Falta Repoll: वोटिंग से पहले 'पुष्पा' ढेर! फलता सीट पर TMC के जहांगीर खान ने क्यों वापस लिया नाम? अब क्या होगा
TMC Candidate Jahangir Khan Withdrawing from Falta Repoll: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों एक ऐसा सियासी भूचाल आया हुआ है, जिसने चुनावी पंडितों को भी हैरान कर दिया है। राज्य की फलता विधानसभा सीट पर 21 मई को दोबारा मतदान (Repoll) होना है लेकिन इस वोटिंग से ठीक दो दिन पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार जहांगीर खान ने अचानक मैदान छोड़कर सबको चौंका दिया है। कल तक जो नेता इलाके में अपनी मजबूत पकड़ का दावा कर रहा था। उसने चुनाव से ठीक 48 घंटे पहले अपना नामांकन वापस ले लिया है।
इस नाटकीय घटनाक्रम के बाद बंगाल का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां जहांगीर खान का कहना है कि उन्होंने यह फैसला फलता के विकास और शांति के लिए लिया है, वहीं उनकी अपनी पार्टी टीएमसी ने इसे 'दबाव के आगे घुटने टेकना' करार दिया है। दूसरी तरफ, सूबे की सत्ता पर काबिज हो चुकी बीजेपी और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस पर तीखा तंज कसा है। आइए एक खोजी पत्रकार के नजरिए से समझते हैं कि आखिर फलता सीट पर ऐसा क्या हुआ कि टीएमसी उम्मीदवार को ऐन वक्त पर मैदान से भागना पड़ा।

सीएम सुवेंदु अधिकारी का वादा या कोई अंदरूनी डर?
मैदान से हटने के बाद जहांगीर खान ने जो बयान दिया, उसने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। जहांगीर खान ने कहा,
"मेरा एकमात्र मकसद फलता के लोगों की सुरक्षा, वहां शांति व्यवस्था बनाए रखना और इलाके का ज्यादा से ज्यादा विकास करना है। मेरा सपना हमेशा से 'सोनार फलता' (सुनहरा फलता) बनाने का रहा है। हमारे मुख्यमंत्री (सुवेंदु अधिकारी) ने फलता की जनता के लिए एक विशेष विकास पैकेज देने का वादा किया है और इसी बड़े हित को देखते हुए मैं अपना नामांकन वापस ले रहा हूं।"
जहांगीर का कहना है कि वे विकास की राजनीति के लिए पीछे हटे हैं। हालांकि मुख्यमंत्री सुवेंदुअधिकारी ने उनके इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इस पर जोरदार तंज कसा है। सुवेंदु अधिकारी ने साफ शब्दों में कहा कि जहांगीर खान चुनावी मैदान से इसलिए दुम दबाकर भाग गए क्योंकि उन्हें अपनी हार साफ दिख रही थी और मतदान के दिन बूथों पर बिठाने के लिए कोई पोलिंग एजेंट तक नहीं मिल रहा था।
टीएमसी का आरोप: 'एजेंसियों और प्रशासन के दबाव में टूटे जहांगीर'
जहांगीर खान के इस फैसले से हैरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट साझा कर अपना गुस्सा जाहिर किया है। टीएमसी ने साफ किया कि चुनाव से हटने का फैसला जहांगीर खान का व्यक्तिगत निर्णय है, इसमें पार्टी की कोई सहमति नहीं है। इसके साथ ही टीएमसी ने चुनाव आयोग और पुलिस प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
टीएमसी का दावा है कि जब से 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हुए हैं, तब से अकेले फलता विधानसभा क्षेत्र में उनके 100 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने झूठे मामलों में गिरफ्तार कर लिया है। पार्टी का आरोप है कि दिनदहाड़े उनके कई दफ्तरों में तोड़फोड़ की गई, उन्हें बंद कर दिया गया और डरा-धमकाकर उन पर कब्जा कर लिया गया। टीएमसी ने कहा कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद चुनाव आयोग (EC) इस गुंडागर्दी पर आंखें मूंदे बैठा रहा।
पार्टी के मुताबिक इतने भारी दबाव के बावजूद उनके आम कार्यकर्ता चट्टान की तरह खड़े हैं और बीजेपी की प्रताड़ना का सामना कर रहे हैं, लेकिन कुछ लोग (जहांगीर खान जैसे) इस दबाव को झेल नहीं पाए और मैदान छोड़कर भाग गए। टीएमसी ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि 'बांग्ला विरोधी' बीजेपी के खिलाफ उनकी लड़ाई बंगाल से लेकर दिल्ली तक जारी रहेगी।
आखिर क्यों रद्द करनी पड़ी थी फलता की पूरी वोटिंग?
यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर फलता सीट पर दोबारा चुनाव कराने की नौबत क्यों आई। दरअसल 29 अप्रैल को इस सीट पर पहले चरण के तहत मतदान हुआ था। लेकिन उस दौरान बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली, हिंसा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पूरी तरह से ठप करने की शिकायतें सामने आईं। इसके बाद चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए फलता के सभी 285 पोलिंग स्टेशनों पर हुए मतदान को पूरी तरह से रद्द कर दिया था।
चुनाव पर्यवेक्षकों (Observers) की रिपोर्ट में जो खुलासे हुए वे बेहद चौंकाने वाले थे। रिपोर्ट के मुताबिक, कई बूथों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) के साथ छेड़छाड़ की गई थी। हद तो तब हो गई जब कई पोलिंग बूथों पर बैलट यूनिट के बटनों पर काला टेप चिपका दिया गया था। ताकि मतदाता अपनी पसंद की पार्टी को वोट ही न दे पाएं।
इसके अलावा भारी संख्या में बाहरी और अनधिकृत लोग पोलिंग बूथों के भीतर घुस गए और उन्होंने असली वोटरों को डरा-धमकाकर उनकी जगह खुद फर्जी वोट डाल दिए। कई जगहों पर पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरों के फुटेज या तो गायब मिले या फिर उनके साथ छेड़छाड़ की गई थी। इसी महाधांधली के कारण आयोग ने यहां 21 मई को री-पोलिंग और 24 मई को वोटों की गिनती कराने का आदेश दिया था।
'पुष्पा' की डायलॉगबाजी और सुवेंदु अधिकारी की खुली चेतावनी
इस चुनावी लड़ाई में फिल्मी अंदाज और व्यक्तिगत हमले भी खूब देखने को मिले। चुनाव प्रचार के दौरान टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने खुद की तुलना सुपरहिट फिल्म 'पुष्पा: द राइज' के तस्कर और बाहुबली किरदार से की थी। उन्होंने इलाके में अपनी धमक दिखाने के लिए बड़े-बड़े दावे किए थे।
इस पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने डायमंड हार्बर में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए सीधे जहांगीर को चेतावनी दी थी। सुवेंदु अधिकारी ने गरजते हुए कहा था, "कहां है वो पुष्पा नाम का डकैत? अब वो कहीं दिखाई क्यों नहीं दे रहा है? साल 2021 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने बंगाल के 19 खूंखार और कुख्यात अपराधियों की एक सूची जारी की थी, जहांगीर खान का नाम उस लिस्ट में शामिल था। उसे मेरे भरोसे छोड़ दीजिए, मैं उससे अच्छे से निपटना जानता हूं।"
इस रैली से ठीक पहले पुलिस ने कार्रवाई करते हुए जहांगीर खान के बेहद करीबी और फलता में तृणमूल कांग्रेस के उपाध्यक्ष सैदुल खान को जान से मारने की धमकी देने सहित कई गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तार कर लिया था, जिससे जहांगीर पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गए थे।
बंगाल में 15 साल बाद सत्ता परिवर्तन का असर
जहांगीर खान का इस तरह री-पोल से ठीक पहले मैदान छोड़ देना, बंगाल की बदल चुकी राजनीतिक हकीकत का एक बड़ा उदाहरण है। साल 2026 के इस विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए कुल 207 सीटों पर प्रचंड जीत हासिल की है। इस जीत के साथ ही राज्य में पिछले 15 सालों से चला आ रहा ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) का एकछत्र राज पूरी तरह से खत्म हो गया है।
इस चुनाव में टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमट कर रह गई है। सत्ता बदलने के बाद से ही राज्य के प्रशासनिक और पुलिसिया समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। कभी सत्ता के संरक्षण में रहने वाले जहांगीर खान जैसे नेता अब कानूनी और प्रशासनिक शिकंजे के डर से बैकफुट पर आ गए हैं। यही वजह है कि फलता में दोबारा होने वाले चुनाव से पहले ही टीएमसी ने एक तरह से वॉकओवर दे दिया है। अब देखना यह होगा कि 21 मई को होने वाले री-पोल में फलता की जनता इस पूरे घटनाक्रम पर क्या प्रतिक्रिया देती है और 24 मई को आने वाले नतीजे किस करवट बैठते हैं।














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