कौन हैं IAS Rinku Singh और वकीलों के सामने क्यों लगाने लगे उठक-बैठक? चुनौतियों से भरी रही है जिंदगी
IAS Rinku Singh Profile: शाहजहांपुर में एसडीएम के पद पर तैनात आईएएस रिंकू सिंह चर्चित अधिकारी रहे हैं। वह इससे पहले भी कई बार चर्चा में रह चुके हैं। सिंह वही अधिकारी हैं, जिन्होंने साल 2008 में करोड़ों का भ्रष्टाचार केस उजागर किया था। इस वजह से उन पर जानलेवा हमला भी हुआ था।
शाहजहांपुर में बतौर एसडीएम अपनी ड्यूटी के पहले ही दिन उनका सामना धरने पर बैठे वकीलों से हुआ। वह वहां प्रदर्शन कर रहे वकीलों को समझाने गए थे, लेकिन खुद ही कान पकड़कर उठक-बैठक लगाने लगे। इस दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि परिसर में साफ-सफाई ठीक से नहीं हो रही है।

वकीलों की शिकायत के बाद लगाई उठक-बैठक
आईएएस रिंकू सिंह ने बताया कि तहसील परिसर में जब वह विजिट कर रहे थे, तो कुछ लोग खुले में पेशाब कर रहे थे। कुछ स्कूली बच्चे बिना काम के घूम रहे थे। खुले में पेशाब करने वालों को हमने उठक-बैठक लगाने के लिए कहा था, ताकि ऐसी गलती दोबारा न करें। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी वकीलों ने इसके बाद मुझसे कहा कि परिसर में गंदगी है और इसके लिए अधिकारी जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि इस आधार पर मुझे भी उठक-बैठक लगाना होगा। इसलिए मैंने ऐसा किया।
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IAS Rinku Singh Rahi पर हो चुका है जानलेवा हमला
आईएएस रिंकू सिंह साल 2008 में यूपी के मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात थे। इस दौरान उन्होंने छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में हुए करोड़ों के भ्रष्टाचार का खुलासा किया था। इसके बाद 2009 में जब वह एक सुबह बैडमिंटन खेल रहे थे, तो कुछ हमलावरों ने उन पर 6-7 गोलियां दागी थीं। इस जानलेवा हमले में उनकी एक आंख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई और उन्हें एक महीने से ज्यादा वक्त तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा था। हालांकि, ठीक होने के बाद वह वापस काम पर लौटे और तब से अब तक मिली सभी जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वाह कर रहे हैं।
संघर्ष भरी जिंदगी रही है IAS Rinku Singh की
आईएएस रिंकू सिंह की जिंदगी काफी संघर्षों भरी रही है। उनका जन्म अलीगढ़ के एक निम्न मध्यवर्गीय परिवार में हुआ। अपनी मेहनत के दम पर पहले उन्होंने NIT जमशेदपुर से मेटलर्जी में बीटेक किया है। गेट (GATE) परीक्षा में उनकी ऑल इंडिया रैंक 17 थी। रिंकू शुरुआत से ही पढ़ने-लिखने में काफी होशियार थे। साल 2004 में उन्होंने प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा पास की थी। साल 2009 में जब उन पर हमला हुआ था, तब वह जिला समाज कल्याण पदाधिकारी के पद पर तैनात थे। बाद में उन्होंने साल 2022 में दिव्यांग कोटे से यूपीएससी की परीक्षा पास की और फिलहाल एसडीएम के पद पर तैनात हैं।
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