'बजट के आंकड़ों से ज्यादा जरूरी हैं, जानें कुंभ में कितनों ने जान गंवाई', अखिलेश यादव ने योगी पर बोला हमला
Akhilesh Yadav On Budget 2025: समाजवादी पार्टी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार पर महाकुंभ 2025 की तैयारियों को लेकर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाए बिना ही वापस लौट रहे हैं और सरकार के पास महाकुंभ में हुई मौतों और घायलों का सही आंकड़ा नहीं है।
अखिलेश यादव ने कहा, "कुंभ में हुई मौतों का आंकड़ा बजट के आंकड़ों से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। सरकार यह तक नहीं बता पा रही कि कुंभ में कितने लोग मरे, लापता हुए या घायल हुए। सरकार द्वारा दी गई मृतकों की संख्या गलत है।"

उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, "यह सरकार कहती है कि हम हिंदूवादी पार्टी हैं, लेकिन हिंदुओं के सबसे बड़े पर्व कुंभ को भी सही तरीके से नहीं आयोजित कर पा रहे हैं। क्या यही है 'विकसित भारत' की परिभाषा, जहां लोग भगदड़ में मारे जाएं?"
अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि वीआईपी लोगों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गईं, जबकि आम श्रद्धालुओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री और गृह मंत्री ने कुंभ में स्नान किया, बड़े उद्योगपतियों और खास हस्तियों को न्योता दिया गया, लेकिन आम जनता के लिए कोई सही इंतजाम नहीं किया गया।
अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "महाकुंभ के लिए जो बजट आया है, वह किसके लिए है? आपकी सरकार के शहरों और सड़कों में इतनी क्षमता नहीं है कि इतने श्रद्धालुओं को संभाल सकें। आप वाराणसी को क्योटो में बदलना चाहते हैं, क्या उसमें लाखों श्रद्धालुओं को संभालने की क्षमता है? शहर पूरी तरह से जाम हो गए हैं। आपके शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर कैसा है? आपने स्मार्ट इंडिया और स्मार्ट सिटी बनाने का वादा किया था, तो क्या इंतजाम किए हैं?"
बजट को लेकर दिया बड़ा बयान
इससे पहले, समाजवादी पार्टी के सांसदों ने आज लोकसभा में केंद्रीय बजट 2025 के दौरान वॉकआउट किया। अखिलेश यादव ने महाकुंभ के दौरान मची भगदड़ में हुई मौतों को लेकर सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार मृतकों की संख्या को सही तरीके से नहीं बता पा रही है।
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अखिलेश यादव ने कहा, "महाकुंभ 12 साल में एक बार आता है। हमारे लिए महाकुंभ में मारे गए लोगों का आंकड़ा बजट के आंकड़ों से ज्यादा महत्वपूर्ण है। सरकार यह नहीं बता पा रही कि कितने लोग मरे, लापता हुए या घायल हुए। सरकार द्वारा दी गई मौतों की संख्या गलत है।"
उन्होंने यह भी कहा, "यह सरकार कहती है कि हम हिंदूवादी पार्टी हैं, लेकिन हिंदुओं के इस सबसे बड़े पर्व के लिए भी वे इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं। क्या यही है 'विकसित भारत' की परिभाषा, जहां लोग भगदड़ में मारे जाएं?"
कब मची थी कुंभ में भगदड़?
यह भगदड़ बुधवार को मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान हुई, जिसमें 30 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। इस घटना की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया गया है, जो इस त्रासदी के कारणों और परिस्थितियों की जांच करेगा और एक महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।












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