PV Sindhu: कैसा रहा पीवी सिन्धु का सफर? जीत के साथ किया पेरिस ओलंपिक का आगाज, जानिए जीतीं हैं अबतक कितने मेडल
PV Sindhu Journey: भारत की शीर्ष शटलर पुसरला वेंकट सिंधु यानी पीवी सिंधु ने अपने पेरिस ओलंपिक अभियान की शुरुआत रविवार, 28 जुलाई को ग्रुप-स्टेज मैच में मालदीव के फातिमथ नबाहा अब्दुल रज्जाक पर 21-9, 21-6 से शानदार जीत के साथ की। सिंधु ने गेम में अपना पहला अंक जीतने के लिए रज्जाक की अप्रत्याशित गलती का फायदा उठाया।
भारतीय बैडमिंटन का पर्याय बन चुकीं पीवी सिंधु ने लंदन 2012 ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद से कई उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। बारह साल बाद, वह दो व्यक्तिगत ओलंपिक पदक जीतने वाली केवल दो भारतीयों में से एक हैं।

पीवी सिंधु का प्रारंभिक जीवन और प्रशिक्षण
सिंधु का जन्म हैदराबाद में राष्ट्रीय वॉलीबॉल खिलाड़ियों के घर हुआ था और उन्होंने पूर्व भारतीय बैडमिंटन स्टार पुलेला गोपीचंद से प्रशिक्षण लिया था। यह वही अकादमी है जहां साइना नेहवाल ने भी अपने कौशल को निखारा था। 2014 में, साइना के गोपीचंद बैडमिंटन अकादमी छोड़ने के बाद, सिंधु भारतीय बैडमिंटन का नया चेहरा बनकर उभरीं।
रियो 2016 और टोक्यो 2020
रियो 2016 ओलंपिक के दौरान सिंधु ने उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बनाई। इन खेलों में भारत के निराशाजनक प्रदर्शन के बावजूद, उनका रजत पदक सबसे अलग था। वह विश्व की नंबर 1 कैरोलिना मारिन के खिलाफ पहला सेट जीतने में भी सफल रहीं, लेकिन आखिरकार हार गईं।
टोक्यो 2020 में सिंधु को छठी वरीयता दी गई थी और वह सेमीफाइनल मैच हार गई थी, हालांकि उस गेम से पहले उन्होंने कोई सेट नहीं गंवाया था। हालांकि, उन्होंने वापसी करते हुए कांस्य पदक जीता, जो उनका दूसरा ओलंपिक पदक था।
पीवी सिंधु की 2016 के बाद की उपलब्धियां
सिंधु का करियर 2016 के बाद कई उल्लेखनीय जीत के साथ आगे बढ़ा। उन्होंने 2019 BWF विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता, यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह एकमात्र भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बनीं। इसके अलावा, उन्होंने 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता और बाद में 2022 में महिला एकल में स्वर्ण पदक जीता।
वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाएं
पेरिस 2024 में विश्व स्तर पर 13वें स्थान पर पहुंचने वाली सिंधु को अब कोई प्रबल दावेदार नहीं माना जा रहा था। हालांकि, बड़े मंचों पर सिंधु का अनुभव उन्हें एक अनूठी बढ़त और तीसरे रंग के साथ ओलंपिक पदकों के अपने संग्रह को पूरा करने का मौका देता है।
पुलेला गोपीचंद द्वारा प्रशिक्षित होने से लेकर भारत की सबसे बड़ी ओलंपियन बनने तक की सिंधु की यात्रा प्रेरणादायक है। भारतीय खेलों में उनकी विरासत बढ़ती जा रही है क्योंकि उनका लक्ष्य पेरिस 2024 में और अधिक ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल करना है।
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