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Maha Kumbh 2025: पंचांग के 2 पैसे से ₹7,500 करोड़ तक का ऐतिहासिक सफर, जानें 143 साल बाद कैसे बदला महाकुंभ?

Maha Kumbh 2025: प्रयागराज का महाकुंभ सदियों से आस्था और परंपरा का प्रतीक रहा है। 2025 में होने वाले महाकुंभ के लिए प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 7,500 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है, और इसमें 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है।

यह आयोजन इतिहास का सबसे बड़ा महाकुंभ बनने जा रहा है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि महाकुंभ की शुरुआत से अब तक इस आयोजन ने कैसे प्रगति की है? आइए, इसके ऐतिहासिक सफर पर नजर डालते हैं...

Maha Kumbh 2025

आस्था की डुबकी का खाका

  • 1882: टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब भारत की जनसंख्या करीब 22.5 करोड़ थी, उस समय कुंभ के आयोजन पर केवल 20,288 रुपये खर्च हुए थे। मौनी अमावस्या पर लगभग 8 लाख श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया था। उस समय यह खर्च आज के 3.6 करोड़ रुपये के बराबर माना जा सकता है।
  • 1894: जनसंख्या 23 करोड़ के करीब थी और 10 लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया। इस आयोजन पर 69,427 रुपये खर्च हुए, जो आज के हिसाब से 10.5 करोड़ रुपये होते।
  • 1906: 25 लाख श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई। आयोजन की लागत 90,000 रुपये थी, जो आज लगभग 13.5 करोड़ रुपये के बराबर है।
  • 1918: इस कुंभ में 30 लाख लोगों ने भाग लिया। उस समय की 1.4 लाख रुपये की लागत को आज के 16.4 करोड़ रुपये के बराबर आंका जा सकता है।
  • 2013: कुंभ मेले में उत्तर प्रदेश सरकार ने लगभग ₹1,300 करोड़ खर्च किए थे।
  • 2019: इस वर्ष के अर्धकुंभ मेले में राज्य सरकार ने लगभग ₹4,200 करोड़ का बजट निर्धारित किया था। यह लागत कुंभ 2013 की तुलना में तीन गुना अधिक रही।
  • 2025 (आगामी महाकुंभ): इस महाकुंभ के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने लगभग ₹7,500 करोड़ का बजट आवंटित है, जिसमें टेंट सिटी की स्थापना और अन्य सुविधाएं शामिल हैं। खास बात यह है कि यह राशी 2019 के अर्धकुंभ से लगभग 78 फीसदी ज्यादा है। अब तक 3462 करोड़ की मंजूरी दी जा चुकी है।

पंचांग के दो पैसे से कुंभ का सफर

1942 के कुंभ में एक दिलचस्प घटना घटी। भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो ने महात्मा मदन मोहन मालवीय के साथ कुंभ क्षेत्र का दौरा किया। लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ देखकर वायसराय ने पूछा कि इस आयोजन का प्रचार किस तरह किया गया। मालवीय जी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया,' सिर्फ दो पैसे।" उन्होंने समझाया कि दो पैसे का पंचांग हर भक्त को त्योहारों की जानकारी देता है और श्रद्धालु अपने धर्म के प्रति आस्था के कारण स्वतः ही कुंभ में आते हैं। वायसराय इस जवाब से प्रभावित हुए।

2025: अब तक का सबसे भव्य आयोजन

2025 का महाकुंभ, जिसे अब तक का सबसे बड़ा आयोजन कहा जा रहा है, 7,500 करोड़ रुपये की लागत से आयोजित किया जाएगा। यह राशि 1882 के खर्च से हजारों गुना अधिक है। 40 करोड़ श्रद्धालुओं के संगम में स्नान करने की उम्मीद के साथ, यह आयोजन दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन बन सकता है।

2025 महाकुंभ: 4 हजार से ज्यादा संस्थाओं को भूमि आवंटित

महाकुंभ में आने वाले अखाड़ों, महामंडलेश्वर, खालसा, दंडीवाड़ा, आचार्यवाड़ा और खाकचौक जैसे प्रमुख समूहों को पहले ही भूमि आवंटन किया जा चुका है। प्रयागवाल और नई संस्थाओं का आवंटन भी 31 दिसंबर तक पूरा हो जाएगा। सीएम योगी के निर्देशों के बाद इस प्रक्रिया में तेजी आई है। अब तक 4268 संस्थाओं को भूमि मिल चुकी है, जिनमें प्रमुख समूहों को अलग-अलग संख्या में भूमि आवंटित की गई है...

  • अखाड़े और उनके अनुगामी: 19
  • महामंडलेश्वर: 460
  • खालसा: 750
  • दंडीवाड़ा: 203
  • आचार्यवाड़ा और खाकचौक: 300-300
  • प्रयागवाल: 450

टेंट और सजावट का कार्य तेज

जिन संस्थाओं को भूमि आवंटित हो चुकी है, वे अपनी परंपरा के अनुसार टेंट लगाने और सजावट में जुटी हैं। झूंसी क्षेत्र में चेकर्ड प्लेटें बिछाने से लेकर लाइटिंग और साइनेज लगाने का काम तेजी से चल रहा है। जूना अखाड़ा, आवाहन अखाड़ा, और अग्नि अखाड़ा जैसे प्रमुख समूहों का छावनी प्रवेश भी पूरा हो चुका है। मेला क्षेत्र को पूरी तरह सजाने-संवारने का कार्य 1 जनवरी तक पूरा कर लिया जाएगा।

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फायर फाइटिंग का सुरक्षा कवच

महाकुम्भ के दौरान बड़े टेंट्स और ऊंचे निर्माणों में आग की घटनाओं से निपटने के लिए एडब्ल्यूटी तैनात किए गए हैं। एडवांस्ड फीचर्स से लैस ये वाहन 35 मीटर की ऊंचाई और 30 मीटर की क्षैतिज दूरी तक आग बुझाने में सक्षम हैं। महाकुंभ में आग पर नियंत्रण के लिए 351 से अधिक अग्निशमन वाहन और 2071 दमकलकर्मियों की तैनाती की गई है।

  • 50 अस्थायी फायर स्टेशन
  • 20 फायर पोस्ट
  • 50 फायर वॉच टावर

हर सेक्टर में दमकलकर्मी 24/7 तैनात रहेंगे। अखाड़ों में 5000 विशेष फायर एक्सटिंग्विशर लगाए गए हैं।

2013, 2019 के अनुभवों से सीखे सबक

2013 में महाकुम्भ के दौरान 612 फायर घटनाएं हुई थीं, जिनमें 6 लोगों की जान गई थी। 2019 में सरकार ने बेहतर तैयारी से इन घटनाओं को घटाकर 55 कर दिया और कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ। 2025 में इन घटनाओं को "जीरो" करने की योजना पर काम किया जा रहा है।

महाकुंभ को पूरी तरह सुरक्षित बनाने की कोशिश

मेला क्षेत्र में प्रवेश के लिए तीन स्तरीय चेकिंग और खुफिया तंत्र सक्रिय किया गया है। जगह-जगह चेकिंग प्वाइंट्स बनाए गए हैं।

  • खुफिया दस्ते की तैनाती: संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए खुफिया दस्ते पूरी तरह सक्रिय हैं।
  • साइबर सुरक्षा: देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए साइबर पेट्रोलिंग भी तेज कर दी गई है।

महाकुंभ: आस्था, परंपरा और इतिहास का प्रतीक

प्रयागराज का महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह भारत की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। हर महाकुंभ के साथ, न केवल इसकी भव्यता बढ़ी है, बल्कि यह विश्व पटल पर भारत की पहचान को भी सुदृढ़ करता आया है।

(इनपुट- टीओआई व अन्य मीडिया सोर्स)

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