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Oi Exclusive IPL 2025: ’पिता का पूरा नहीं हुआ सपना, बेटे ने भरी उड़ान’,Vaibhav Suryavanshi का कैसे गुज़रा बचपन

Oi Exclusive IPL 2025, Vaibhav Suryvanshi Coach Interview: "चुपचाप मेहनत करो, सफलता को शोर मचाने दो।" कुछ ऐसी ही कहानी है बिहार के युवा क्रिकेट खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी की, जिन्होंने बहुत ही कि उम्र आज अपनी एक अलग पहचान बना ही है। वन इंडिया हिंदी की टीम बिहार के समस्तीपुर जिला पहुंची, जहां वैभव का बचपन गुज़रा।

आज हम आपको बताएंगे कि किस तरह से बचपन गुज़ारा, अभ्यास से लेकर IPL डेब्यू तक के सफर के बारे में भी बताएंगे। नीचे दिए वीडियो में आप उस नेट मैदान को देख सकते हैं, जहां वैभव अभ्यास करता था। वन इंडिया हिंदी से ख़ास बातचीत में वैभव के परिवार वालों ने कई खट्टी मीठी यादों को साझा किया।

वैभव सूर्यवंशी ने रचा इतिहास: वैभव के चाचा राजीव सूर्यवंशी ने बताया कि किक्रेट यात्रा समस्तीपुर जिले के ताजपुर प्रखंड के मोतिपुर गांव के छोटे से मैदान से शुरू हुई। आज देश में वैभव की पहचान बन रही है, कड़ी मेहनत का फल मिला, उन्होंने पहले मैच में छक्का लगाकर अपनी क्रिकेट सफर की शुरुआत की।

पारिवारिक सहयोग और शुरुआती संघर्ष: वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी भी एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी थे, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वे अपने सपने पूरे नहीं कर पाए। उन्होंने यह सपना वैभव के पिता को बताया, जिन्होंने वैभव की क्रिकेट संबंधी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अथक प्रयास किया। परिवार के प्रयासों ने उनके घर में गर्व और खुशी ला दी है।

वैभव के पिता ने वित्तीय चुनौतियों के बावजूद उनकी प्रतिभा को निखारने में अहम भूमिका निभाई। वे वैभव को नियमित रूप से अभ्यास के लिए ले जाते थे और व्यक्तिगत रूप से उन्हें कोचिंग भी देते थे। बाद में वैभव समस्तीपुर अकादमी से शुरुआत करने के बाद पटना में जेनेक्स अकादमी में शामिल हो गए। उनकी लगन का नतीजा तब मिला जब उन्हें बिहार क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड से मान्यता मिली।

उपलब्धियां और मान्यता: राजीव सूर्यवंशी (वैभव के चाचा) ने कहा कि वैभव की प्रतिभा को राहुल ड्रविड ने पहचाना और राजस्थान रोयाल ने नीलामी में उसे 1 करोड़ 10 लाख में खरीद एक अहम स्थान दिया। इसके साथ ही वैभव के हौसले बढ़े और उन्होंने महज़ 14 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी क्षमताओं को प्रदर्शित किया।

वैभव सूर्यवंशी के बड़े भाई चंद्रदीप कुमार ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ खेल को मैनेज करना थोड़ा मुश्किल तो था, लेकिन यह कह सकते हैं कि वह शिक्षा हासिल कर लेगा। खेल ने अलग न अलग पहचान दिलाई है। वैभव बचपन से ही लगनशील था, रोजाना घंटों अभ्यास करने से उसने कम उम्र में ही अपनी क्षमता दिखा दी। वैभव की सफलता को देखकर परिवार को गर्व है कि उनकी मेहनत रंग लाई।

युवा उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा: चंद्रदीप युवाओं को अपनी प्रतिभा को निखारने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, चाहे वह खेल हो या शिक्षा। उनका मानना है कि लगन और कड़ी मेहनत से ही सफलता मिलती है, जैसा कि वैभव के साथ हुआ। परिवार को उम्मीद है कि वैभव जल्द ही भारतीय टीम में जगह बनाएगा।

वैभव को बचपन में जो सहयोग मिला, उसका परिणाम आज उसकी उपलब्धियों में देखने को मिल रहा है। यह परिवार के लिए खुशी का पल है और भारत भर के कई महत्वाकांक्षी क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा है।

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