Rahul Gandhi के विवादित बयानों पर वाराणसी और संभल की अदालत में अगली सुनवाई कब? जानें नई तिथियां
Rahul Gandhi News: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बयानों को लेकर कानूनी मोर्चा गर्माता जा रहा है। वाराणसी और संभल की अदालतों में अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई हुई। दोनों जगह अदालतों ने नए दिन तय करते हुए आगे की प्रक्रिया स्थगित कर दी।
सोमवार को वाराणसी के एमपी/एमएलए कोर्ट ने सुनवाई करते हुए मामले की अगली तारीख चार सितंबर घोषित की। यह मामला राहुल गांधी के अमेरिका दौरे से जुड़ा है, जहां उन्होंने सिख समुदाय के संदर्भ में एक टिप्पणी की थी।

याचिकाकर्ता नागेश्वर मिश्रा का कहना है कि बयान से उनकी भावनाएं आहत हुईं। उन्होंने पहले न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में वाद दायर किया था जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने सत्र न्यायालय में निगरानी याचिका दाखिल की थी।
वाराणसी मामले में अधिवक्ताओं की दलील
सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की ओर से अधिवक्ता अनुज यादव पेश हुए। उन्होंने अदालत में आपत्ति पत्र दाखिल किया। कोर्ट ने पत्र को रिकॉर्ड में लेते हुए कहा कि चार सितंबर को बचाव पक्ष को अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा।
अधिवक्ता विवेक शंकर तिवारी ने बताया कि इस मामले में अदालत ने पूर्व की सुनवाई में याचिका स्वीकार कर ली थी। अब आगे की प्रक्रिया में यह देखा जाएगा कि आरोपों पर राहुल गांधी की ओर से क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है।
संभल की अदालत में अलग विवाद
इधर, संभल की एक अदालत में राहुल गांधी के एक अन्य बयान पर सुनवाई हुई। अदालत ने कहा कि निचली अदालत से रिकॉर्ड अभी उपलब्ध नहीं हो सका है। इसलिए इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 26 सितंबर तय की गई है।
राहुल गांधी का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सगीर सैफी ने कहा कि अदालत ने पहले ही निचली अदालत से रिकॉर्ड मंगाया था। लेकिन रिकॉर्ड पेश न होने के कारण कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। अब नई तारीख पर सुनवाई होगी।
बयान पर याचिकाकर्ता की आपत्ति
संभल मामले में हिंदू शक्ति दल के अध्यक्ष सिमरन गुप्ता ने याचिका दायर की थी। उन्होंने कहा कि 15 जनवरी को दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के उद्घाटन के समय राहुल गांधी ने 'हमारी लड़ाई इंडिया स्टेट से है' जैसी टिप्पणी की थी।
आरोप है कि यह बयान देश और लोकतंत्र के प्रति अपमानजनक था। उन्होंने दावा किया कि इस टिप्पणी ने लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई। प्रशासन से संपर्क करने के बावजूद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया।












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