UP: हाईकोर्ट के आदेश के बाद Yogi सरकार कसेगी निजी स्कूलों की पर शिकंजा, लिया ये बड़ा फ़ैसला

यदि कोई छात्र, अभिभावक, अभिभावक-शिक्षक संघ उपरोक्त निर्देशों का पालन न करने से व्यथित है, तो वे धारा 8 के तहत जिला शुल्क नियामक समिति के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

योगी आदित्यनाथ

HC order to adjust 15% excess fees: उत्तर प्रदेश सरकार ने निजी स्कूलों पर नकेल कसने की कवायद शुरू कर दी है। सरकार ने सभी निजी स्कूलों को उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन करते हुए उनके द्वारा कोविड अवधि (2020-21) के दौरान वसूले गए 15% अतिरिक्त शुल्क को समायोजित करने का निर्देश दिया है। राशि को वर्तमान शैक्षणिक सत्र में समायोजित किया जाएगा और यदि छात्र स्कूल छोड़ चुके हैं तो उन्हें वापस करना होगा।

विशेष सचिव, यूपी सरकार, रूपेश कुमार ने एक आदेश में कहा है कि,

यदि कोई छात्र, अभिभावक, अभिभावक-शिक्षक संघ उपरोक्त निर्देशों का पालन न करने से व्यथित है, तो वे धारा 8 के तहत जिला शुल्क नियामक समिति के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उत्तर प्रदेश स्व-वित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018। उनकी शिकायत पर समिति उचित निर्णय लेगी।

कुमार ने कहा कि फीस न बढ़ाने का सरकारी आदेश (27 अप्रैल, 2020) राज्य में संचालित सभी बोर्डों के सभी स्कूलों पर लागू होता है। लेकिन अगर स्कूलों ने शैक्षणिक सत्र 2020-21 में अतिरिक्त शुल्क की गणना की गई राशि का 15% शुल्क लिया गया है तो इसे अब समायोजित करना पड़ेगा।

कोई भी मान्यता प्राप्त विद्यालय अथवा जिला शुल्क नियामक समिति के निर्णय से व्यथित व्यक्ति अधिनियम की धारा-8(11) के अन्तर्गत संभागीय स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील प्रस्तुत कर सकता है। कुमार ने कहा कि उपरोक्त आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 6 जनवरी, 2023 को उत्तर प्रदेश के सभी स्कूलों को 2020-21 में कोविड अवधि के दौरान ली जाने वाली कुल फीस में 15% की छूट प्रदान करने का निर्देश दिया था। अदालत के आदेश में कहा गया है कि राज्य के सभी स्कूलों को 2020-21 शैक्षणिक वर्ष के दौरान ली जाने वाली कुल फीस का 15% की गणना करनी होगी और इसे अगले सत्र में समायोजित करना होगा।

हालांकि, यूपी के अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने कहा कि ज्यादातर सदस्य स्कूलों ने कोविड के समय में छात्रों को भारी छूट दी है। अगर किसी स्कूल द्वारा इसका उल्लंघन करने की शिकायत माता-पिता से की जाती है, तो उस स्कूल से पूछताछ की जानी चाहिए।

दरअसल 15% शुल्क समायोजन के उच्च न्यायालय और राज्य सरकार के आदेशों का स्वागत करते हुए कहा कि टीचर-पैरेंटस संगठनों ने कहा है कि माता-पिता को कुछ राहत मिलेगी जो नौकरी छूटने या वेतन कटौती के कारण अपनी आय को प्रभावित कर रहे थे।

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