घोटाले में नपे कानपुर देहात के जिला जज और सिविल जज को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किया निलंबित
आरोप है कि जिला जज ने लोक अदालत का गठन ही नहीं किया और फर्जी बिल बाउचर बनाकर विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जारी पूरी धनराशि खर्च कर दी।
इलाहाबाद। न्यायपालिका में एक बार फिर से बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर देहात के जिला जज विनोद कुमार यादव और सिविल जज सीनियर डिवीजन अनिल कुमार सत्यम को निलंबित कर दिया गया है। इन दोनों जजों के ऊपर आरोप है कि इन्होंने लोक अदालत के तहत जारी निधि में भारी घोटाला किया है। हाईकोर्ट के आदेश पर अब इस मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के महानिबंधक फैज आलम ने इस मामले में और अधिक जानकारी देने में असमर्थता जताते हुए कहा की जांच टीम गठित कर दी गई है। जांच के बाद ही इस मामले में और कुछ बताया जा सकता है।

क्या है मामला?
लोक अदालत के आयोजन वादों के त्वरित निस्तारण के लिए अलग से विधिक सेवा प्राधिकरण धनराशि भी जारी करता है। विधिक सेवा प्राधिकरण ने कुछ महीने पहले कानपुर में लोक अदालत के आयोजन के लिए जिला न्यायाधीश को 27 लाख रुपए आवंटित किए थे। यहां पर आरोप है कि जिला जज ने लोक अदालत का गठन ही नहीं किया और फर्जी बिल बाउचर बनाकर विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जारी पूरी धनराशि खर्च कर दी। लोक अदालत के नाम पर 27 लाख रुपए पचा लिए गए।

जज साहब का पकड़ा गया घोटाला
जब इस मामले की शिकायत हाईकोर्ट तक पहुंची तो हड़कंप मच गया। हाईकोर्ट ने जजों की आंतरिक कमेटी गठित की और उन्होंने जांच शुरु की तो प्रथमदृष्टया ही कानपुर के जिला जज दोषी पाए गए। जांच कमेटी ने पाया की विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से जो धनराशि आवंटित की गई थी, उसमें घोटाला हुआ है। न्यायाधीशों की प्रशासनिक टीम ने पाया की आरोप सही है, ऐसे में जांच आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है कि दोनों जजों को निलंबित कर दिया जाए। इस पर बड़ी कार्रवाई करते हुए कानपुर के जिला जज विनोद कुमार यादव और सिविल जज सीनियर डिवीजन अनिल कुमार सत्यम को निलंबित कर दिया गया।

जांच में सामने आएगी पूरी करतूत
अब इस मामले की जांच के लिए गठित टीम जांच करेगी और जांच रिपोर्ट के बाद दोनों जजों पर बड़ी कार्रवाई की जाएगी। आपको बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब न्यायाधीशों पर कार्रवाई हुई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इससे पहले भी कई जिला जजों पर कार्रवाई की है। आपको याद होगा कि सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे गायत्री प्रसाद प्रजापति को जब जमानत दी गई थी, तब एक न्यायाधीश पर पैसे लेने के आरोप लगे थे। तब इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जज को निलंबित कर दिया था। फिलहाल इस कार्रवाई के बाद न्यायपालिका में हड़कंप मचा हुआ है और ये खबर राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में छाई हुई है।












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