Mahakumbh 2025: ICU वाटर एंबुलेंस से लेकर अस्पताल तक, जानें क्या है HMPV के खिलाफ महाकुंभ का मास्टर प्लान?
Mahakumbh 2025 OI Exclusive: महाकुंभ 2025 की तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन इस बार प्रयागराज में 13 जनवरी से शुरू होने वाले इस धार्मिक आयोजन के सामने Human Metapneumovirus (HMPV) की चुनौती भी है। यह वायरस हाल ही में चीन से भारत पहुंचा है, और इसके सात एक्टिव केस देश में दर्ज किए गए हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह घबराने की बात नहीं है, क्योंकि यह वायरस खतरनाक नहीं है।
इस आयोजन में 40 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। इतनी बड़ी भीड़ में स्वास्थ्य और सुरक्षा बनाए रखना एक बड़ा काम है। इसीलिए सरकार और प्रशासन ने कई खास इंतजाम किए हैं। डिप्टी कमांडेंट अनिल कुमार पाल ने वन इंडिया से खास बातचीत में बताया कि 47 सदस्यों वालीं 20 विशेष टीमें बनाई गई हैं। ये टीमें हर आपदा से निपटने में सक्षम हैं। आइए जानते हैं इन तैयारियों के बारे में...

मेला क्षेत्र में 13 अस्पताल और विशेष स्वास्थ्य सेवाएं
प्रयागराज CMO एके तिवारी ने HMPV वायरस को लेकर तैयारियों पर कहा कि हमारी तैयारी पूरी है। मेला क्षेत्र में 13 अस्पताल तैयार किए गए हैं। इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी अगर किसी को होती है, तो उसे हम अलग करेंगे। मास्क का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। HMPV से घबराने की कोई बात नहीं है, ये एक सामान्य वायरस है। बार-बार हैंड वॉश करें। पसर्नल हाईजिन पर विशेष ध्यान दीजिए। संक्रमित व्यक्ति की पहचान होने पर इलाके को सील कर इलाज किया जाएगा।
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सुरक्षा और यातायात: फ्लोटिंग कंट्रोल स्टेशन
संगम क्षेत्र में इस बार पहली बार 'फ्लोटिंग कंट्रोल स्टेशन' का इस्तेमाल होगा। यह नदी के यातायात को नियंत्रित करेगा और किसी भी दुर्घटना से बचाव सुनिश्चित करेगा।
- 4 किलोमीटर लंबी रिवर लाइन: इसमें 500 मीटर की बैरिकेटिंग पूरी हो चुकी है। यह नावों की आवाजाही को सुरक्षित और सुगम बनाएगी।
- 4000 नावों का संचालन: इन नावों की निगरानी के लिए जल पुलिस, पीएसी, और एनडीआरएफ की टीमें लगाई गई हैं।
पहली बार वाटर एंबुलेंस तैनात, ICU-वेंटिलेटर से लैस
गंगा नदी में पहली बार आईसीयू सुविधाओं से लैस 'वाटर एंबुलेंस' चलाई जाएगी। इसमें वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की सुविधा होगी। आइए जानें खासियत...

आईसीयू वॉटर एंबुलेंस की खासियतें
- आईसीयू सुविधा: एंबुलेंस में अस्पताल के आईसीयू जैसी सभी सुविधाएं, जैसे बेड, ऑक्सीजन सिलेंडर, और वेंटिलेटर उपलब्ध होंगे।
- जल मार्ग से अस्पताल पहुंचाने की सुविधा: दुर्घटनाग्रस्त लोगों को एंबुलेंस के माध्यम से नजदीकी अस्पताल तक पहुंचाया जाएगा।
- अत्याधुनिक उपकरण: एनडीआरएफ के पास उन्नत बोट और उपकरण हैं, जो बचाव कार्यों को अधिक कुशल बनाएंगे।
आपदा से निपटने के लिए 20 टीमें तैयार
डिप्टी कमांडेंट अनिल कुमार पाल ने वन इंडिया से खास बातचीत में बताया कि 47 सदस्यों वालीं20 विशेष टीमें बनाई गई हैं। ये टीमें हर आपदा से निपटने में सक्षम हैं। आइए जानते हैं कौन-कौन सी...

- वाटर रेस्क्यू टीम: आस्ट्रेलिया, श्रीलंका और जापान से प्रशिक्षण प्राप्त गोताखोरों की विशेष टीम नदी में हर स्थिति को संभालने के लिए तैयार है।
- सीबीआरएन टीम: केमिकल बॉयलॉजिकल रेडिएशन न्यूक्लियर आपदाओं से निपटने के लिए तैनात है।
- सीएसएसआर टीम: कोलैब्स स्ट्रक्चर सर्च एंड रेस्क्यू टीम आपदा के समय मलबे में फंसे लोगों को बचाने में मदद करेगी।
- एफएफआर टीम: मेडिकल फस्ट रिस्पॉडर भी तैयार।
मेडिकल ऑब्जर्वेशन रूम की सुविधा
प्रयागराज रेलवे मंडल ने महाकुंभ के लिए रेलवे स्टेशनों पर मेडिकल ऑब्जर्वेशन रूम तैयार किए हैं। यहां डॉक्टर 24x7 मौजूद रहेंगे। ECG मशीन, ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर जैसी प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इन ऑब्जर्वेशन रूम में डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ 24 घंटे मौजूद रहेंगे, जो 8 घंटे की शिफ्ट में ड्यूटी करेंगे। इसमें हर ऑब्जर्वेशन रूम के लिए 15 स्टाफ नर्स, 12 फार्मासिस्ट, 12 हॉस्पिटल अटेंडेंट और 15 हाउस कीपिंग असिस्टेंट डयूटी पर लगाए गए हैं। रेलवे हॉस्पिटल के डॉक्टर्स ड्यूटी के हिसाब से ऑब्जर्वेशन रूम में अपनी सेवाएं देंगे।

महाकुंभ में 10,000 मरीजों का अब तक उपचार
25 बेड वाला अरैल स्थित यह सब सेंट्रल हॉस्पिटल हाईटेक सुविधाओं से लैस है। अभी तक 10 हजार से भी अधिक मरीजों का उपचार किया जा चुका है। यहां पर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की तैनाती भी कर दी गई है। सबसे खास बात यह है कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि महाकुंभ के कोने कोने में श्रद्धालुओं को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। डॉक्टर गौरव दुबे ने बताया कि महाकुंभ में एक-एक श्रद्धालु के स्वास्थ्य का ध्यान रखा जा रहा है। महाकुंभ नगर में यहां सेंट्रल हॉस्पिटल में सिर्फ साल के पहले ही दिन 900 मरीजों की ओपीडी की गई।
आपदा प्रबंधन के लिए मास्टर प्लान
महाकुंभ में प्रशिक्षित और सक्षम फोर्स को तैनात कर दिया गया है। अब क्विक रिस्पॉन्स के साथ ही जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (IRS) का गठन किया गया है। इसके तहत, मंडल, जनपद और मेला स्तर पर जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं। मेला क्षेत्र में किसी भी आपात स्थिति या आपदा की स्थिति पैदा होने पर रिस्पांसिबिल टीम एक्टिव हो जाएगी।
घाटों और दुर्घटना संभावित इलाकों में विशेष निगरानी
- प्रमुख घाट: वीआईपी घाट, सरस्वती घाट, अरैल, दारागंज, नाग वासकी और परेड जैसे इलाकों में विशेष निगरानी होगी।
- अन्य स्थान: रेलवे फ्लाईओवर, अस्थाई पुल, रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन जैसे क्षेत्रों पर भी टीमों को तैनात किया गया है।
प्रशासन की अपील
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे भीड़भाड़ से बचें, मास्क पहनें और गहरे पानी में न उतरें। घाटों और नदी के यातायात नियमों का पालन करें।
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