राजनाथ सिंह बनेंगे राष्ट्रपति? शाह के रोल में भी बदलाव! पॉलटिकल एक्सपर्ट की 'भविष्यवाणी' BJP में होगा कुछ बड़ा

Modi Cabinet Reshuffle Political Prediction: दिल्ली के सियासी गलियारों में इस समय हलचल बहुत तेज है। वजह है मोदी सरकार के केंद्रीय मंत्रिमंडल में होने वाला आगामी बड़ा फेरबदल। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पूरी समेत छह केंद्रीय मंत्रियों के हटाए जाने की बात चल रही है। मानसून सत्र से पहले मोदी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल होने की संभावना है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वैसे तो बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम का खाका तैयार हो चुका है और सिर्फ आधिकारिक ऐलान होना बाकी है, लेकिन असली सस्पेंस कैबिनेट को लेकर बना हुआ है।

राजनीतिक पंडितों का दावा है कि साल 2019 के बाद पहली बार सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी (CCS) में बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। इस संभावित फेरबदल को लेकर देश के सीनियर जर्नलिस्ट और 'आपका अखबार' यूट्यूब चैनल चलाने वाले प्रदीप सिंह ने एक ऐसी भविष्यवाणी की है, जिसने पूरी राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है।

Rajnath Singh

प्रदीप सिंह के अलावा सोशल मीडिया पर कई पॉलटिकल एक्सपर्ट का कहना है कि आने वाले दिनों में राजनाथ सिंह रक्षा मंक्षी पद से इस्तीफा दे सकते हैं और भाजपा उन्हें राष्ट्रपति बनाने पर विचार कर रही है। सोर्स का ये भी कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रोल में भी बदलाव हो सकता है।

राजनाथ सिंह बनेंगे राष्ट्रपति? खाली होगी लखनऊ की सीट

सीनियर पत्रकार और पॉलटिकल एक्सपर्ट प्रदीप सिंह के राजनीतिक विश्लेषण के मुताबिक, आगामी कैबिनेट फेरबदल में राजनाथ सिंह को रक्षा मंत्रालय से हटाकर एक बहुत बड़ी और नई भूमिका दी जा सकती है। कयास लगाए जा रहे हैं कि साल 2027 में मौजूदा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का कार्यकाल पूरा होने के बाद, बीजेपी राजनाथ सिंह को देश के अगले राष्ट्रपति के रूप में मैदान में उतार सकती है।

इस थ्योरी के पीछे कई दिलचस्प राजनीतिक समीकरण काम कर रहे हैं।

सर्वस्वीकार्यता और बेदाग छवि: राजनाथ सिंह की गिनती बीजेपी के सबसे सीनियर और संकटमोचक नेताओं में होती है। विपक्ष से लेकर एनडीए (NDA) के सहयोगी दलों तक, हर जगह उनका बेहद सम्मान है। उनकी यही साफ-सुथरी छवि उन्हें देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार बनाती है।

लखनऊ सीट का समीकरण: चर्चा यह भी है कि यदि राजनाथ सिंह इस सर्वोच्च पद की ओर कदम बढ़ाते हैं, तो उनकी पारंपरिक लखनऊ लोकसभा सीट उनके छोटे बेटे नीरज सिंह के लिए खाली की जा सकती है।

करियर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, देश के गृह मंत्री और रक्षा मंत्री जैसे बड़े पदों पर रहने के बाद राष्ट्रपति का पद उनके शानदार राजनीतिक सफर को एक मुकम्मल पूर्णता देगा, ठीक वैसे ही जैसे लालकृष्ण आडवाणी के प्रधानमंत्री न बन पाने की कमी के उलट प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति बनने के बाद उनके करियर में एक पूर्णता मिली थी।

हालांकि, इस बड़ी अटकल के बीच कांग्रेस ने इस समय संसद में मोर्चा खोल रखा है। कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग के प्रमुख कर्नल (रिटायर्ड) रोहित चौधरी और विंग कमांडर (रिटायर्ड) अनुमा आचार्य ने आरोप लगाया है कि राजनाथ सिंह ने 'ऑपरेशन सिंदूर' में शहीद हुए जवानों को लेकर देश को गुमराह किया है, जिसके चलते पार्टी उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने और उनके इस्तीफे की मांग कर रही है। इस पर बीजेपी ने फिलहाल रणनीतिक चुप्पी साधी हुई है।

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अमित शाह की भूमिका को लेकर क्या है चर्चा!

राजनीतिक गलियारों में दूसरी सबसे बड़ी चर्चा देश के गृह मंत्री अमित शाह को लेकर चल रही है। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस फेरबदल में अमित शाह को प्रमोट करके देश का उपप्रधानमंत्री (Deputy PM) बनाया जा सकता है। लेकिन इन संभावना के दोनों पहलुओं को समझना बेहद जरूरी है।

बिना पद के भी सबसे ताकतवर: प्रदीप सिंह का मानना है कि अमित शाह का गृह मंत्रालय में बने रहना पूरी तरह तय है क्योंकि आंतरिक सुरक्षा पर उनकी पकड़ और पीएम मोदी के साथ उनका तालमेल सरकार की सबसे बड़ी यूएसपी है। कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि बिना डिप्टी पीएम बने भी सरकार, संगठन, मुख्यमंत्रियों और प्रशासनिक नियुक्तियों पर अमित शाह का पूरा कंट्रोल है, तो इस नए पद से व्यावहारिक रूप से कुछ खास नहीं बदलेगा।

भविष्य का संदेश और नुकसान: अमित शाह को उपप्रधानमंत्री घोषित करने का मतलब होगा कि उन्हें आधिकारिक तौर पर पीएम मोदी का उत्तराधिकारी मान लिया गया है। मनोवैज्ञानिक रूप से यह कार्यकर्ताओं को बहुत मजबूत संदेश देगा, लेकिन इसके कुछ राजनीतिक नुकसान भी हो सकते हैं। यह मैसेज 2029 के लोकसभा चुनाव के लिहाज से विपक्ष को और ज्यादा एकजुट होने का मौका दे सकता है, साथ ही देश भर में मौजूद योगी आदित्यनाथ के समर्थकों में भी नाराजगी पैदा कर सकता है।

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CCS में बदलाव के मायने और आगे की राह

अगल पॉलटिकल एक्सपर्ट का यह आकलन सच साबित होता है, तो रक्षा मंत्री के रूप में देश को एक नया चेहरा मिलना तय है। इसके लिए सरकार के भीतर कुछ बेहद भरोसेमंद और प्रशासनिक रूप से मजबूत मंत्रियों के नामों पर विचार चल रहा है जो इस बेहद संवेदनशील विभाग को संभाल सकें।

एक बात तो बिल्कुल साफ है कि यह फेरबदल केवल मंत्रियों के विभागों को बदलने तक सीमित नहीं है। यह आगामी राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी, 2029 के लोकसभा चुनाव की बिसात और सरकार के भीतर पावर बैलेंस को नए सिरे से तय करने का एक बहुत बड़ा रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक साबित होने वाला है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह लेख वर्तमान में चल रही राजनीतिक चर्चाओं और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों के विश्लेषण पर आधारित है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में किसी भी तरह के आधिकारिक बदलाव या विभागों के आवंटन की पुष्टि केवल भारत सरकार द्वारा ही की जा सकती है।

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