Mathura Dalit बारात पर हिंसा! दुल्हन के भाई समेत 300 से ज्यादा लोगों पर केस दर्ज, कैसे क्या हुआ?
Mathura Dalit Baraat Violence: मथुरा जिले में 20 मई 2026 को एक दलित परिवार की शादी की बारात के दौरान हुई हिंसक झड़प ने पूरे इलाके में तनाव पैदा कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में 300 से अधिक लोगों पर केस दर्ज किए हैं, जिनमें दोनों पक्षों के 41 नामजद आरोपी शामिल हैं।
घटना हाईवे पुलिस थाना क्षेत्र के नरहौली गांव में हुई, जहां गोवर्धन क्षेत्र के भरना कलां गांव से आई बारात पर पथराव और मारपीट की घटनाएं सामने आईं। यह मामला जातीय संवेदनशीलता, शादी की रस्मों और ग्रामीण इलाकों में बढ़ते तनाव को एक बार फिर उजागर करता है।

घटना क्या थी?
भागवान दास की दो बेटियों 'लक्ष्मी और पूनम' की शादी नेमीचंद के बेटों अशोक और कुलदीप के साथ तय हुई थी। बारात 20 मई को शादी की रस्मों के लिए नरहौली गांव पहुंची। पुलिस के अनुसार, बारात जब गांव के ऊंची जाति वाले इलाके से गुजर रही थी, तभी विवाद शुरू हो गया। एक पक्ष का आरोप है कि बारात पर पत्थर फेंके गए, जिससे झड़प भड़क गई। वहीं दूसरे पक्ष ने दावा किया कि बारात के कुछ सदस्यों ने जाति-आधारित अपमानजनक गाने बजाए और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। जब स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई, तो बारात के सदस्यों ने कथित तौर पर उनके घरों में घुसकर तोड़फोड़ की और हमला कर दिया। इस दौरान एक बुजुर्ग महिला शांति उर्फ संतोषी देवी घायल हो गईं। उनकी बहू राधा ने थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस की कार्रवाई: 300+ पर केस
22 मई को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने बताया कि क्राइम ब्रांच इस पूरे मामले की जांच कर रही है। हाईवे पुलिस थाना के SHO शैलेंद्र सिंह के मुताबिक:
- राधा की शिकायत पर 17 नामजद (दलित समुदाय के, जिसमें दुल्हन का भाई भी शामिल) और 250 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया गया।
- दुल्हन के भाई दिलीप की शिकायत पर 24 नामजद और 20 अज्ञात पर केस।
- कुल मिलाकर 300 से ज्यादा लोगों पर विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए।
- पुलिसकर्मियों पर हमले के अलग मामले में 15 नामजद और 50 अज्ञात पर केस दर्ज।
पुलिस ने एहतियात के तौर पर आसपास के कई थानों से अतिरिक्त फोर्स तैनात कर दी है। दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।
दोनों पक्षों के आरोप
पहला पक्ष (बारात/दलित परिवार):
- बारात पर अनायास पत्थरबाजी की गई।
- शादी की खुशी में आए लोगों को निशाना बनाया गया।
- ऊंची जाति के लोगों ने जातीय भेदभाव दिखाते हुए हमला किया।
दूसरा पक्ष (स्थानीय ऊंची जाति के निवासी):
- बारात के सदस्यों ने जातिसूचक गाली-गलौज भरे गाने बजाए।
- आपत्ति जताने पर बारात ने हिंसा की और घरों में तोड़फोड़ की।
- महिलाओं और बच्चों को भी डराया-धमकाया गया।
पुलिस दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर रही है और किसी एक पक्ष को बचाने की बजाय निष्पक्ष जांच का दावा कर रही है।
घायलों की स्थिति और सबूत संग्रह
घायल बुजुर्ग महिला शांति देवी की हालत में सुधार हो रहा है। शुक्रवार शाम तक उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिलने की उम्मीद है। पुलिस ने CCTV फुटेज, मोबाइल वीडियो और सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप्स की जांच शुरू कर दी है। SHO शैलेंद्र सिंह ने कहा कि हिंसा में शामिल हर व्यक्ति की पहचान इन फुटेज से की जाएगी। घटना के तीनों मुकदमों की जांच SIT (Special Investigation Team) को सौंपे जाने की संभावना है, हालांकि अभी आधिकारिक घोषणा बाकी है।
मथुरा में जातीय तनाव
मथुरा और आसपास के क्षेत्रों में जातीय संवेदनशीलता हमेशा से रही है। शादी-ब्याह के मौकों पर छोटी-छोटी बातों से बड़े विवाद भड़क जाते हैं। इस घटना में डेटिंग ऐप या आधुनिक शादी नहीं, बल्कि पारंपरिक व्यवस्था में भी जातीय घर्षण सामने आया है।
सामाजिक कार्यकर्ता मानते हैं कि ऐसे मामलों में पुलिस को तुरंत और निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि छोटी घटना बड़े दंगे में न बदल जाए। पुलिस ने फिलहाल स्थिति को नियंत्रण में बताते हुए दोनों पक्षों को संयम बरतने की सलाह दी है।
आगे क्या?
- SIT गठन और वीडियो फुटेज की फॉरेंसिक जांच।
- नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी।
- घायलों को मुआवजा और सुरक्षा।
- लंबे समय में सामाजिक सद्भाव के प्रयास।
मथुरा प्रशासन ने दोनों समुदायों के बुजुर्गों और नेताओं से बातचीत शुरू कर दी है ताकि तनाव कम किया जा सके। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि जाति आधारित पूर्वाग्रह अभी भी भारतीय समाज के ग्रामीण हिस्सों में गहरी जड़ें जमाए हुए हैं। शादी जैसे पावन अवसर पर हुई हिंसा न केवल दो परिवारों बल्कि पूरे इलाके की शांति को प्रभावित करती है। पुलिस की जांच का इंतजार है। उम्मीद है कि निष्पक्ष और तेज कार्रवाई से दोषियों को सजा मिलेगी और माहौल सामान्य होगा।













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