Vaibhav Suryavanshi Struggle:वैभव सूर्यवंशी कितने भाई हैं,क्या करते हैं पिता,'भाई' ने किया पुराने दिनों को याद
Vibhav Suryavanshi: अपने बच्चों के सपनों को पूरा करने के लिए पिता अक्सर बहुत कुछ कर गुजरते हैं। वैभव सूर्यवंशी के मामले में भी यही हुआ,उनके पिता संजीव सूर्यवंशी ने अपने बेटे को क्रिकेटर बनते देखने का सपना देखा था। वन इंडिया हिंदी से ख़ास बातचीत में वैभव के परिजन चंद्रदीप कुमार ने संघर्ष की कहानी बताई।
बिहार के समस्तीपुर जिले के एक छोटे से गांव के किसान होने के बावजूद, संजीव अपने बेटे को अपनी उपलब्धियों से कहीं आगे बढ़ते देखना चाहते थे। अपने गृहनगर में उचित प्रशिक्षण सुविधाओं और कोचिंग की कमी ने उन्हें नहीं रोका, वैभव की सफलता के लिए वह कुछ भी करने को तैयार थे।

चंद्रदीप कुमार ने बताया कि वैभव सूर्यवंशी 3 भाई हैं। बड़े भाई उज्जवल सूर्यवंशी, दूसरे नंबर पर वैभव सूर्यवंशी और तीसरे नंबर पर आशीर्वाद सूर्यवंशी है। चाचा (संजीव सूर्यवंशी) अपने सपने को वैभव में साकार करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने अपना जीवन वैभव का कैरियर बनाने में समर्पित कर दिया।
खेती करने के साथ ही छोटा सा ज्वैलरी शॉप चलाते थे, बाद में वैभव के कैरियर को फोकस करते हुए शॉप पर बैठना छोड़ दिया। इसके बाद वैभव के बड़े भाई उज्जवल सूर्यवंशी ने दुकान संभाली और चाचा अब घर पर ही रहते हैं। वैभव को तो काफी कम उम्र से ही क्रिकेट खेलने में माहिर हो गया था। चाचा (संजीव सूर्यवंशी) ने उसे महज़ 10 साल की उम्र में बेहतर क्रिकेट प्रशिक्षण के लिए पटना भेजने का फैसला।
गांव से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर प्रशिक्षण केंद्र था। वित्तीय बाधाओं ने उन्हें पीछे नहीं रोका, वैभव के प्रशिक्षण के लिए उन्होंने अपनी ज़मीन बेच दी। बेटे का भविष्य बनाने के लिए अपना सब कुछ लगा दिया, रोज़ाना उसका लंच पैक करते और यह सुनिश्चित करते की बेटे की ट्रेनिंग में कोई कमी नहीं आ जाए।
क्रिकेट के प्रति वैभव के समर्पण ऐसा था कि वह बड़े लड़कों के साथ अभ्यास करने लगा, नेट प्रैक्टिस में रोज़ान 600 से ज़्यादा गेंदों का सामना करते हुए खुद को खेल के लिए तैयार किया। ग़ौरतलब है कि 14 साल की छोटी सी उम्र में ही वैभव सूर्यवंशी ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में धूम मचाते हुए एक आशाजनक क्रिकेट का चमका सितारा बन रहे हैं।
अनुभवी अंतर्राष्ट्रीय गेंदबाजों के खिलाफ उनका प्रदर्शन असाधारण से कम नहीं है, जिससे यह विश्वास करना मुश्किल हो जाता है कि वह सिर्फ एक स्कूली छात्र हैं। यह शुरुआती सफलता उनके पिता द्वारा वैभव के प्रशिक्षण के लिए अपने सब कुछ दांव पर लगा देने परिणाम है। आज परिवार के लोगों के साथ जिला, प्रदेश और देश से लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वैभव का डंका बज रहा है।
वैभव ने आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए मात्र 35 गेंदों पर शतक बनाकर इतिहास रच दिया, जो लीग में किसी भारतीय खिलाड़ी द्वारा बनाया गया सबसे तेज़ शतक है। गुजरात टाइटन्स के गेंदबाजों के खिलाफ उनकी निडर बल्लेबाजी ने उन्हें सचिन तेंदुलकर और रोहित शर्मा जैसे क्रिकेट दिग्गजों से प्रशंसा दिलाई। आज की तारीख में वैभव की बल्लेबाज़ी के हर एक क्रिकेट प्रेमी मुरीद हो चुके हैं।












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