तीन दिन से घर में पड़ा है मां का शव, मदद की उम्मीद लिए रो रहे हैं बच्चे

बच्चों के पास इतने भी पैसे नहीं हैं कि वो अपनी मां का अंतिम संस्कार करें। महिला को सांप काटने के बाद जिला अस्पताल ले जाया गया जहां उससे 5,000 रुपए मांगे गए लेकिन परिवार के पास रुपए नहीं थे।

शाहजहांपुर। एक तरफ सरकार गरीबों के लिए तमाम योजनाओं को चलाने का वादा कर रही है तो दूसरी तरफ प्रशासन की उदासीनता के चलते गरीबी में मरने के बाद भी गीता का शव 3 दिनों से घर में ही रखा है। बच्चों के पास इतने भी पैसे नहीं हैं कि वो अपनी मां का अंतिम संस्कार करें। महिला को सांप काटने के बाद जिला अस्पताल ले जाया गया जहां उससे पांच हजार रुपए मांगे गए लेकिन परिवार के पास पांच हजार रुपए नहीं थे। इसलिए महिला को घर वापस लाया गया। उसके बाद जब महिला के पति ने मिल मालिक से इलाज कराने के लिए एक हजार रुपए मांगे तो उसने भी देने से इनकार कर दिया।

Mothers Dead body waits for cremation
Mothers Dead body waits for cremation

इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना शाहजहांपुर के जमुका गांव की है। यहां पर गीता देवी अपनी चार बेटियों के साथ रहती थीं। गीता का पति सुनील मानसिक रूप से बीमार है। गीता मजदूरी करके बच्चों का पेट पालती थी और पति यूरिया खाद फैक्ट्री में चौकीदारी करता है। चार दिन पहले गीता को सांप ने काट लिया। गरीबी के चलते गीता का इलाज न हो सका जिससे उसकी मौत हो गई। मुफलिसी का आलम ये है कि अब एक मां का शव पिछले 3 दिनों से अंतिम संस्कार को तरस रहा है। मृतक गीता की 4 लड़कियां हैं जिनमें गुंजन (15), कंचन (12), आंचल (10) और सबसे छोटी बेटी राधा (8) साल की है, जो अब बेसहारा हो गईं हैं।

Mothers Dead body waits for cremation

ये सच्चाई उस प्रदेश की है जहां योगी मुख्यमंत्री हैं और प्रदेश में रामराज्य लाने का वादा करते हैं। मृतक गीता देवी की बेटी गुंजन का कहना है कि गरीबी के चलते इलाज के अभाव में उसकी मां की मौत हुई है और उसका परिवार इतना गरीब है कि अपनी मां का अंतिम संस्कार नहीं कर पा रहा है। पैसे के अभाव में 3 दिनों से मां का शव घर में ही रखा है। बेटी ने बताया कि उसके पिता जहां काम करते हैं। उस मालिक से भी बच्चों ने मदद की गुहार की, लेकन उसने भी अनसुनी कर दी।

Mothers Dead body waits for cremation

बेटी गुंजन का कहना है कि वो हाई स्कूल में पढ़ती है। बाकी छोटी बहनें पैसे न होने के कारण पढ़ नहीं पा रही हैं। उसका आरोप है कि जब उसने अपनी मां को जिला अस्पताल में भर्ती कराया तो उससे पैसे मांगे गए थे। तब उसके पिता ने मिल मालिक सुरेश अग्रवाल से सिर्फ एक हजार रुपए मांगे थे। लेकिन उसने देने से इनकार कर दिया। जबकि मिल मालिक के पास पैसे की कमी नहीं है और जबकि उसने इस महीने की पगार भी नहीं दी है। उस पगार से ही पापा पैसे मांग रहे थे लेकिन मालिक ने नहीं दिए। बच्ची का कहना है कि अगर कानून में जरा सी सच्चाई है तो उसे इंसाफ जरूर मिलेगा।

Mothers Dead body waits for cremation

उधर जिला प्रशासन की उदासीनता तो देखिए कि 3 दिनों से एक मां का शव घर में रखा अंतिम संस्कार को तरस रहा है लेकिन प्रशासन ने भी कोई मदद नहीं की। ऐसे में सवाल उठता है कि अब अनाथ बच्चों का क्या होगा वो किसके सहारे जिंदगी बसर करेंगे। आखिर अभी और कितने दिनों तक एक मां को अपने अंतिम संस्कार के लिए इंतजार करना पड़ेगा?

हालांकि जब इस मामले में एसडीएम सदर राम जी मिश्रा से बात की गई तो उनका कहना है कि इस मामले का संज्ञान उनको कुछ देर पहले हुआ है। हमने तहसीलदार और संबंधित थाना अधिकारी को मौके पर भेजा। उस परिवार को अंतिम संस्कार करने के लिए समझाया जा रहा है। अंतिम संस्कार के लिए भी परिवार को मदद की जाएगी और जैसा की आरोप मिल मालिक पर लग रहा है तो उसके लिए परिवार से लिखित रूप में शिकायत मांगी गई है। उसके बाद मिल मालिक को नोटिस भेजकर जवाब मांगा जाएगा।

Mothers Dead body waits for cremation

ऐसे में जब उस बच्ची ने मीडिया के सामने कहा था कि देखना है कानून में कितनी सच्चाई है। ये वाकई अब देखने वाली बात है क्योंकि जिस तरह से एसडीएम सहाब कह रहे हैं कि जब परिवार लिखित रूप में शिकायत देगा, उसके बाद नोटिस भेजकर उस मिल मालिक से जवाब मांगेंगे। जबकि खुलकर परिवार और बच्चे मिल मालिक सुरेश अग्रवाल पर पैसे न देने का आरोप लगा रहे हैं। बार-बार बच्चे यही कह रहे हैं कि लाला ने पैसे दे दिए होते तो उसकी मां आज जिंदा होती, वो सब अनाथ न हुए होते। जबकि उसका पिता पिछले 12 साल से इस मिल पर चौकीदार है।

आपको बता दें कि कुछ दिन पहले थाना जलालबाद क्षेत्र में भी एक महिला को सांप ने डस लिया था। जिसके बाद उसकी मौत हो गई थी। पिता पहले ही बच्चों को छोड़कर अपनी साली के साथ भाग चुका था। बच्चों के पास अपनी मां के अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं थे। बच्चों ने भीख मांगकर पैसे इकट्ठा कर मां का अंतिम संस्कार किया था। उस वक्त भी योगी के नेता पीड़ित परिवार के पास नहीं पहुंचे थे और न ही कोई अन्य राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने उन मासूमों की सुध ली थी, वहीं हालात आज के भी है।

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