पुत्र की प्राप्ति पर हिंदू रीति रिवाज से मुस्लिम महिला ने रखा जीवित्पुत्रिका व्रत

मिर्जापुर। वाराणसी के बेला गांव की मुस्लिम महिला ने भी बुधवार को जीवित्पुत्रिका का व्रत रखकर हिन्दू रीति रिवाज से पूजन अर्चन करके पुत्र की दीर्घायु की कामना की। महिला ने हिन्दू महिलाओं के साथ धर्मेश्वर महादेव मंदिर पर इकट्ठा होकर पूजन अर्चन किया। महिला का मानना था कि जीवित्पुत्रिका माता की कृपा से ही उसको पुत्र की प्राप्ति हुई है। इस समय वह छह महीने का हो गया है।

बेटे के दीर्घायु होने की प्रार्थना

बेटे के दीर्घायु होने की प्रार्थना

वाराणसी के अजगरा बेला गांव निवासी 26 वर्षीया सोनी पत्नी अनीस ने पुत्र की प्राप्ति का वरदान मांगा था। बेटे अरमान के छह माह के होने पर उन्होंने मन्नत को पूरा करने का मन बनाया। मन्नत को पूरा करने के लिए वह चुनार तहसील क्षेत्र के धरम्मरपुर गांव अपने मौसा नसीम खां के यहां जाकर गांव के धर्मेश्वर महादेव के मन्दिर के कुंए पर गांव की महिलाओं के साथ हिन्दू रीति रिवाज से विधिवत निर्जला व्रत का पालन करते हुए पूजा अर्चना किया। उन्होंने पुत्र की दीर्घायु की कामना की।

पुत्र प्राप्ति की मांगी थी मन्नत

पुत्र प्राप्ति की मांगी थी मन्नत

सोनी ने बताया कि पुत्र की कामना के लिए जीवित्पुत्रिका व्रत रखने की मन्नत मांगी थी। मन्नत पूरा होने पर उसे पूरा करने के लिए मौसा के घर आयी हूं। एक सवाल के जवाब में बताया कि मौसा पूजा के सभी सामाग्री फल,फूल इत्यादि सामानों का प्रबन्ध खुशी खुशी किए। ग्राम प्रधान श्वेता सिंह के प्रतिनिधि अजय सिंह व अन्य ग्रामीण, किशोर, सद्दीक, तैयफ ने बताया कि सोनी का घर पक्खोपुर मुगलसराय चन्दौली में है। बचपन में सोनी के माता पिता की मृत्यु हो गयी। उसी समय से सोनी अपने मौसा नसीम के यहां रहती थी। नसीम ने ही सोनी की परवरिश के साथ वाराणसी में शादी भी की है।

श्रद्धा एवं विश्वास के साथ पूजी गईं माता जीवित्पुत्रिका

श्रद्धा एवं विश्वास के साथ पूजी गईं माता जीवित्पुत्रिका

पुत्र प्राप्ति, पुत्र की दीर्घायु की कामना लिए महिलाओं ने बुधवार को निर्जला जीवित्पुत्रिका माता का श्रद्धा एवं विश्वास के साथ पूजन अर्चन किया। जिले के सार्वजनिक तालाब, कुंड और नदियों के तट पर मेले जैसा दृश्य रहा। माता का पूजन करने के लिए माताओं ने सुबह से ही निराजल ब्रत रखा। दिन के दूसरे पहर दउरी में प्रसाद लिए गाजे-बाजे के साथ थिरकते हुए श्रद्धालु जल तटों पर पहुंचे। पहले से तय स्थानों पर बने बेदी पर माता के चित्र रखा। इसके बाद प्रतीक रूप में माता के चित्र को पवित्र गंगा जल से स्नान कराया। इसके बाद चंदन, रोरी का टीका लगाकर माला-फूल, नवैद्य अर्पित करने के बाद दउरी का रोट, गुझिया आदि का प्रसाद अर्पित किया। इसके बाद पूजन का शुभारंभ हुआ। कुछ स्थानों पर पुरोहितों ने पूजन कराया। मन्नत मानने वाली महिलाओं ने अपने पुत्रों का डाल भी भरा।

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