IPS नवनीत सिकेरा का किस्सा: 'सामने खड़ी थी 'मौत', पहली बार गोली चलाने में कांप रहे थे हाथ', फिर यूं बची जान?
IPS Navneet Sikera First Firing: ''उत्तर प्रदेश पुलिस में बतौर आईपीएस ज्वाइन करने के बाद जब पहली बार किसी पर गोली चलाने का मौका आया तो देखा कि सामने 'मौत' खड़ी थी...। मेरे हाथ-पांव थर-थर कांप रहे थे...। मेरी साइड लगातार गोलियां दागीं जा रही थीं...। मैंने हिम्मत जुटाकर अपने पुलिस करियर का पहला फायर करना चाहा तो मुझसे बंदूक चली ही नहीं...' बंदूक, वर्दी और आईपीएस का यह किस्सा नवनीत सिकेरा का है, जो उन्होंने खुद ने शेयर किया है।
आईपीएस नवनीत सिकेरा वर्तमान में उत्तर प्रदेश पुलिस में एडीजी पद पर सेवाएं दे रहे हैं। यूपी पुलिस में ये सुपर कॉप, एनकाउंटर स्पेलिस्ट और भौकाल आईपीएस के रूप में भी जाने जाते हैं। यूट्यूब चैनल यूपी तक से बातचीत में नवनीत सिकेरा ने अपने परिवार, पुलिस सर्विस और यूपीएससी की तैयारी से जुड़ी कई बातें शेयर की हैं।
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आईपीएस नवनीत सिकेरा ने बताया कि आईएएस बनने के बाद हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में हथियार चलाने की ट्रेनिंग भी मिली। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ट्रेनर से सीखने को मिला कि फायरिंग कैसे किया जाता है? रियल सर्विस लाइफ में जब फायरिंग करने की नौबत आती है कि तब गोली चलाने या नहीं चलाने का फैसला लेने का वक्त कम मिलता है। ऐसा ही मेरे साथ हुआ।
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आईपीएस नवनीत सिकेरा ने पहली बार गोली चलाने का अनुभव शेयर करते हुए जगह का जिक्र किए बिना बताया कि एक बार फील्ड पोस्टिंग के दौरान स्थिति ऐसी बन गई कि सामने से लगातार गोलियां दागी जा रही थीं। पुलिस को भी जवाबी फायर करना था। मैं पहली बार गोली चला रहा था तो हाथ कांपने लगे। पास खड़ा गर्नर मेरी मनोदशा समझ गया और मेरी पीठ पर जोर से धक्का मारकर बोला-'साहब गोली चलाओ नहीं तो मारे जाओगे' जब मैंने पहली बार फायर किया तो गर्नर बोल उठा-'लो!साहब की भी बोहनी हो गई'
आईपीएस नवनीत सिकेरा एनकाउंटर स्पेशलिस्ट
पहली बार गोली नहीं चला सकने वाले आईपीएस नवनीत सिकेरा बाद में उत्तर प्रदेश पुलिस में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट बन गए। दावा किया जाता है कि इन्होंने यूपी के मुजफ्फरनगर, मेरठ व लखनऊ समेत विभिन्न जिलों में पोस्टिंग के दौरान करीब 60 एनकाउंटर किए हैं। भौकाल वेब सीरीज भी इन्हीं की असली जिंदगी की कहानी पर आधारित है। गैंगस्टर रमेश कालिया का एनकाउंटर करने तो ये पुलिसकर्मियों के साथ बाराती बनकर पहुंच गए थे।

पिता गांव के पहले पढ़े-लिखे शख्स
नवनीत सिकेरा ने बताया कि मेरे पिता आज दुनिया में नहीं हैं। उनकी बहुत याद आती है। पिता गांव के पहले पढ़े-लिखे शख्स थे। मां कभी पढ़ नहीं पाईं। पिता पहले निजी स्कूल में टीचर थे। फिर सरकारी कर्मचारी के रूप में सेवाएं दी। मां ने जिंदगी का फलसला सिखाया जबकि पिता से सीखा कि जिंदगी में कड़ी मेहनत के दम पर कामयाब कैसे होना है?

आईएएस नवनीत सिकेरा की जीवनी
- नवनीत सिकेरा का जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोज़ाबाद जिले के शिकोहाबाद में 22 अक्टूबर 1971 को मनोहर सिंह यादव के घर हुआ।
- यूपी कैडर के 'सुपर कॉप' कहे जाने वाले नवनीत ने एटा जिले के आल बॉयज स्कूल से हाई स्कूल पास किया। इसके बाद दिल्ली के हंसराज कॉलेज में एडमिशन लेने पहुंचे। लेकिन कॉलेज में उनको अंग्रेजी ना आने के कारण एडमिशन फॉर्म नहीं दिया गया।
- फार्म ना मिलने पर उन्होंने हार नहीं मानी और खुद से किताबें खरीद कर पढ़ाई की। अपनी मेहनत-लगन से उन्होंने एक ही बार में आईआईटी जैसा एग्जाम क्रैक कर दिखाया।
- आईपीएस नवनीत सिकेरा ने आईआईटी रूड़की से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन पूरी की। फिर पहले ही प्रयास में यूपीएससी एग्जाम क्रैक कर आईपीएस बन गए।
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