Unnao Case: 'दरिंदे ने इज्जत लूटी-उसे फांसी हो, आज मेरे पिता को...', Kuldeep Sengar की जमानत खारिज पर पीड़िता
Unnao Makhi Kuldeep Singh Sengar Case-OI Exclusive: उन्नाव रेप केस की पीड़िता ने कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत याचिका खारिज होने पर गहरा संतोष जताया है। दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद Oneindia Hindi की Exclusive बातचीत में पीड़िता ने कहा, 'मैं इस फैसले से बहुत खुश हूं। आज मेरे पिता की आत्मा को सुकून मिला है। दरिंदे ने मेरी इज्जत लूटी, उसे फांसी होनी चाहिए। जब तक कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Sengar) को फांसी नहीं मिलेगी, मेरे पिता की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी। मैं आज तक अपनी पिता की तेरहवीं तक नहीं कर पाई हूं।'
पीड़िता ने आगे कहा कि सेंगर की रिहाई से परिवार पर खतरा मंडराता रहेगा। उन्होंने बताया, 'कुलदीप सिंह सेंगर की तरफ से दबाव डाला जा रहा है और सामने से धमकियां भी मिलती हैं। मेरे साथ तो CRPF की सुरक्षा है, मैं उनके कैंप में ही रह रही हूं। लेकिन मेरे परिवार, पैरोकारों और सीबीआई की सरकारी गवाहों पर से सुरक्षा हटा दी गई है। धमकियों में कहा जा रहा है कि अगर आप पीड़िता की तरफ से पैरोकारी करेंगे, तो सबको खत्म कर दिया जाएगा। चाहे कोर्ट हो या न्यायालय, कोई नहीं बचेगा। जांचें होती रहेंगी, केस चलता रहेगा।'

पीड़िता ने सेंगर की बेटियों द्वारा मामले को गलत बताने के दावों पर भी कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'सबूत यही हैं कि कोर्ट ने सजा सुनाई है। सीबीआई ने जांच की और सबूत कोर्ट के सामने पेश किए। हमारे साथ दरिंदगी हुई, हमने सीबीआई को पूरा बयान दिया। मैंने कभी किसी जांच से इनकार नहीं किया।'
Delhi High Court On Unnao Case: हाई कोर्ट का फैसला- सेंगर को मिला बड़ा झटका
दिल्ली हाई कोर्ट ने 19 जनवरी 2026 को जस्टिस रविंदर दुदेजा की सिंगल बेंच ने पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबन और जमानत याचिका खारिज कर दी। यह याचिका उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत (कस्टोडियल डेथ) के मामले से जुड़ी थी, जहां सेंगर को 10 साल की सजा हुई है। नवंबर 2025 में सुनवाई के बाद फैसला रिजर्व किया गया था और दोपहर करीब 2:30 बजे सुनाया गया।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मामला अत्यंत गंभीर है, जिसमें प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा कानून का दुरुपयोग किया गया। पीड़िता पक्ष के तर्कों को महत्व देते हुए अदालत ने परिवार की सुरक्षा पर खतरे की आशंका को स्वीकार किया और सजा निलंबन के लिए पर्याप्त आधार न होने पर जोर दिया। इससे सेंगर इस मामले में जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। वे अप्रैल 2018 से लगातार जेल में हैं।
मुख्य रेप मामले में दिसंबर 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट से सशर्त जमानत मिली थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 29 दिसंबर 2025 को उस पर स्टे लगा दिया। दोनों मामलों में अपील लंबित होने से उनकी रिहाई फिलहाल मुश्किल दिख रही है। कानूनी जानकारों का कहना है कि यह फैसला सत्ता के दुरुपयोग और महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर न्याय व्यवस्था की सख्ती का मजबूत संदेश देता है।
पीड़िता की लड़ाई: न्याय और सुरक्षा की मांग
पीड़िता ने बार-बार कहा है कि सेंगर की रिहाई से उनका परिवार असुरक्षित हो जाएगा। हाल के महीनों में उन्होंने अतिरिक्त सबूत पेश किए, जिसमें सेंगर पर जांच प्रभावित करने और फर्जी दस्तावेजों के आरोप हैं। सेंगर की बेटियों पर सोशल मीडिया के जरिए पीड़िता की पहचान उजागर करने के भी आरोप लगे हैं। सीबीआई ने भी रिहाई का विरोध किया, कहते हुए कि इससे गवाहों पर दबाव बढ़ेगा।
यह फैसला पीड़िता के परिवार के लिए बड़ी राहत है। पीड़िता कहती हैं, 'मेरा मन तो करता था आत्महत्या कर लूं, लेकिन मैं लड़ रही हूं।' उन्नाव केस 2017 से महिलाओं की सुरक्षा, सत्ता दुरुपयोग और न्याय की मांग का प्रतीक बना हुआ है। हाई कोर्ट का यह आदेश उसी दिशा में एक मजबूत कदम है, लेकिन पूरा न्याय अपीलों के अंतिम फैसले पर टिका है। सेंगर पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है।












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