कौन हैं वे अफसर जिनकी पेंशन रोक रही है राजस्थान सरकार? सूची में रिटायर्ड आईएएस का भी नाम
राजस्थान में भ्रष्टाचार के मामलों पर सरकार ने बड़ा एक्शन प्लान शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे में सख्ती का संदेश देते हुए एक सेवानिवृत्त IAS अधिकारी समेत दस रिटायर्ड अफसरों की पेंशन पर रोक लगाने की प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है। यह कदम उन अफसरों के खिलाफ उठाया जा रहा है, जिन पर भ्रष्टाचार या गंभीर अनियमितताओं के आरोप साबित हुए हैं।
इतना ही नहीं, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा पकड़े गए सात अफसरों पर अब बाकायदा मुकदमा चलेगा। सीएम ने अभियोजन की मंजूरी जारी कर दी है। यह फैसला राज्य में ईमानदारी की संस्कृति को बढ़ावा देने और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।

सरकार के स्तर पर हुए ताजा रिव्यू में यह भी सामने आया कि कुछ अफसरों ने ड्यूटी से गायब रहते हुए भ्रष्टाचार में संलिप्तता दिखाई। ऐसे दो अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय हो चुका है। वहीं, जिन अफसरों पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित थी, उन पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है।
मुख्यमंत्री ने 38 मामलों का परीक्षण करते हुए स्पष्ट किया कि दोषियों को किसी भी तरह की राहत नहीं दी जाएगी। इनमें कई केस ऐसे थे, जहां अफसरों के खिलाफ अनुशासनहीनता, वित्तीय अनियमितताओं और घोटालों की जांच पहले से चल रही थी।
सरकार ने 11 अफसरों के खिलाफ CCA नियम 17 के तहत कार्रवाई तय की है, जबकि दो अन्य पर CCA नियम 16 लगेगा। इन नियमों के तहत अब उनकी सालाना वेतनवृद्धि भी रोक दी जाएगी।
खास बात यह है कि एक रिटायर्ड IAS अधिकारी की पेंशन रोकने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। इससे पहले नौ रिटायर्ड अफसरों की पेंशन फाइल पर मंजूरी दी जा चुकी है। सरकार की इस सख्ती से राज्य के नौकरशाही हलकों में खलबली मच गई है।
हालांकि, विभागीय जांच के दो मामलों में कुछ अफसरों को राहत भी दी गई है, लेकिन बाकी मामलों में मुख्यमंत्री स्तर पर पहले से तय की गई कार्रवाई को बरकरार रखा गया है। अधिकारियों को साफ संदेश दिया गया है कि भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में किसी भी सिफारिश या दबाव का असर नहीं होगा।












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