आंदोलनरत किसानो की मांगों को अपने घोषणापत्र में शामिल करेगी रालोद, सपा के साथ सीटों के बंटवारे पर टिकी निगाहें

लखनऊ, 15 सितम्बर: पश्चिमी उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) का गढ़ माना जाता है। पश्चिमी उप्र में भाजपा द्वारा किसी भी ध्रुवीकरण के प्रयास को रोकने के लिए, चुनावों की घोषणा से पहले अपने विधानसभा चुनाव घोषणापत्र को जारी करने का फैसला किया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक सितम्बर के अंत तक घोषणा पत्र तैयार हो जाएगा। आरएलडी के सूत्रों की माने तो रालोद के घोषणा पत्र में दिल्ली के आसपास अपनी मांगो को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों की मांगों को भी शामिल किया जाएगा। हालांकि पदाधिकारियों की माने तो पहला फोकस सपा और रालोद के बीच होने वाले गठबंधन पर है। इसमें सीटों का बंटवारे पर सबकी नजर है। ऐसी अटकलें हैं कि अक्टूबर में इसे फाइनल कर लिया जाएगा।

रालोद

रालोद सूत्रों के मुताबिक पार्टी गाजीपुर सीमा पर विरोध कर रहे किसानों के इनपुट को अपने घोषणापत्र में शामिल करेगी। पार्टी के एक पदाधिकारी ने कहा, "हमारी घोषणापत्र समिति की गाजीपुर सीमा पर किसानों के साथ पहले ही एक बैठक हो चुकी है, जिनमें से ज्यादातर यूपी के हैं। उन्होंने हमें अपनी जरूरतों, एक राजनीतिक दल से अपनी अपेक्षाओं के बारे में बताया। हम उनके साथ कुछ और बैठकें करेंगे और उनके सुझावों को अपने घोषणापत्र में शामिल करेंगे।''

बीजेपी को काउंटर करने के लिए तैयार हो रहा घोषणा पत्र
रालोद के वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि चुनाव से पहले घोषणापत्र तैयार करना सत्तारूढ़ भाजपा का मुकाबला करने की रणनीति का हिस्सा है। पदाधिकारी ने कहा, "हमारी पार्टी अपने एजेंडे पर स्पष्ट है - सपा के साथ गठबंधन और हम पश्चिमी यूपी में भाजपा को जगह नहीं देना चाहते हैं।" उन्होंने कहा, 'बीजेपी अपना ध्रुवीकरण शुरू करने से पहले इसका मुकाबला करने के लिए जनता के बीच एक स्पष्ट घोषणापत्र पेश करेगी। पहले हम चुनाव से ठीक पहले घोषणा पत्र जारी करते थे लेकिन अब हमने भाजपा के बयान का मुकाबला करने के लिए अपनी रणनीति बदल दी है।

रालोद

रालोद के राष्ट्रीय सचिव अनिल दुबे ने कहा कि,

"आने वाले चुनाव में किसानों की प्रमुख भूमिका होगी, और इसलिए हम उनके मुद्दों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हम उन मुद्दों को भी शामिल करेंगे जिनका वे दैनिक जीवन में सामना करते हैं जैसे उदाहरण के लिए, उन्हें बिजली की आपूर्ति और उनके कृषि क्षेत्रों से संबंधित मुद्दे। हम अपने घोषणापत्र में उनके जीवन और आजीविका के हर पहलू को शामिल करेंगे।'

चार महीने पहले ही जारी हो जाएगा घोषणा पत्र
उन्होंने कहा, 'हम चुनाव से तीन से चार महीने पहले इसे शुरू करने की योजना बना रहे हैं। इसे जनता का घोषणापत्र कहा जाएगा। फिलहाल हमें सपा के साथ सीटों के बंटवारे के समझौते को अंतिम रूप देना है। जैसे ही ऐसा होगा, हम उन सीटों के स्थानीय मुद्दों को शामिल करेंगे जो हमें आवंटित की गई हैं।" पार्टी सूत्रों के अनुसार, रालोद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों, विशेषकर जाटों में कृषि कानूनों को लेकर राज्य में भाजपा सरकार के खिलाफ बढ़ती नाराजगी को भुनाने की कोशिश कर रही है।

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पश्चिमी यूपी में भाइचारा सम्मेलन करा रही रालोद

पार्टी ने हाल ही में जाटों को मुसलमानों और क्षेत्र के अन्य समुदायों के साथ एकजुट करने के लिए अपना 'भाईचारा जिंदाबाद' अभियान भी शुरू किया था। रालोद के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह मुख्य रूप से जाटों और मुसलमानों, दलितों और अन्य कमजोर वर्गों सहित अन्य लोगों के बीच की खाई को पाटने का प्रयास है। लेकिन हमारा मुख्य ध्यान अब एक ठोस और आकर्षक घोषणापत्र लाने पर है जो हमें उन्हें अपनी क्षमताओं और योजना की पेशकश करने में मदद करेगा।

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