‘2 करोड़ की जमीन 10 मिनट में 18 करोड़ में राम मंदिर ट्रस्ट को बेची गई’, केजरीवाल ने PM मोदी को घेरा

Ram Mandir Chanda Chori: अयोध्या के राम मंदिर निर्माण और संबंधित गतिविधियों में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उन्हें महाभारत के धृतराष्ट्र की संज्ञा दी। केजरीवाल का आरोप है कि मंदिर ट्रस्ट में जमीन खरीद और चंदा चोरी जैसे घोटालों की जानकारी होने के बावजूद प्रधानमंत्री चुप रहे।

केजरीवाल ने दावा किया कि जब मामला सार्वजनिक होने लगा तो फर्जी एसआईटी गठित कर लोगों की आंखों में धूल झोंकी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री को सब पता था, फिर भी उन्होंने आंखें क्यों बंद रखीं?

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Ram Mandir Land Scam: कौन है ये पाठक परिवार ?

विवाद का केंद्र हरीश पाठक और उनकी पत्नी कुसुम पाठक हैं। दोनों अयोध्या क्षेत्र में 'साकेत गोट फार्मिंग' कंपनी चलाते थे। कंपनी ने बकरी पालन के नाम पर लोगों से निवेश जुटाया। योजना थी कि एक यूनिट (एक बकरी) खरीदने पर निवेशक को दूध, बच्चे और अन्य आय से मुनाफा मिलेगा। कंपनी देखभाल का जिम्मा लेगी।

2009 में शुरू हुई यह कंपनी 2016-19 के बीच विवादों में घिर गई। हरीश पाठक पर धोखाधड़ी, जालसाजी और निवेशकों के पैसे गबन के आरोप लगे। अयोध्या, बस्ती और अन्य जिलों में कई एफआईआर दर्ज हुईं। पुलिस ने उन्हें भगोड़ा घोषित किया और कुसुम पाठक के घर की कुर्की भी की गई। चार्जशीट दाखिल हुई, लेकिन पाठक परिवार फरार रहा।

18 मार्च 2021 को इस परिवार ने अयोध्या के बागबिजैसी गांव में अपनी जमीन सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी को 2 करोड़ रुपये में बेची। मात्र 10 मिनट में उन्हीं खरीदारों ने यह जमीन श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को 18.5 करोड़ रुपये में बेच दी। इस मूल्य अंतर (लगभग 9 गुना) ने घोटाले के आरोपों को हवा दी।

विपक्षी दलों ने दावा किया कि यह सौदा ट्रस्ट के कुछ सदस्यों की मिलीभगत से हुआ। दोनों सौदों में अयोध्या के तत्कालीन मेयर ऋषिकेश उपाध्याय और ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा गवाह थे। विपक्ष ने सीबीआई-ईडी जांच की मांग की। ट्रस्ट पक्ष का कहना था कि जमीन की कीमत बाजार दर के अनुसार तय हुई और पुराना एग्रीमेंट (2011 का) था, जिसकी वजह से मूल्य अंतर दिख रहा है। विश्व हिंदू परिषद ने भी ट्रस्ट का बचाव किया।

Who Is Harish Pathak: हरीश पाठक की पूरी कहानी

हरीश पाठक (उर्फ बाबा हरिदास, बबलू पाठक) बस्ती जिले के पठकापुर, बेलवा के रहने वाले हैं। वे ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे। 25 फरवरी 2009 को चंद्र प्रकाश दुबे और प्रताप नारायण के साथ मिलकर साकेत गोट फार्मिंग कंपनी बनाई।

कंपनी ने आकर्षक योजनाएं चलाईं। निवेशकों को बताया गया कि बकरी खरीद लें, कंपनी पालेगी और मुनाफा देगी। 7 साल तक योजना चली। 2016 में शिकायतें शुरू हुईं। 2019 तक कई मुकदमे दर्ज हो गए। धारा 420, 419, 467, 468, 471 आदि के तहत मामले चले। पुलिस रिकॉर्ड में पाठक दंपति फरार दिखाए गए। इसके बावजूद 2021 में उन्होंने जमीन सौदे किए। विपक्ष का आरोप है कि फरार आरोपी से ट्रस्ट ने सौदा कैसे किया?

केजरीवाल ने क्यों कहा धृतराष्ट्र?

केजरीवाल ने हालिया चंदा चोरी के आरोपों को भी जोड़ा। अयोध्या में मंदिर के दान पेटिकाओं से करोड़ों रुपये गबन का मामला सामने आया। उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की। कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी हुई। ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों ने नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दिया। इसमें ट्रस्ट के महासचिव चंपक राय भी शामिल हैं। केजरीवाल का कहना है कि प्रधानमंत्री को इंटेलिजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट्स के बावजूद कुछ पता नहीं चला। उन्होंने पूछा, 'मोदी जी, आपको पता कैसे नहीं चला? सच तो यह है कि आपको सब पता था, लेकिन आप धृतराष्ट्र बने रहे।' बीजेपी और ट्रस्ट ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया। उनका कहना है कि मंदिर निर्माण पारदर्शी तरीके से चल रहा है और जांच एजेंसियां काम कर रही हैं।

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