Exclusive: योगी के भव्य शपथ ग्रहण समारोह का आंखों देखा हाल
पेश है योगी आदित्यनाथ मंत्रिपरिषद के भव्य शपथ ग्रहण समारोह का आंखों देखा हाल।
लखनऊ: लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी इकाना स्टेडियम में आप सभी का स्वागत है। इस स्टेडियम में आज उत्तर प्रदेश के नये राजनीतिक इतिहास को बनते हुए देखा जा सकता है। तो पेश है योगी आदित्यनाथ मंत्रिपरिषद के भव्य शपथ ग्रहण समारोह का आंखों देखा हाल।

दृश्य एक
योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद का शपथ लेनी थी, लेकिन इंतजाम को लेकर वे फिक्रमंद थे। व्यवस्था में कोई कमी नहीं देखना चाहते थे। शुरू में वे कुछ देर के लिए मंच पर आये। अभी अतिथियों की कुर्सियां भरी नहीं थीं। योगी मंच के इस कोने से उस कोने तक जा कर दूर से व्यवस्था का जायजा ले रहे थे। समारोह स्थल उत्साहित लोगों के शोर से गूंज रहा था। योगी ने उत्साही लोगों को बैठ जाने का संकेत किया। फिर उन्हें कुछ कमी दिखी। वे मंच से उतर कर व्यवस्था संभालने लगे। प्रधानमंत्री समारोह स्थल पर आ गये थे। लेकिन मंच पर नहीं आये थे। योगी आदित्यनाथ के पास कुछ समय था। जब प्रबंधन उनके मन के अनुरूप हो गया तो वे फिर मंच पर लौट आये। जब मंच पर गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आये तो योगी आदित्यनाथ ने कुर्सी से उठ कर खुद उनकी आगवानी की।

दृश्य दो
योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बगल में बैठे थे। राज्यपाल की अनुमति से शपथ ग्रहण शुरू हुआ। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए योगी आदित्यनाथ के नाम की घोषणा होने ही वाली थी। उद्घोषक उनका नाम पुकारने ही वाले था कि कैमरा योगी पर फोकस हुआ। उनकी उंगलियां कांप रहीं थीं। वे कुरसी से उठने का उपक्रम करने लगे। चेहरे भावनाओं का अतिरेक था। हो भी क्यों नहीं। उन्होंने उत्तर प्रदेश में इतिहास जो रचा है। प्रचंड जीत और भावी जिम्मेवारियों का भावावेश था। नाम के उदघोषणा में चंद सेकेंड की देरी हुई तो योगी फिर अपनी कुर्सी पर बैठ गये। शपथ लेने के बाद जब योगी प्रधानमंत्री मोदी के पास पहुंचे तब एक आत्मीय़ दृश्य उपस्थिति हुआ। योगी जब हाथ जोड़ कर प्रधानमंत्री मोदी के पास आये तो उन्होंने आगे बढ़ कर उनके दोनों हाथ थाम लिये और विशेष स्नेह दिखाया।

दृश्य तीन
समारोह में दिल जीतने वाल पल भी आया। विधानसभा चुनाव हारने वाले केशव प्रसाद मौर्य ने जब उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली तब उनकी भी भावनाएं मन के गागर से छलक रहीं थीं। शपथ लेने के बाद मौर्य प्रधानमंत्री मोदी के पास हाथ जोड़ कर पहुंचे। फिर वे प्रधानमंत्री का पैर छूने के लिए झुके तो प्रधानमंत्री ने लपक कर उन्हें दोनों हाथ थाम लिये। दिल जीतने के लिए सम्मान से बढ़ तक कोई दूसरा इनाम नहीं। मंच पर मौर्य का मुस्कुराता हुआ चेहरा 2024 में भाजपा के शौर्य का विस्तार करेगा।

दृश्य चार
पूर्व आइएएस अधिकारी अरविंद कुमार शर्मा ने पंद्रहवें नम्बर पर शपथ ली। उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया। अरविंद शर्मा की गिनती एक योग्य प्रशासक के रूप में रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उनके शासकीय कौशल के प्रशंसक रहे हैं। 1988 बैच के अरविंद शर्मा गुजरात कैडर के आइएएस अधिकारी रहे हैं। नरेन्द्र मोदी जब मुख्यमंत्री थे तब अरविंद शर्मा ने उनके साथ काम किया था। वे मऊ जिले के रहने वाले हैं और भूमिहार समाज से आते हैं। पूर्वांचल में भूमिहार समाज के सबसे बड़े नेता मनोज सिन्हा अब जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल हैं। माना जाता है कि अब अरविंद शर्मा को मंत्री बना पूर्वांचल में मनोज सिन्हा की कमी को पूरा किया गया है। गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़ में सपा गठबंधन को काउंटर करने के लिए अरविंद शर्मा को आगे किया गया है। वैसे तीसरे नम्बर पर शपथ लेने वाले सूर्य प्रताप शाही भी भूमिहार समाज से ही आते हैं।

दृश्य पांच
बनारस के रहने वाले दयाशंकर मिश्र दयालु ने राज्य मंत्री, स्वतंत्र प्रभार के रूप में शपथ ली। वे किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। फिर भी उन्हें मंत्री बनाया गया। 2017 में कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए थे। वे शिक्षक रहे हैं और उनकी पहचान एक कुशल वक्ता की है। समाज के सभी वर्गों में उनका सम्मान है। इस बार बनारस से नीलकंठ तिवारी को मंत्री नहीं बनाया गया। नीलकंठ तिवारी काशी विश्वनाथ कॉरिडोर प्रोजेक्ट से जुड़े थे। लेकिन भविष्य की राजनीति सोच उनकी जगह नये चेहरे दयाशंकर मिश्र को मौका दिया गया। इसी तरह लोकप्रियता और सामाजिक समीकरण के हिसाब से चार और वैसे नेताओं को मंत्री बनाया गया है जो किसी सदन के सदस्य नहीं हैं।

दृश्य छह
पश्चिमी उत्तर (गाजियाबाद) प्रदेश के रहने वाले नरेन्द्र कश्यप ने राज्य मंत्री, स्वतंत्र प्रभार के रूप में शपथ ली है। वे राज्यसभा सांसद और एमएलसी रहे हैं। लेकिन फिलहाल वे किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। माना जाता है कि भाजपा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट के अलावा कश्यप (निषाद समुदाय की एक उपजाति) समुदाय में भी पैठ बनाना चाहती है। राज्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले जसवंत सैनी भी किसी सदन सदस्य नहीं हैं। वे सहारनपुर के रामपुर मनिहारन के रहने वाले हैं। माना जा रहा है कि उन्हें, भाजपा छोड़कर गये धर्म सिंह सैनी की काट में मंत्री बनाया गया है। इसी तरह जेपीएस राठौर और दानिश आजाद को बिना विधायक-एमएलसी के मंत्री बनाया गया है। दानिश रजा को मोहसिन रजा की जगह मंत्री पद से नवाजा गया है। वे लखनऊ विश्वविद्यालय में एबीवीपी के छात्र नेता रहे हैं। जेपीएस राठौर भी छात्र नेता रहे हैं। उन्होंने आइआटी बीएचयू से बीटेक और एमटेक की डिग्री हासिल की है। बीएचयू छात्र संघ के अध्यक्ष रहे हैं।
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