पार्टी ने उन्हें ही मैदान में उतारा है। इस बार माामला इसलिए भी उलझा हुआ है क्योंकि समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस पार्टी के साथ गठबंधन किया है। जिसका कुछ असर चुनाव पर नजर आ सकता है। हालांकि बीजेपी कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि कल्याण सिंह के नाम पर वोटरों का झुकाव संदीप सिंह की ओर जरुर होगा।

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