'देश सबसे पहले' गिरफ्तारी के बाद अब्दुल रहमान का परिवार आया सामने, पिता ने बताया क्या कहकर घर से निकला?
Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या में राम मंदिर पर आतंकी हमले की बड़ी साजिश को सोमवार (03 मार्च ) को नाकाम कर दिया गया। गुजरात एटीएस, फरीदाबाद एसटीएफ और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की संयुक्त टीम ने हरियाणा के फरीदाबाद में छापेमारी कर एक संदिग्ध आतंकी को गिरफ्तार किया है। यह शख्स यूपी के अयोध्या का रहने वाला है।
गिरफ्तारी आतंकी ने ISI के इशारे पर साजिश राम मंदिर पर हमले की साजिश रची। पकड़ा गया आरोपी की पहचान अब्दुल रहमान (19), निवासी फैजाबाद (अयोध्या) यूपी के रूप में हुई है।

जानकारी के मुताबिक आईएसआईएस-खुरासान ने आतंकी रहमान का ब्रेनवॉश कर राम मंदिर पर हमला करने के लिए तैयार किया था। अब्दुल रहमान को फरीदाबाद से जिस वक्त गिरफ्तार किया उस वक्त उसके पास से दो हैंड ग्रेनेड बरामद किए गए, जिन पर किसी कंपनी या देश का कोई निशान नहीं था।
दावा किया जा रहा है कि अब्दुल रहमान का ब्रेनवॉश कर उसे अयोध्या में मस्जिद की जगह बन रहे मंदिर को लेकर धार्मिक भावनाएं भड़काते हुए हमले के लिए तैयार किया। अब्दुल बीते कई महीने से इस आतंकी संगठन के संपर्क में था और सोशल मीडिया के जरिये संपर्क करता था। अब इस पूरे मामले में अब्दुल रहमान के माता-पिता सामने आए हैं। जिन्होंने अपने बेटे को निर्दोष बताया है।
Ram Mandir: परिवार का दावा - 'झूठा फंसाया जा रहा है'
गिरफ्तार युवक की मां और पिता ने दावा किया है कि उनका बेटा निर्दोष है और उसे झूठा फंसाया जा रहा है। मां ने कहा, "मेरे बच्चे में ऐसा कुछ नहीं है। उसे झूठा फंसाया जा रहा है। उसने कभी ऐसा कुछ नहीं किया। यह सब झूठ है। हमें इस बारे में कुछ नहीं पता। उसने कभी ऐसा कुछ नहीं कहा...वह सिर्फ बैटरी से चलने वाला रिक्शा चलाता था। वह दिल्ली गया था...पुलिस ने हमें कुछ नहीं बताया। वे उसे (उसके पति को) अपने साथ ले गए। मैं बस इतना कहना चाहती हूं कि मेरे बच्चे को मेरे पास वापस भेज दो। उसने कुछ नहीं किया है। उसे झूठा फंसाया जा रहा है। वह बीमार था और उसके दिल में छेद था। दान से जरूरी पैसे इकट्ठा करने के बाद उसका ऑपरेशन भी हुआ था। हमारा सिर्फ एक बेटा और तीन बेटियां हैं। हमारे पास और कोई नहीं है।"
Ram Mandir: पिता ने सुनाई गिरफ्तारी की पूरी कहानी
पिता ने बताया कि उनका बेटा 1 मार्च को अपने दोस्त से मिलने के लिए फरीदाबाद गया था। उन्होंने कहा, "मैं उसे जाने नहीं देना चाहता था, क्योंकि ईद नजदीक थी और हमें पैसों की जरूरत थी। वह बैटरी से चलने वाला रिक्शा चलाता था। 2 मार्च को उसने मुझे फोन किया, लेकिन दोपहर 12 बजे उसका फोन बंद हो गया। मैंने उसके साथ गए व्यक्ति से संपर्क किया, लेकिन बाद में पुलिस की टीम घर पहुंची और मेरे बेटे के बारे में पूछताछ की। सुबह पुलिस स्टेशन बुलाकर मुझसे फिर सवाल किए गए, फिर मुझे वापस भेज दिया गया।"
'देश सबसे पहले, लेकिन सच्चाई सामने आनी चाहिए'
पिता ने कहा, "अगर मेरा बेटा दोषी है, तो उसे सजा मिलनी चाहिए। लेकिन इस बात की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए कि कहीं उसे झूठा तो नहीं फंसाया गया। उसके दोस्तों ने उसे किसी साजिश में तो नहीं उलझा दिया। वह ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं था, सिर्फ़ 10वीं तक पढ़ाई की थी। अगर उसने कुछ गलत किया है, तो हम देश के साथ हैं, लेकिन सच्चाई सामने आनी चाहिए।"












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