'मस्जिद मौज-मस्ती की जगह नहीं,' BJP के तंज पर भड़के इमरान मसूद, अखिलेश-डिंपल का किया बचाव
संसद के मानसून सत्र के चलते समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) दिल्ली में हैं। सपा प्रमुख के संसद भवन के पास एक मस्जिद के हालिया दौरे को लेकर राजनीतिक बवाल मच गया है। भाजपा नेताओं ने पार्टी पर एक धार्मिक स्थल के अंदर राजनीतिक बैठक करने का आरोप लगाया है। इस पूरे मामले पर अब कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का बयान आया है।
दरअसल, मस्जिद में बैठक को लेकर विवाद तब और बढ़ गया जब इस दौरे की तस्वीरें सामने आईं, जिनमें डिंपल यादव सहित सपा नेता मस्जिद के अंदर बैठे दिखाई दे रहे थे।

भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने दावा किया कि अखिलेश यादव ने एक धार्मिक स्थल को 'एक अनौपचारिक सपा कार्यालय' में बदल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सपा सांसद डिंपल यादव ने इस दौरे के दौरान 'अनुचित कपड़े पहने' थे।
उन्होंने कहा कि, 'अखिलेश यादव मस्जिद गए थे। वह मस्जिद संसद भवन के सामने स्थित है। सपा सांसद नदवी वहां के इमाम हैं। हम उनकी भी निंदा करते हैं- एक मस्जिद के अंदर राजनीतिक बैठक क्यों आयोजित की गई?'
सिद्दीकी ने डिंपल यादव पर तीखे व्यक्तिगत आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि, 'डिंपल यादव के सिर पर दुपट्टा नहीं था।' यह मस्जिद के नियमों के खिलाफ है और दुनिया भर में इस्लामी भावनाओं को ठेस पहुंचाता है।' उन्होंने आगे कहा कि, 'हम उनके खिलाफ FIR दर्ज कराएंगे। अगर यही हाल रहा तो हम 25 जुलाई को उसी मस्जिद में एक सभा भी करेंगे, जिसकी शुरुआत राष्ट्रगीत से होगी और अंत राष्ट्रगान के साथ होगा।'
भाजपा नेता ने सपा पर मस्जिद को 'मस्ती और मौज-मस्ती' का अड्डा बनाने का आरोप लगाया और यहां तक आरोप लगाया कि इस यात्रा के दौरान 'राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों' पर चर्चा हुई।
उपमुख्यमंत्री ने लगाया संविधान के उल्लंघन का आरोप
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी सपा पर संवैधानिक मानदंडों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए कहा, 'समाजवादी पार्टी हमेशा संविधान का उल्लंघन करती है। भारतीय संविधान कहता है कि हम धार्मिक स्थलों का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए नहीं कर सकते।' उन्होंने कहा, 'उन्हें संविधान में विश्वास नहीं है।'
समाजवादी पार्टी ने भाजपा के आरोपों का कड़ा खंडन किया। अखिलेश और डिंपल यादव दोनों ने किसी राजनीतिक बैठक के दावों को खारिज कर दिया और इस विवाद को राष्ट्रीय मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया।
वायरल तस्वीरों पर डिंपल यादव की प्रतिक्रिया
वायरल तस्वीरों पर प्रतिक्रिया देते हुए डिंपल यादव ने कहा कि, 'ऐसा कुछ नहीं है। इमाम नदवी ने हमें आमंत्रित किया था, इसलिए हम गए। भाजपा गलत सूचना फैला रही है। हम वहां किसी बैठक में नहीं गए थे। भाजपा असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए यह सब कह रही है।' सरकार जनता से जुड़े मुद्दों पर बात ही नहीं करना चाहती।'
मैनपुरी की सांसद ने बिहार में एसआईआर, पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अहम मुद्दों पर सवालों से बचने के लिए भाजपा की आलोचना की और इन्हें 'बेहद अहम मुद्दे' बताया।
अखिलेश यादव ने किया पलटवार
अखिलेश यादव ने भी पलटवार करते हुए भाजपा पर राजनीतिक फायदे के लिए धर्म का हथियार बनाने का आरोप लगाया। इस घटना के बारे में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि, 'मैं आपका शुक्रिया अदा करता हूं, लेकिन आप भी भाजपा के जाल में फंस गए हैं।'
उन्होंने कहा कि, 'ये धार्मिक लोग मेरे साथ खड़े हैं, मैं बस एक ही बात जानता हूं। आस्था लोगों को जोड़ती है, चाहे उनका धर्म कोई भी हो। कोई भी आस्था जो लोगों को एक साथ लाती है। हम उसके साथ खड़े हैं। यही बात भाजपा को परेशान करती है। वे एकता नहीं चाहते, वे चाहते हैं कि दूरी बनी रहे।'
सपा नेताओं ने की भाजपा की टिप्पणी की निंदा
अन्य सपा नेताओं ने भी भाजपा की टिप्पणी की निंदा की। सपा सांसद जिया उर रहमान बर्क ने इस विवाद को निराधार बताया। 'कोई राजनीतिक बैठक नहीं हुई। क्या हमारे पास संसद या सांसदों के आवासों में बैठकें करने के लिए जगह नहीं है?' उन्होंने कहा, 'वह मस्जिद में बैठक क्यों करेंगे?' डिंपल यादव की आलोचना पर उन्होंने कहा, 'डिंपल जी ने अपना सिर ढका हुआ था- हो सकता है कि तस्वीर खींचते समय उनका दुपट्टा फिसल गया हो।'
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी BJP पर साधा निशाना
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी इसी तरह की राय दोहराई और भाजपा की टिप्पणियों को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि, 'मस्जिद के इमाम भी सांसद हैं। अगर वह मस्जिद में बैठे तो क्या बात है? भाजपा को शर्म आनी चाहिए। डिंपल यादव ने भारतीय संस्कृति के अनुसार कपड़े पहने थे। भाजपा नेता मानसिक रूप से दिवालिया हो गए हैं। वे महिलाओं का अपमान कर रहे हैं।'












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