MLC चुनाव में हार के बाद नए सिरे से संगठन को दुरुस्त करना अखिलेश के लिए चुनौती, जानिए
लखनऊ, 13 अप्रैल: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद अब सपा को एक और करारा झटका लगा है जिससे उसकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। विधान परिषद के चुनाव में सपा को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली है ऐसे में अब अखिलेश यादव को संगठन को नए तरीके से दुरुस्त करना होगा। आजमगढ़ में सपा के उम्मीदवार को सिर्फ 356 वोट मिलना इस बात का प्रमाण है कि संगठन के भीतर कलह मची हुई है। आजमगढ़ की सभी सीटें और मऊ की सीटों को मिला दें तो सपा के पास इस इलाके में 13 विधायक हैं लेकिन यहां वोट सिर्फ नाममात्र के ही मिले हैं यानी सपा के उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सपा के भीतर कितनी चुनौतियां हैं।

वरिष्ठ नेताओं से अपील के बाद भी हरकत में नहीं आया संगठन
समाजवादी पार्टी के सूत्रों की माने तो एमएलसी का चुनाव शुरू होते ही उम्मीदवारों ने संगठन के नेताओं से इस बात की अपील की थी बड़े नेता और पदाधिकारी क्षेत्र में जाकर काम नहीं कर रहे हैं लिहाजा इसको समय रहते देखना होगा। जिलों से यह सुझाव भी नेतृत्व की तरफ भेजा गया कि स्थानीय विधायकों की बैठक कर एक रणनीति बनायी जाए ताकि उसपर काम किया जा सके। चुनाव के दौरान ज्यादातर नेता क्षेत्र में जाने से कतराते रहे। जिसका असर अब खराब नतीजों के रूप में सामने आया है।
40 वर्षों के बाद बीजेपी को मिला है पूर्ण बहुमत
यूपी विधानसभा चुनाव में शानदार जीत के बाद, भाजपा ने लगभग 40 वर्षों में पहली बार विधान परिषद में बहुमत हासिल करके इतिहास दर्ज किया है। एक सप्ताह पहले भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए, सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि पार्टी के लिए 36 सीटें जीतना महत्वपूर्ण है ताकि उनकी सरकार के विकास के एजेंडे को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ाया जा सके। इन 36 सीटों में से भाजपा ने नौ निर्विरोध जीती हैं। यदि पार्टी सभी 36 सीटें जीत जाती है, तो आप मान सकते हैं कि उत्तर प्रदेश विधान परिषद में उसके पास दो-तिहाई बहुमत होगा और विकास योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने में कोई समस्या नहीं होगी।

100 में 66 सीटों पर बीजेपी का कब्जा
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बहुमत मिलने के ठीक एक महीने बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक और इतिहास रच दिया है। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में पहली बार भगवा पार्टी ने बहुमत हासिल किया है। भाजपा ने अब विधान परिषद की 100 में से 66 सीटों पर कब्जा कर लिया है। इससे योगी सरकार की ताकत और बढ़ गई है। योगी सरकार अब दोनों सदनों से अपने दम पर कानून पारित करवा सकती है। वहीं सपा की करारी हार विपक्षी दल की मुश्किलें और बढ़ा सकती है. समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विपक्ष के नेता अखिलेश यादव, जो पहले से ही विद्रोह का सामना कर रहे हैं, को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।












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