आशिक के लिए हत्यारी मां ने की ऐसी हैवानियत कि कांप उठे लोग! कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा, रूह कंपा देगी ये घटना
UP News: उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में अपने तीन मासूम बच्चों की कातिल मां को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। यह फैसला एडीजे-3 जस्टिस सैफ अहमद की अदालत ने सुनाया है। कोर्ट ने इस अपराध को 'दुर्लभ से दुर्लभतम की श्रेणी में माना।
तीन मासूमों को नदी में डुबोकर मारने के मामले में कोर्ट ने हत्यारन मां को फांसी और प्रेमी को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही दोनों पर एक-एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है।
यह दिल दहला देने वाली घटना फफूंद थाना के बरौआ (औरैया कोतवाली क्षेत्र) गांव की है, जहां एक महिला ने अपने तीन बच्चों को सेंगुर नदी में फेंक दिया था। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई थी।

ननिहाल चलने की बात कहकर बच्चों को घर से लेकर गई
दरअसल, महिला अपने चारों बच्चों को ननिहाल चलने की बात कहकर घर से लेकर गई थी। इसके बाद ननिहाल न जाकर बच्चों को सेंगर नदी पुल पर ले गई। यहां उसने चारों बच्चों को कुछ खाने को दिया। जैसे ही बच्चे बेहोशी की हालत में दिखे प्रियंका चारों बच्चों को एक-एक करके पानी में डुबोने लगती है।
पूछताछ में स्वीकार किया अपराध
घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी महिला को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान उसने अपने अपराध को स्वीकार भी कर लिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए, इस पर पुलिस और न्यायपालिका दोनों ने विशेष ध्यान दिया।
क्या था पूरा मामला?
रिपोर्ट के मुताबिक, औरैया जिले के फफूंद थाना क्षेत्र के बरौआ गांव की रहने वाली प्रियंका की शादी इटावा के लुईया गांव निवासी अवनीश से हुई थी। इस शादी से उनके चार बच्चे हुए- सोनू, आदित्य, माधव और मंगल। लेकिन करीब चार साल पहले प्रियंका के जीवन में एक बड़ा हादसा हुआ जब उनके पति अवनीश की करंट लगने से मौत हो गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पति की मौत के बाद प्रियंका ने अपने चचेरे देवर आशीष के साथ रहने लगी थी, दूसरी ओर उसे समाज के तानों का भी सामना करना पड़ रहा था। आखिर में बदनामी से परेशान होकर अपने मायके बरौआ लौट आई। कुछ समय बाद आशीष भी वहीं आकर रहने लगा। समाज से तानों ने यहां भी उसका पीछा नहीं छोड़ा। इन बातों से परेशान होकर दोनों ने उस इलाके को छोड़ने का फैसला लिया और औरैया शहर में किसी दूसरी जगह एक किराए का कमरा ले लिया।
यहां आकर आशीष ने घर चलाने के लिए एक सैलून में काम करना शुरू किया, लेकिन घर के हालात और बच्चों की जिम्मेदारी को लेकर रोजाना विवाद होने लगे। बात इतनी बिगड़ गई कि आशीष नशे में धुत होकर प्रियंका और बच्चों से मारपीट करने लगा। सबसे डरावनी बात ये थी कि वह बार-बार प्रियंका से कहता कि, 'तुम अपने बच्चों को मार डालो, तभी मैं तुम्हें साथ रखूंगा।' इन्हीं मानसिक दबावों, प्रताड़ना और टूट चुके मन की हालत में प्रियंका ने वो खौफनाक कदम उठाया और फिर वह मां से हत्यारन बनने का मन बना चुकी थी।
बच्चों को नदी में डुबोने की इस घटना में आदित्य, माधव और मंगल की मौत हो गई। घटना को अंजाम देने के बाद प्रियंका वापस बरौआ गांव लौट गई थी। कुछ ग्रामीणों ने शोर सुनकर स्थिति को भांप लिया और तुरंत मौके पर पहुंच गए। उन्होंने सबसे बड़े बेटे सोनू को किसी तरह बाहर निकाल लिया। बाकी दो बच्चों को भी निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं।
बेटे की गवाही से खुला राज, मां ने नदी में धकेले थे तीनों भाई
घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रियंका को मौके पर ही पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। वहीं उसका प्रेमी आशीष कुछ समय बाद औरैया शहर से गिरफ्तार किया गया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि तीनों बच्चों की मौत डूबने से हुई थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस पूरे मामले का खुलासा खुद जिंदा बचे बेटे सोनू ने किया।
इस मामले पर कोर्ट ने क्या कहा?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट सुनवाई के दौरान महिला के खिलाफ पेश किए गए सबूतों और गवाहों को संज्ञान में लेते हुए उसे दोषी ठहराया। जस्टिस सैफ अहमद ने सजा सुनाते हुए कहा कि, 'यह अपराध न सिर्फ निर्मम है, बल्कि समाज के लिए खतरे की घंटी भी है। बच्चों की हत्या जैसा अपराध किसी भी मानवीय संवेदना के खिलाफ है। ऐसे मामलों में कठोरतम सजा ही एकमात्र विकल्प है, जिससे अपराधियों में डर बना रहे।'
कोर्ट ने यह भी कहा कि समाज में इस तरह के अपराधों को लेकर स्पष्ट संदेश जाना चाहिए कि कानून ऐसे कृत्यों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करता।












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