Ram Mandir चंदे में 7 करोड़ गबन का विवाद: कौन हैं IAS-IPS समेत 3 अफसर, जो करेंगे पड़ताल? रिपोर्ट 7 दिनों में
Ram Mandir Donation Fund Controversy: अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में भक्तों के चढ़ावे और दान पात्रों से जुड़े कथित अनियमितताओं तथा गबन के आरोपों ने पूरे देश में सनसनी फैला दी है। लाखों रामभक्तों की आस्था से जुड़े इस पवित्र स्थल पर उठे सवालों ने राजनीतिक घमासान भी मचा दिया। उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार 13 जून 2026 को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर मात्र 24 घंटे के अंदर तीन सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित कर दी। इस टीम को 7 दिनों में प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों में अंतिम रिपोर्ट सौंपनी है।
यह जांच न केवल वित्तीय पारदर्शिता बल्कि राम मंदिर की पवित्रता और करोड़ों भक्तों की आस्था की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आइए जानते हैं SIT के तीनों अधिकारियों के बारे में, जो करेंगे पड़ताल...

विवाद की शुरुआत: 7 करोड़ गायब होने के आरोप
सोशल मीडिया और विपक्षी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी (सपा) ने दावा किया कि राम मंदिर परिसर के दान पात्रों से करीब 7 करोड़ रुपये गायब हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई नेताओं ने सवाल उठाए। ट्रस्ट ने इसे 'मंदिर की छवि खराब करने की साजिश' करार दिया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निष्पक्ष जांच की मांग की। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने पहले ही कहा था कि ट्रस्ट नियमित आंतरिक ऑडिट कराता है, जिसमें SBI के प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं।
एक कर्मचारी लवकुश मिश्रा (27 वर्ष) के घर से 10-12 लाख रुपये बरामद होने की खबर भी आई, जिसे गोबर के ढेर में छिपाया गया था। ऐसे में SIT का गठन त्वरित और विश्वसनीय कदम माना जा रहा है।
SIT टीम के तीन सदस्य: कौन हैं ये अफसर?
SIT की अगुवाई लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत (IAS) करेंगे। टीम में किरण एस. (IPS) और वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरतन कुमार शामिल हैं। तीनों अधिकारी अपने क्षेत्र में अनुभवी और वरिष्ठ हैं।
1. Who Is IAS Vijay Vishwas: कौन हैं विजय विश्वास पंत? (IAS, 2004 बैच) - SIT चेयरमैन
उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवा के चर्चित अधिकारियों में शामिल IAS विजय विश्वास पंत एक अनुभवी और बहुमुखी अफसर माने जाते हैं। वर्ष 2004 बैच के इस अधिकारी को हाल ही में SIT चेयरमैन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिला प्रशासन से लेकर ऊर्जा, स्वास्थ्य और मंडलीय प्रशासन तक, उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। आइए विस्तार से जानते हैं विजय की प्रोफाइल...

- नैनीताल से IIT कानपुर तक का सफर: 17 जनवरी 1979 को उत्तराखंड के नैनीताल में जन्मे विजय विश्वास पंत ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक की पढ़ाई की। उन्होंने प्रतिष्ठित Indian Institute of Technology Kanpur से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और बाद में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयनित हुए।
- 2004 बैच के IAS अधिकारी: विजय विश्वास पंत 6 सितंबर 2004 को भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए। दो वर्ष बाद 6 सितंबर 2006 को उनकी IAS सेवा की पुष्टि हुई। वह उत्तर प्रदेश कैडर के 2004 बैच के अधिकारी हैं और वर्तमान में लेवल-14 वेतनमान पर कार्यरत हैं।
- जिलों में संभाली अहम जिम्मेदारियां: अपने प्रशासनिक करियर की शुरुआत उन्होंने सहारनपुर में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के रूप में की। इसके बाद वाराणसी में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) रहे। उन्होंने महोबा, सोनभद्र, मैनपुरी और कानपुर नगर जैसे महत्वपूर्ण जिलों में जिलाधिकारी (DM) के रूप में कार्य किया और प्रशासनिक नेतृत्व की मजबूत छाप छोड़ी।
- ऊर्जा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी निभाई बड़ी भूमिका: विजय विश्वास पंत ने पूर्वांचल और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगमों के प्रबंध निदेशक के रूप में भी काम किया। इस दौरान बिजली वितरण व्यवस्था में सुधार और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया।
- इसके अलावा उन्होंने MSME मंत्री के निजी सचिव, मुख्य सचिव के स्टाफ ऑफिसर, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के मिशन निदेशक और SIFSA के कार्यकारी निदेशक जैसे अहम पदों की जिम्मेदारी भी संभाली।
- मंडलायुक्त के रूप में प्रभावशाली कार्यकाल: जुलाई 2020 से जुलाई 2022 तक उन्होंने Azamgarh मंडल के मंडलायुक्त के रूप में कार्य किया। इसके बाद जुलाई 2022 से सितंबर 2025 तक Prayagraj मंडल की कमान संभाली। 16 सितंबर 2025 से वह Lucknow मंडल के मंडलायुक्त के रूप में कार्यरत हैं।
- SIT चेयरमैन के तौर पर क्या होगी भूमिका?: SIT चेयरमैन के रूप में विजय विश्वास पंत प्रशासनिक प्रक्रियाओं, समग्र प्रबंधन और संबंधित व्यवस्थाओं की जांच का नेतृत्व करेंगे। उनसे व्यवस्था में सुधार के सुझाव देने और भविष्य के लिए बेहतर प्रशासनिक मॉडल तैयार करने की भी उम्मीद की जा रही है।
2. Who Is IPS Kiran Shivkumar: कौन हैं IPS किरण शिवकुमार? (IPS, 2008 बैच) - जांच के पुलिसिया पहलू
उत्तर प्रदेश कैडर के वरिष्ठ IPS अधिकारी किरण शिवकुमार अपनी तकनीकी समझ, जांच-केंद्रित कार्यशैली और शांत स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। 2008 बैच के इस अधिकारी को कई संवेदनशील मामलों की जांच का अनुभव है। वर्तमान में वह लखनऊ रेंज के आईजी के रूप में कार्यरत हैं और SIT में जांच के पुलिसिया पहलुओं की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। आइए विस्तार से जानते हैं किरण की प्रोफाइल...

- केरल से यूपी कैडर तक का सफर: 20 सितंबर 1982 को केरल के Thiruvananthapuram में जन्मे किरण शिवकुमार का पूरा नाम किरण एस. (किरण शिवकुमार) है। उनके पिता डॉ पीजे. शिवकुमार हैं। तकनीकी बैकग्राउंड रखने वाले किरण शिवकुमार ने इलेक्ट्रॉनिक्स में एम.टेक की पढ़ाई की, जिसके कारण उन्हें तकनीकी और साइबर जांच से जुड़े मामलों की बेहतर समझ रखने वाला अधिकारी माना जाता है।
- 2008 बैच के IPS अधिकारी: किरण शिवकुमार 22 दिसंबर 2008 को भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल हुए। अपने करियर के दौरान उन्होंने लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 2012 में उन्हें सीनियर स्केल मिला, 2021 में सिलेक्शन ग्रेड और 2022 में DIG पद पर पदोन्नति मिली। 1 जनवरी 2026 को उन्हें IG रैंक प्रदान की गई।
- वर्तमान में संभाल रहे हैं अहम जिम्मेदारी: 7 जनवरी 2026 को उन्हें Lucknow रेंज का पुलिस महानिरीक्षक (IG) नियुक्त किया गया। लखनऊ रेंज प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील पुलिस रेंजों में गिनी जाती है, जहां कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण की बड़ी जिम्मेदारी होती है।
- CBI में भी कर चुके हैं काम: किरण शिवकुमार का करियर केवल राज्य पुलिस तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने Central Bureau of Investigation में डेपुटेशन पर भी काम किया। इस दौरान आर्थिक अपराध, भ्रष्टाचार और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की जांच का व्यापक अनुभव हासिल किया।
- मिला इंटरपोल मेडल ऑफ एक्सीलेंस: 27 नवंबर 2025 को किरण शिवकुमार को अंतरराष्ट्रीय अपराध जांच में उल्लेखनीय योगदान के लिए इंटरपोल मेडल ऑफ एक्सीलेंस से सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि उन्हें देश के चुनिंदा पुलिस अधिकारियों की श्रेणी में खड़ा करती है, जिन्हें वैश्विक स्तर पर सराहना मिली है।
- SIT में क्या होगी भूमिका?: SIT में किरण शिवकुमार जांच के पुलिसिया और आपराधिक पहलुओं पर विशेष ध्यान देंगे। उनकी जिम्मेदारी चोरी, सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक, कर्मचारियों की भूमिका, साक्ष्यों के विश्लेषण और सोशल मीडिया पर फैलाई गई अफवाहों की जांच से जुड़े पहलुओं का मूल्यांकन करना होगी। CBI और अंतरराष्ट्रीय जांच का उनका अनुभव इस जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
3. Who Is Neelratan Kumar: कौन हैं नीलरतन कुमार - वित्त विशेषज्ञ
उत्तर प्रदेश वित्त एवं लेखा सेवा के वरिष्ठ अधिकारी नीलरतन कुमार को वित्तीय मामलों का गहरा जानकार माना जाता है। करीब 36 वर्षों के लंबे प्रशासनिक अनुभव के साथ उन्होंने सरकारी वित्त, ऑडिट, लेखा-जोखा और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। यही वजह है कि उन्हें SIT में वित्तीय जांच से संबंधित अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। आइए विस्तार से जानते हैं नीलरतन की प्रोफाइल...

- शाहजहांपुर से शुरू हुआ सफर: 9 सितंबर 1964 को उत्तर प्रदेश के Shahjahanpur में जन्मे नीलरतन कुमार ने एम.एससी. की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने प्रत्यक्ष भर्ती के माध्यम से उत्तर प्रदेश वित्त एवं लेखा सेवा में प्रवेश किया और सरकारी वित्तीय प्रशासन में लंबा योगदान दिया।
- 1988 में शुरू की सरकारी सेवा: नीलरतन कुमार ने 13 दिसंबर 1988 को सेवा में प्रवेश किया। 1 जुलाई 1996 को उनकी सेवा की पुष्टि हुई। लगभग 36 वर्षों के करियर के दौरान उन्होंने वित्तीय प्रबंधन और सरकारी लेखा प्रणाली से जुड़े कई महत्वपूर्ण दायित्व निभाए। 30 सितंबर 2024 को वह सेवानिवृत्त हो गए, लेकिन उनकी विशेषज्ञता को देखते हुए उन्हें SIT में विशेष भूमिका दी गई है।
- वित्त विभाग में निभाई अहम जिम्मेदारी: नीलरतन कुमार को 28 दिसंबर 2004 से उत्तर प्रदेश शासन के वित्त विभाग में विशेष सचिव के पद पर नियुक्त किया गया था। बाद में उन्होंने संयुक्त सचिव समकक्ष स्तर की जिम्मेदारियां भी संभालीं। इस दौरान उन्होंने बजट प्रबंधन, वित्तीय नीतियों, ऑडिट सिस्टम और सरकारी खर्चों की निगरानी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम किया।
- वित्तीय मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं: अपने लंबे अनुभव के कारण नीलरतन कुमार को सरकारी लेखा-जोखा, ऑडिट प्रक्रिया, वित्तीय नियमों और सरकारी लेन-देन का विशेषज्ञ माना जाता है। वित्तीय अनियमितताओं की पहचान और रिकॉर्ड की तकनीकी जांच में उनकी विशेष पकड़ बताई जाती है।
- SIT में क्या होगी भूमिका?: SIT में नीलरतन कुमार वित्तीय पहलुओं की जांच की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनकी भूमिका दान पात्रों की गिनती प्रक्रिया, ऑडिट व्यवस्था, ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन, रिकॉर्ड की जांच और किसी संभावित गबन या वित्तीय अनियमितता के तकनीकी विश्लेषण पर केंद्रित रहेगी। उनके अनुभव को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
नृपेंद्र मिश्रा का बयान: 'सरकार की तत्परता सराहनीय'
राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा ने फैजाबाद सर्किट हाउस में कहा कि SIT का गठन 24 घंटे से भी कम समय में हुआ। बहुत वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। 7 दिनों में प्रारंभिक और 15 दिनों में अंतिम रिपोर्ट आएगी। कमियां निकलीं तो सुधार होगा। उन्होंने मंदिर निर्माण की प्रगति भी बताई, 4 किमी बाउंड्री वॉल, 25 वॉच टावर, अगस्त 2026 तक मुख्य निर्माण पूरा करने का लक्ष्य, 15 अगस्त तक फसाड लाइटिंग और राम कथा संग्रहालय की गैलरियां।
SIT का गठन सकारात्मक कदम है। यह जांच न केवल सच्चाई सामने लाएगी बल्कि राम मंदिर जैसी राष्ट्रीय आस्था के प्रतीक की व्यवस्था को और मजबूत करेगी। रामभक्तों की आस्था अटूट रहे, यही सबसे जरूरी है। मंदिर निर्माण भी बिना रुके आगे बढ़े।













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