इलाहाबाद: अपना दल को मनाने के लिए केशव मौर्य ने किया हाईवोल्टेज ड्रामा

इलाहाबाद की जिस सोरांव विधानसभा से भाजपा और अपना दल के बीच रार पैदा हुई थी उसे खत्म करने का प्रयास हो रहा है। गठबंधन के बीच आई खाई पाटने के लिए भाजपा प्रत्याशी की उम्मीदवारी वापस ले ली गई है।

इलाहाबाद। संगम नगरी इलाहाबाद की जिस सोरांव विधानसभा सीट से भाजपा और अपना दल गठबंधन के बीच रार पैदा हुई थी अब उसे खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। गठबंधन के बीच आई खाई पाटने के लिए सोरांव से भाजपा प्रत्याशी की उम्मीदवारी वापस ले ली गई है। oneindia ने इस मुद्दे पर पड़ताल की तो कई चौकाने वाले तथ्य सामने आये। अपने प्रत्याशी का टिकट काटना भाजपा की मजबूरी थी और यह राजनीतिक दृष्टिकोण से जरूरी भी था। क्योंकि मौजूदा हालात में भाजपा सोरांव से खुद तो डूबती और गठबंधन प्रत्याशी जमुना सरोज को भी डुबो देती।

रात में ही छिन गई थी उम्मीदवारी

रात में ही छिन गई थी उम्मीदवारी

oneindia की पड़ताल से ये बात सामने आई है कि यूपी के बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने भाजपा प्रत्याशी सुरेन्द्र चौधरी को एक दिन पहले रात में ही चुनाव से पीछे हो जाने का निर्देश दिया था। साथ ही यह कहा कि जमुना प्रसाद सरोज से मिलकर वे अपना समझौता कर लें। पार्टी हाईकमान ने गौहनिया और वाराणसी की सीटों पर अपना दल प्रत्याशी के आने से अपनी कमजोर स्थिति पर चिंता व्यक्त की थी और विवाद की जड़ खत्म करने का निर्देश दिया था। जिसके बाद ही केशव ने अपने नजदीकी सुरेन्द्र को पीछे हटने का निर्देश दिया ।

समझौते के दौरान मचा दोनों दलों में बवाल

समझौते के दौरान मचा दोनों दलों में बवाल

केशव मौर्य के निर्देशानुसार सुरेन्द्र चौधरी ने अद प्रत्याशी जमुना प्रसाद सरोज से समझौते के लिए पहल की और फोन से जमुना के बेटे शनि से संपर्क किया। भाजपा कार्यालय में वार्ता शुरू हुई तो सुरेन्द्र चौधरी द्वारा चुनाव में खर्च हुये पैसे की भरपाई कर समझौता करने का प्रस्ताव रखा गया। वहींं दोनों में बात तो बन गई लेकिन रकम को लेकर विवाद गहरा गया। सुरेन्द्र के समर्थक बड़ी रकम को लेकर दबाव बना रहे थे। पैसे की इसी मांग को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि मारपीट हो गई। शनि भाजपा कार्यालय से भागता हुआ अपना दल कार्यालय पहुंच गया और देखते ही देखते विवाद बवाल में बदल गया।

जीत के लिए दोनों दलों को आना होगा साथ

जीत के लिए दोनों दलों को आना होगा साथ

वहीं, इस बवाल से भाजपा की थू-थू शुरू हुई तो केशव को भी आधिकारिक तौर पर भाजपा-अद गठबंधन बचाने और सुरेन्द्र का टिकट काटने का मौका मिल गया। सुरेन्द्र का बागी होकर कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल होना, लोगों की सिमपथी लेना सब स्क्रिप्ट का ही हिस्सा था। बहरहाल इस पूरे घटनाक्रम में अभी भी सुरेन्द्र के साथ समझौता करना जमुना के लिये मजबूरी होगी। क्योंकि सुरेन्द्र जमुना के साथ में प्रचार करने नहीं निकले तो कमल की जीत की संभावना बढ़ेगी। ये भी पढ़ें: केंद्रीय मंत्री ने राहुल-अखिलेश को बताया हंसों का जोड़ा, जो चुनाव बाद हो जाएंगे अलग

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