Somvati Amavasya 2026: अमावस्या पर तेल-नमक खरीदना अशुभ होता है? पंडित दयानंद ने दिया ये जवाब
Somvati Amavasya 2026: 15 जून को सोमवती अमावस्या है, इस दिन पितरों का तर्पण, भगवान शिव की पूजा और दान-पुण्य करने से विशेष फल प्राप्त होता है। काशी को पंडित दयानंद शास्त्री के मुताबिक कुछ वस्तुओं की खरीदारी इस दिन अशुभ मानी जाती है।
ऐसा माना जाता है कि इन चीजों को खरीदने से घर में नकारात्मकता, आर्थिक परेशानियां और मानसिक तनाव बढ़ सकता है और शनिदेव भी नाराज हो सकते हैं।

दयानंद शास्त्री ने निम्नलिखित चीजों को सोमवती अमावस्या पर खरीदने से मना किया है क्योंकि ये चीजें आपके लिए परेशानी ला सकती हैं।
- लोहे की वस्तुएं: सोमवती अमावस्या के दिन लोहे से बनी वस्तुएं खरीदने से बचना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र में लोहे का संबंध शनि ग्रह से माना गया है। अमावस्या के दिन लोहा खरीदने से शनि दोष बढ़ने और आर्थिक नुकसान की आशंका मानी जाती है।
- काले रंग की वस्तुएं: इस दिन काले कपड़े, काले जूते या अन्य काले सामान खरीदना शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा आकर्षित होती है और जीवन में बाधाएं बढ़ सकती हैं।
- सरसों का तेल: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवती अमावस्या पर सरसों का तेल खरीदने के बजाय उसका दान करना अधिक शुभ माना जाता है। तेल खरीदना आर्थिक हानि और अनावश्यक खर्चों का कारण बन सकता है।
- झाड़ू: हिंदू धर्म में झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। अमावस्या के दिन झाड़ू खरीदना या घर में लाना धन हानि का संकेत माना जाता है। इसलिए इस दिन झाड़ू खरीदने से परहेज करना चाहिए।
- नुकीली या धारदार वस्तुएं: चाकू, कैंची, ब्लेड और अन्य धारदार सामान खरीदना भी अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे परिवार में विवाद और तनाव बढ़ सकता है।
- नमक: कई धार्मिक मान्यताओं में अमावस्या के दिन नमक खरीदना शुभ नहीं माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि इससे घर की सुख-समृद्धि प्रभावित हो सकती है और आर्थिक समस्याएं बढ़ सकती हैं।
सोमवती अमावस्या पर क्या खरीद सकते हैं?
इस दिन पूजा-पाठ से जुड़ी सामग्री, फल, सफेद वस्त्र, दूध, दही, चावल और भगवान शिव की पूजा में उपयोग होने वाली वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। साथ ही जरूरतमंदों को दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
सोमवती अमावस्या पर क्या करें?
भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करें।पितरों के निमित्त तर्पण और दान करें।गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र एवं धन का दान दें।शिव मंत्रों का जाप करें और शनिदेव के मंदिर में तेल अपर्ण करें।
अध्यात्म और त्याग के संतुलन को स्थापित करने का एक उत्कृष्ट अवसर
दयानंद शास्त्री ने कहा कि 'सोमवती अमावस्या का यह पवित्र त्योहार मानवीय जीवन में अध्यात्म और त्याग के संतुलन को स्थापित करने का एक उत्कृष्ट अवसर है। इस दिन बाह्य दिखावे और भौतिक सुखों के अर्जन की होड़ से बचकर, सादगीपूर्ण जीवनशैली और ईश्वर भक्ति में लीन होना ही सबसे उत्तम पथ है।'














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