पूर्वांचल में मोदी-योगी की जोड़ी का सपा गठबंधन ने लिया कड़ा इम्तिहान, जानिए कहां कौन पड़ा भारी
लखनऊ, 14 मार्च: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने भले ही प्रचंड बहुमत हासिल किया हो, लेकिन पूर्वांचल में पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजों से एक अलग तस्वीर सामने आई। समाजवादी पार्टी गठबंधन ने वाराणसी, मिर्जापुर और आजमगढ़ संभाग के जिलों में काफी ताकत दिखाई। आजमगढ़ और गाजीपुर जिलों में बीजेपी का रुख साफ हो गया है। बीजेपी गठबंधन की सीटें 41 से घटकर 29 रह गईं, जबकि सपा गठबंधन को 31 सीटें मिलीं, जो पिछले चुनाव के दोगुने से भी ज्यादा हैं। बसपा की जमीन पूरी तरह से टूट चुकी थी,है जबकि कांग्रेस के ज्यादातर उम्मीदवार खाता नहीं खोल पाए और अपनी जमानत तक नहीं बचा सके।

पूर्वांचल में हुआ मोदी-योगी की जोड़ी का कड़ा इम्तिहान
चुनावी नतीजों पर नजर डालें तो सपा की बड़ी सफलता का राज था भाजपा से आमने-सामने की लड़ाई और आजमगढ़ और गाजीपुर में जातिगत समीकरणों को साधने की कवायद। समाजवादी गठबंधन को मुस्लिम वोटों के एकजुट ध्रुवीकरण से फायदा हुआ। पिछड़ों के वोट बैंक को यादव वोटों से मिला दिया। बलिया और जौनपुर में भी सपा ने अपने प्रदर्शन में सुधार किया। मऊ में एक सीट पर मुश्किल से कमल खिल सका, जबकि सपा-सुभासपा गठबंधन को तीन सीटों पर सफलता मिली। सपा गठबंधन ने जौनपुर में पांच और बलिया में तीन सीटें जीती थीं। वहीं, वाराणसी के साथ-साथ पड़ोसी जिलों मिर्जापुर, सोनभद्र और चंदौली में बीजेपी को क्लीन स्वीप करने के पीछे बसपा का बेस वोट बीजेपी को सपोर्ट करने वाला बताया जा रहा है। बलिया में बसपा सिर्फ एक सीट पर सिमट गई।

अनुप्रिया और ओम प्रकाश राजभर का बढ़ा कद
इस चुनाव में सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर और अपना दल-एस प्रमुख अनुप्रिया पटेल का सियासी कद बढ़ गया है. दोनों ने साबित कर दिया है कि उनकी बिरादरी के वोटों में उनकी गहरी पैठ है. अपना दल-एस को पिछले चुनाव में नौ जीत मिली थी। इस बार 12 जीते। सुभासपा के विधायकों की संख्या भी चार से बढ़कर छह हो गई है। एसपी के बेहतर प्रदर्शन में सुभाएसपी की भूमिका भी मानी जा रही है। इसके अलावा सुभाष के माध्यम से एसपी को बाहुबली मुख्तार अंसारी परिवार को साथ लाने का भी लाभ मिला।

पूर्वांचल ने बाहुबलियों को नकारा, बेटे बढाएंगे विरासत
पूर्वांचल के मतदाताओं ने बाहुबलियों को नकार दिया है। आगरा जेल में बंद ज्ञानपुर से चार बार विधायक रहे विजय मिश्रा को न सिर्फ हार का सामना करना पड़ा है बल्कि वह तीसरे नंबर पर खिसक गए हैं। जौनपुर की मल्हनी सीट से चुनाव लड़ने वाले पूर्व सांसद धनंजय सिंह भी सपा के लकी यादव से हार गए। हालांकि, मुख्तार अंसारी का शासन बरकरार रहा। मुख्तार के बेटे अब्बास अंसारी और भतीजे सुहैब अंसारी चुनाव जीतने में कामयाब रहे।

पूर्वांचल में लड़ी 71 महिलाएं जीतीं सिर्फ दो
पूर्वांचल में आधी आबादी पर लगा सियासी ग्रहण अभी नहीं हट पाया है। इस बार दस जिलों की 61 सीटों पर 71 महिलाएं मैदान में थीं, लेकिन दो ही जीत सकीं। इसमें भाजपा के केतकी सिंह ने बलिया के बांसडीह में सपा के मजबूत नेता रामगोविंद चौधरी को हराया। जौनपुर की मछलीशहर सीट से सपा की रागिनी सोनकर ने जीत दर्ज की है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के काशी प्रवास-रोड शो और पूर्वांचल में चुनाव प्रचार के बाद भी कांग्रेस के अधिकतर उम्मीदवार अपनी जमानत नहीं बचा सके। वाराणसी की सभी आठ सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे या चौथे स्थान पर रहे। इनमें से सात को जब्त कर लिया गया। दस हजार से ज्यादा वोट सिर्फ अजय राय, डॉ राजेश मिश्रा और राजेश्वर सिंह पटेल को ही मिल सके।

पूर्वांचल में सपा से मिली कांटे की टक्कर
बीजेपी के लिए पूर्वांचल की लड़ाई इतनी आसान भी नहीं थी। पूर्वांचल के जिलों पर गौर करें तो मोदी ने जिस वाराणसी में तीन दिन प्रचार किया वहां बीजेपी ने सभी आठ सीटें अपने पक्ष में किया लेकिन आजमगढ़ में सपा ने दस सीटें जीतकर बीजेपी से हिसाब बराबर कर लिया। इसके अलावा बलिया में भाजपा को चार, सपा-सुभासपा को चार, बसपा को एक सीट पर जीत मिली है। मऊ में तीन सीट सपा को और एक सीट बीजेपी के खाते में गई है। गाजीपुर ने भी भाजपा को काफी निराश किया है। यहां पर सपा गठबंधन सभी सीटें जीतने में कामयाब रहा। सोनभद्र में चारों सीटों पर बीजेपी, मिर्जापुर में सभी पांच सीटें भाजपा की झोली में गईं। जौनपुर में सपा-सुभासपा को पांच, भाजपा को चार सीटें जबकि चंदौली में भाजपा को तीन, सपा-गठबंधन को एक सीट पर जीत मिली है।












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