कौन है राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू? राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड का आरोप! पहले ऑटो ड्राइवर अब करोड़ों में संपत्ति!
Ram Mandir Donation Case (Ram Shankar Yadav, Tinnu): अयोध्या के भव्य और दिव्य श्रीराम मंदिर से आई एक खबर ने इस समय पूरे देश को हैरान कर दिया है। भगवान राम के चरणों में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले चढ़ावे में करोड़ों की हेरा-फेरी का गंभीर आरोप सामने आया है। इस पूरे मामले के केंद्र में एक ऐसा नाम है, जिस पर अब कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। नाम है- राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू।
वर्तमान में टिन्नू श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का महज एक खास सहयोगी है, लेकिन राम मंदिर परिसर के मैनेजमेंट में भी वो काम करता है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि मंदिर में लगभग हर आने वाले एक करोड़ रुपये के चढ़ावे को कंट्रोल करने वाली टीम का ये हिस्सा है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड में ये आरोपी है। ऐसे में आइए जानते हैं कि कौन है राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू और उस पर क्या-क्या संगीन आरोप लगे हैं।

एक वक्त राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू अयोध्या में ऑटो और टेंपो चलाता था और अब राम मंदिर मैनेजमेंट तक उसकी पहुंच है। मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी सहयोगी माने जाने वाले टिन्नू पर लगे आरोपों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक समय ऑटो और टेंपो चलाने वाला व्यक्ति राम मंदिर के सबसे प्रभावशाली चेहरों में कैसे शामिल हो गया। यही वजह है कि चढ़ावा विवाद के बाद सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय राजनीति तक हर जगह टिन्नू यादव की चर्चा हो रही है। हालांकि इन आरोपों की जांच अभी जारी है और किसी भी स्तर पर दोष साबित नहीं हुआ है, लेकिन विवाद ने उनके सफर को चर्चा का विषय जरूर बना दिया है।
कौन है राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू? जानिए उसका बैकग्राउंड ( Who is Ram Shankar Yadav alias Tinnu)
राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू का इतिहास बेहद साधारण रहा है। अयोध्या के स्वर्गद्वार (तुलसी पार्क के पीछे) मोहल्ले के रहने वाले टिन्नू के पिता तुलसीराम यादव नया घाट पर एक छोटी सी चाय की दुकान चलाते थे। टिन्नू का पुश्तैनी घर आज भी राम मंदिर से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर है, जो सामने से महज 7 फीट चौड़ा और तीन मंजिला बना हुआ है।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक साल 1994-95 के दौर में टिन्नू अयोध्या की गलियों में पेट पालने के लिए ऑटो (टेंपो) चलाया करता था। इसी दौरान उसकी किस्मत ने करवट ली और वह श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के मंत्री महेश नारायण के संपर्क में आ गया।
टिन्नू के व्यवहार और काम को देखते हुए महेश नारायण ने उसे अपनी गाड़ी का ड्राइवर रख लिया। ड्राइवर बनने के बाद टिन्नू का कारसेवकपुरम में आना-जाना शुरू हो गया, जहां उसने संगठन के बड़े नेताओं के बीच अपनी एक अलग और भरोसेमंद छवि बनानी शुरू कर दी।
ऑटो ड्राइवर से चंपत राय का 'राइट हैंड' बनने का सफर
विश्व हिंदू परिषद (VHP) में चंपत राय का कद लगातार बढ़ रहा था। साल 1991 में उन्हें क्षेत्रीय संगठन मंत्री बनाकर अयोध्या भेजा गया था, जिसके बाद वह संगठन में लगातार ऊंचे पदों पर पहुंचते गए। इसी बीच साल 1998 में टिन्नू यादव पहली बार चंपत राय के सीधे संपर्क में आया। जब 31 मई 2002 को महेश नारायण का निधन हो गया, तब चंपत राय ने टिन्नू का हाथ थामा और उसे कारसेवकपुरम में जीप से लेकर मालवाहक गाड़ियां चलाने का जिम्मा सौंप दिया।
टिन्नू मेहनती था और उसने चंपत राय का दिल जीत लिया। धीरे-धीरे वह चंपत राय का सबसे वफादार और विश्वासपात्र व्यक्ति बन गया। साल 2019 में जब सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया और राम मंदिर निर्माण का काम शुरू हुआ, तब टिन्नू को ट्रस्ट के भीतर एक आंतरिक वेतनभोगी कार्यकर्ता के रूप में रख लिया गया। सूत्रों के मुताबिक उसकी आधिकारिक सैलरी महज 16 हजार से 22 हजार रुपये प्रति माह के बीच थी, लेकिन मंदिर परिसर में उसका पावर किसी बड़े अधिकारी से कम नहीं था।

मंदिर में टिन्नू का रसूख और ताकत
भले ही कागजों पर टिन्नू एक मामूली कर्मचारी था, लेकिन मंदिर के प्रशासनिक और सुरक्षा ढांचे में उसकी मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता था। टिन्नू के रसूख को इन बातों से आसानी से समझा जा सकता है। मंदिर परिसर की सुरक्षा और आंतरिक प्रबंधन से जुड़े चुनिंदा लोगों को ही वॉकी-टॉकी दिया गया था, जिनमें से एक टिन्नू भी था। मंदिर के भीतर किस कर्मचारी की ड्यूटी कहां लगेगी और कौन क्या काम करेगा, इसका पूरा जिम्मा टिन्नू ही संभालता था।
मंदिर परिसर में रखी 14 दानपेटियों से हर दिन 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का कैश और भारी मात्रा में सोने-चांदी के जेवर निकलते हैं। इसे एक बंद कमरे में सीसीटीवी (CCTV) की निगरानी में गिना जाता है। गिनती के बाद इस पूरी भारी-भरकम रकम को बैंक में जमा कराने ले जाने की मुख्य जिम्मेदारी टिन्नू को ही सौंपी गई थी।
पूर्व लेखा प्रभारी के गंभीर आरोप: 8 महीने के CCTV फुटेज गायब
राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह और धर्म सेना के संस्थापक संतोष दुबे ने टिन्नू यादव पर बेहद सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। महिपाल सिंह के दावों के मुताबिक मंदिर में आने वाले सोने-चांदी और हीरे के आभूषणों को बिना तौले, सिर्फ एक रफ अनुमान के आधार पर लॉकर में रख दिया जाता था। इन जेवरों के बैंक में जमा होने का कोई पुख्ता लिखित रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
महिपाल सिंह ने एक और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि साल 2021 में उन्होंने नोटों की गिनती के दौरान कुछ कर्मचारियों को हेरा-फेरी करते हुए रंगे हाथों पकड़ा था, जिसकी शिकायत उन्होंने चंपत राय से भी की थी। लेकिन कार्रवाई करने के बजाय खुद महिपाल सिंह को ही गिनती के काम से हटा दिया गया। इसके बाद आरोप है कि टिन्नू ने एक प्राइवेट कर्मचारी के साथ मिलकर करीब 8 महीने पुराने सीसीटीवी (CCTV) फुटेज ही डिलीट करवा दिए, ताकि सारे सबूत हमेशा के लिए मिट जाएं। इसी विवाद के बाद महिपाल सिंह ने बिना कोई मानदेय लिए ट्रस्ट का काम छोड़ दिया था।
4 साल में खड़ा किया करोड़ों का साम्राज्य: क्या है टिन्नू की संपत्ति का सच?
- दैनिक भास्कर ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर दावा किया है कि एक तरफ जहां टिन्नू की सैलरी महज कुछ हजार रुपये थी, वहीं पिछले 4-5 सालों में उसकी संपत्ति में रॉकेट की रफ्तार से इजाफा हुआ है। स्थानीय लोगों और जांच में सामने आई टिन्नू की सुख-सुविधाओं और संपत्तियों की लिस्ट हैरान करने वाली है।
- अयोध्या के नाका इलाके और एयरपोर्ट के पास टिन्नू ने एक आलीशान दो मंजिला मकान बनाया है, जिसमें कुल 14 कमरे हैं। इस मकान में छात्र-छात्राओं के लिए हॉस्टल चलाया जाता है, जिससे हर महीने करीब 37 हजार रुपये का फिक्स किराया आता है। इस प्राइम लोकेशन पर जमीन की कीमत ही 2500 से 3000 रुपये प्रति वर्ग फीट है।
- अयोध्या के निषाद राज चौराहे के पास भी उसका एक बड़ा हॉस्टल है। इसके अलावा, शहर के 6 से ज्यादा नामी रेस्टोरेंट्स में उसकी पार्टनरशिप होने की बात सामने आई है।
- आरोप है कि टिन्नू ने बस्ती जिले के विक्रमजोत इलाके में करीब 20 से 22 बीघा कीमती खेती की जमीन खरीदी है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में भी उसकी करोड़ों की बेनामी संपत्ति होने का दावा किया जा रहा है।
- लखनऊ में टिन्नू का अपना एक निजी मकान है, जहां स्कोडा और स्कॉर्पियो जैसी गाड़ियां खड़ी रहती हैं। यही नहीं रामजन्मभूमि परिसर में भी उसकी 3 गाड़ियां अनुबंध (कॉन्ट्रेक्ट) पर चलती हैं, जिससे उसे मोटा किराया मिलता है। हाल ही में उसने अपने बेटे रवि यादव (जो पीडब्ल्यूडी में संविदा पर है) की शादी में पानी की तरह पैसा बहाया था।
सरकार ने बनाई 3 सदस्यीय SIT, देश को जांच रिपोर्ट का इंतजार
इस महाघोटाले और चढ़ावे की चोरी की गूंज जब लखनऊ से लेकर दिल्ली तक पहुंची, तो उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत बड़ा कदम उठाया है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए 3 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया गया है। इस एसआईटी को अगले 15 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को सौंपनी है।
हालांकि स्थानीय स्तर पर लोग अब भी गुस्सा हैं। सोशल मीडिया से लेकर अयोध्या की सड़कों पर यह सवाल तैर रहा है कि इतने बड़े आरोप लगने और एसओजी (SOG) की हलचल के बाद भी टिन्नू यादव पर अब तक सीधी कानूनी गाज क्यों नहीं गिरी? क्या चंपत राय का वरदहस्त और उसका राजनीतिक रसूख ही उसे एफआईआर (FIR) दर्ज होने और जेल जाने से बचा रहा है? इस बात का अंतिम फैसला अब एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा।
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की भूमिका को लेकर है। एक तरफ उनके समर्थक उन्हें वर्षों से संगठन के लिए काम करने वाला समर्पित कार्यकर्ता बताते हैं, वहीं दूसरी ओर आरोप लगाने वाले उनकी बढ़ती ताकत और संपत्ति पर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में एसआईटी की रिपोर्ट ही तय करेगी कि आरोपों में कितना दम है और राम मंदिर चढ़ावा विवाद की सच्चाई आखिर क्या है।














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